फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   The gang was based in twelve hours Kareli

बारह घंटे करेली में टिका था गिरोह

Fri, 12 Aug 2016 02:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Fri, 12 Aug 2016 02:01 AM IST
विज्ञापन
The gang was based in twelve hours Kareli
क्राइम - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
जल निगम के सेक्शन अफसर को अपहरण के बाद सोमवार आधी रात लखनऊ से लाकर यहां करेली के एक मकान में रखा गया था। इस मकान में गिरोह दूसरे रोज दोपहर तक यानी तकरीबन बारह घंटे टिका रहा। लखनऊ में पकड़े गए सरगना समेत दो अपराधियों से यह जानकारी मिलने के बाद क्राइम ब्रांच और एसटीएफ ने करेली में आसिफ के घर में छापा मारकर तलाशी ली। आसिफ के साथ ही इलाहाबाद में गिरोह के साथ रहे करेली में रसूलपुर के अमजद तथा सोरांव में जलालपुर के मोहम्मद जमील को पकड़ लिया गया। उन तीनों से घटना के बारे में पूछताछ की गई। 
विज्ञापन


एसएसपी जोगेंद्र कुमार के मुताबिक, लखनऊ के जल निगम में तैनात सेक्शन अफसर अब्दुल सलीम फरीदी को नूतन ओझा उर्फ नीतू सिंह से फोन कराकर सोमवार रात करीब आठ बजे हजरतगंज में कॉफी हाउस पर बुलाकर अगवा करने से पहले ही यहां करेली में आसिफ को आगाह कर दिया गया था। लखनऊ से चलकर रात करीब पौने एक बजे अगवा सलीम को लेकर इमरान, जीतेश, संदीप सिंह और उसकी कथित पत्नी नीतू यहां आसिफ के घर पहुंचे। आसिफ ने उन्हेें एक कमरे में ठहरा दिया गया। अपनी पत्नी समेत परिवार के लोगों को बताया कि वे उसके  मेहमान हैं। रात भर गिरोह के बदमाश बारी-बारी से सोते-जागते रहे। अगवा सेक्शन अफसर सलीम का मोबाइल फोन इमरान ने अपने कब्जे में ले लिया था। 
विज्ञापन


इस वारदात में बृहस्पतिवार को उतरांव इलाके में पकड़े गए अमजद और जमील ने पुलिस को पूछताछ में काफी जानकारी दी। जमील ने बताया कि मंगलवार सुबह करीब आठ बजे अमजद ने उसे फोन किया और इमरान से बात कराई। इमरान ने उसे फौरन करेली में आसिफ के घर बुलाया। जमील आया तो मकान में अगवा सेक्शन अफसर के साथ इमरान, जीतेश कोर्वे, संदीप, नीतू सिंह और अमजद मौजूद थे। जमील से संदीप सिंह की स्कार्पियो चलाने के लिए कहा गया। संदीप को मकान में सोता छोड़कर बाकी लोग स्कार्पियो में अगवा सलीम को बैठाकर अरैल ले गए। वहां सलीम के ही फोन से उनके बेटे को फोन कराकर दस लाख रुपये फिरौती का इंतजाम कराने के लिए कहा गया। वे फिर करेली में आसिफ के घर लौट आए।
विज्ञापन
विज्ञापन


फिर करीब बारह बजे वे संदीप को भी स्कार्पियो में बैठाकर सहसों की तरफ गए। वहां एकांत में जाकर फिर सलीम से उनके ही फोन से फिरौती की रकम के लिए लखनऊ में उनके परिजनों को फोन कराया गया। अपहर्ता इसलिए करेली से दूर जाकर फोन कराते थे ताकि मोबाइल की लोकेशन के जरिए तलाश में लगी लखनऊ पुलिस उन्हें पकड़ नहीं सके। सहसों जाने से पहले इमरान ने मुट्ठीगंज से शराब की बोतलें खरीदी थीं, जिसे वह साथियों संग पीता रहा।

शाम करीब चार बजे सलीम के बेटे ने संदीप के एचडीएफसी बैंक के खाते में दस लाख रुपये फिरौती ट्रांसफर करने की जानकारी दी तो इमरान ने नीतू से खाता नंबर पूछकर झूंसी के एक एटीएम बूथ में जाकर बैलेंस चेक किया। एसएसपी के मुताबिक, रकम जमा होने की पुष्टि होने के बाद वे शराब पीते हुए स्कार्पियो में कोखराज-हंडिया फोरलेन हाइवे पर पहुंच गए। तब तक अंधेरा घिर गया था। उतरांव के सराय बंशी गांव के पास हाईवे पर इमरान ने जमील से स्कार्पियो रोकने के लिए कहा। फिर उसने गाड़ी से उतरकर नीतू से कहा कि बाहर आओ कुछ बात करनी है। वह नीतू को गाड़ी से कुछ कदम दूर ले गया और कनपटी पर तमंचा सटाकर गोली मार दी। वह ढेर होकर सड़क पर गिर गई।

संदीप ने स्कार्पियो से निकलने की कोशिश की तो उसे दबोच लिया गया। इमरान, अमजद, जीतेश ने उसे पीटा और जमील से गाड़ी वापस सोरांव की तरफ ले चलने को कहा। सोरांव टोल प्लाजा के आगे मलाका के पास रात करीब नौ बजे अगवा सलीम को गाड़ी से उतार इमरान ने 15 सौ रुपये देकर लखनऊ जाने के लिए कहा। इसके बाद फाफामऊ में शांतिपुरम स्थित एसबीआई के एटीएम से जीतेश ने संदीप के एटीएम कार्ड के जरिए तीन बार में 10-10 हजार रुपये यानी तीस हजार रुपये निकाले। फिर जमील ने स्कार्पियो हाईवे पर हंडिया की तरफ बढ़ा दी। नशे में धुत इमरान, अमजद, जीतेश पिछली सीट पर बीच में बैठे संदीप के सिर पर लोहे की राड, बेंत, शराब की खाली बोतल और ईंट से वार करने लगे। इतना मारा कि उसका जबड़ा टूट गया। सिर पर कई घाव हो गए। गाड़ी और तीनों हमलावर बदमाश भी खून से तर हो गए। संदीप की मौत हो गई। आधी रात करीब बारह बजे हाईवे से स्कार्पियो उतारने के बाद बगहा के निकट संदीप का शव सड़क किनारे झाड़ी में फेंक दिया गया। 

संदीप का शव ठिकाने लगाने के बाद वे स्कार्पियो से शास्त्री पुल और नया यमुना पुल पारकर नैनी में एग्रीकल्चर चौकी के निकट पहुंचे तब तक गाड़ी का डीजल भी खत्म हो गया। गाड़ी को मस्जिद के पास सड़क किनारे खड़ी कर उन लोगों ने कपड़े बदले। फिर वे कुछ दूर पर एक लॉज में रात भर सोए। सुबह जमील और अमजद करेली चले गए। जमील करेली में अपनी बाइक लेकर सोरांव में घर चला गया। इमरान और जीतेश टेंपो से शहर आए और वहां से लखनऊ रवाना हो गए। इस पूरी घटना के दौरान जीतेश और इमरान ने एक बार भी अपना मोबाइल फोन नहीं इस्तेमाल किया। 

एसएसपी ने बताया कि हाईवे पर इमरान ने स्कार्पियो से बाहर बुलाकर नीतू की गोली मारकर हत्या अगवा सेक्शन अफसर सलीम के सामने की थी। मगर अपहर्ताओं के चंगुल से मुक्त होने के बाद पुलिस और एसटीएफ से बातचीत में सलीम ने कत्ल के बारे में कोई जिक्र नहीं किया वरना बुधवार सुबह होने से पहले ही दोनों कत्ल का पता चल जाता और शायद कातिल इलाहाबाद में ही पकड़ लिए जाते।

गिरोह सरगना इमरान ने स्कार्पियो में नीतू और संदीप के मर्डर तथा 14 घंटे तक वारदात में साथ रहने वाले अमजद को 15 सौ रुपये तथा जमील को नौ हजार रुपये दिए थे। कहा था कि संदीप के खाते से और पैसे निकालने के बाद उन्हें देगा लेकिन सभी पकड़े गए। अमजद के बारे में बताया गाय कि उसे फ्राड के मामले में जार्जटाउन पुलिस ने एक बार पकड़ा था। जमील की भी गतिविधियां आपराधिक रही हैं। 

पहरण और फिरौती उगाही के बाद गिरोह के लोगों द्वारा ही मारी गई नूतन ओझा उर्फ नीतू पांडेय उर्फ रीतू सिंह के शव का पोस्टमार्टम बृहस्पतविार को काफी देरी से  शाम करीब चार बजे हुआ। बेनीगंज करेली से आए उसके मायके वालों में दुख से ज्यादा उसकी कारगुजारी की वजह से गुस्सा रहा। भाई अरविंद पांडेय समेत परिजनों ने मीडिया से भी बात करने से साफ मना किया। पोस्टमार्टम में भी देरी से वे बेहद उखड़े और नाराज रहे। नीतू का ब्याह अल्लापुर में रहने वाले प्रतापगढ़ में हथिगवां निवासी ईंट भट्ठा मालिक अरविंद ओझा से किया गया था लेकिन वह पिछले साल धूमनगंज में ट्रांसपोर्ट नगर निवासी संदीप सिंह के साथ भागकर लखनऊ चली गई थी।


संदीप भी शादीशुदा और बच्ची का पिता था। वह नौकरी छोड़कर प्रापर्टी डीलिंग करने लगा था। दोनों ही ऊंची महत्वाकांक्षा वाले थे और जल्द पैसा कमाने के चक्कर में मऊआइमा के अपराधी इमरान के फेर में आ गए। एसएसपी जोगेंद्र कुमार के मुताबिक, नीतू ने तमाम नेताओं और आला अफसरों से संपर्क बना लिया था। वह खुद को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष बताती। परिचितों से कहती कि वह करोड़ों रुपये के रीयल एस्टेट कारोबार से जुड़ी है। होटल खोलने वाली है। अरविंद के शव का अंतिम संस्कार बुधवार रात ही हो गया था जबकि नीतू की अंत्येष्टि बृहस्पतिवार शाम की गई। उसकी ससुराल से कोई भी नहीं आया।  
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed