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एसआईटी का एक्सिस बैंक में छापा, चार घंटे तक खंगाले रिकार्ड

Tue, 01 Aug 2017 02:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Tue, 01 Aug 2017 02:03 AM IST
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SIT raided Axis Bank, records for four hours
इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
विशेष जांच टीम प्रभारी एसपी क्राइम के साथ पुलिस अफसरों ने एक्सिस बैंक की सिविल लाइंस शाखा में शुआट्स के करीब 50 करोड़ के गबन के मामले  में सोमवार साढ़े तीन बजे छापा मारा। बैंक परिसर में करीब चार घंटे तक अफसरों ने 2008 से लेकर 2016 तक के शुआट्स से जुड़े बैंक खातों के रिकार्ड खंगाले। इस दौरान कई सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। उनके आधार पर बैंक की इंटरनल जांच टीम के  अधिकारी मलप्पा डी पाटिल और पी नटराज को मुंबई से इलाहाबाद तलब किया गया है। बैंक के ये दोनों अधिकारी मंगलवार को प्लेन से इलाहाबाद आएंगे और एसआईटी के सामने अपना पक्ष रखेंगे। बता दें कि शुआट्स के खाते से पहले 22.39 करोड़ के गबन की जानकारी मिली थी मगर जैसे-जैसे जांच बढ़ी, सामने आया कि घोटाला इससे दोगनी रकम का है। एसआईटी के अधिकारियों का मानना है कि अभी भी ठीक-ठीक नहीं बताया जा सकता है कि गबन वास्तव में कितने करोड़ का हुआ है। फिलहाल 50 करोड़ तक के गोलमाल का ही पता चला है।
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हाईकोर्ट के आदेश पर जांच के लिए बनाई गई विशेष जांच टीम के प्रभारी एसपी क्राइम बीके मिश्रा के साथ सीओ कर्नलगंज आलोक मिश्रा दोपहर साढ़े तीन बजे सिविल लाइंस स्थित एक्सिस बैंक पहुंचे। बैंक में पुलिस अफसरों के पहुंचते ही हड़कंप मच गया। यहां पर पुलिस ने ब्रांच हेड योगेश वाजपेयी, आपरेशन हेड रोहित कुमार, सीनियर मैनेजर गरिमा श्रीवास्तव सहित सात अफसरों से पूछताछ की। कुछ रिकार्ड कब्जे में भी लिए हैं।
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आठ और बैंक अफसर शिकंजे में आए

बैंक की आंतरिक जांच में निवर्तमान ब्रांड हेड संतोष पंकज सहित आठ बैंक अधिकारियों को शुआट्स के 22.39 करोड़ बिना चेक के निकालने के लिए दोषी पाया गया था। इन लोगों को बैंक ने अपने स्तर से दंडित किया, उनको बर्खास्त कर दिया गया लेकिन उनके खिलाफ थाने में रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई। यह खुलासा एसआईटी के सामने खंगाले गए रिकार्ड से हुआ। बैंक अधिकारी पुलिस को जांच के दौरान सवालों का ठीक से जवाब नहीं दे पाए। अहम सवाल तो यह था कि जब बैंक अपने आठ अफसरों को दोषी बताकर दंडित कर चुकी है तो उनको एफआईआर में शामिल क्यों नहीं किया गया। मौखिक अनुरोध पर बैंक ने चेक जमा हुए बिना लाखों रुपये कैसे दे दिए। जबकि एक छोटे से कर्मचारी कमाल अहसान के खिलाफ ही रिपोर्ट दर्ज कराकर मामला शांत करने की कोशिश की गई है।
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शुआट्स के लेखाकार राजेश कुमार खुद, पत्नी और रिश्तेदारों के अलावा कुछ अन्य फर्जी खाते खोलकर कई करोड़ रुपये जमा कराते रहे।  कुछ दिनों बाद टुकड़ों में यह रकम निकाली जाती रही। 2008 से यह सिलसिला 2016 तक चलता रहा। इसका उल्लेख बैंक की हाईपावर विजिलेंस जांच कमेटी की रिपोर्ट में किया है। बैंक की ओर से कुछ खातेदारों  के पतों का सत्यापन कराया तो वहां पर उन नाम के लोग मिले ही नहीं। रजिस्टर्ड डाक से पत्र भी भेजे गए जो कि अधूरा पता तथा इन नामों के व्यक्तियों की जानकारी न होने का उल्लेख करके डाक विभाग ने बैंक में वापस भेज दिए।

जांच के दौरान खुलासा हुआ है कि 370 चेक में से अधिकांश चेक बैंक में दिए ही नहीं गए, बल्कि उनके नंबरों का हवाला देकर यह रकम निकाल ली गई।

गबन का दूसरा आरोपी शुआट्स के लेखाकार राजेश कुमार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने फरार घोषित कर दिया है। उसके घर पर धारा 82 के तहत नोटिस चस्पा कर दिया है। इसके बाद पुलिस की ओर से धारा 83 के तहत उसके घर की चल एवं अचल संपत्ति को कुर्क कराने की कार्रवाई शुरू करा दी गई है।


‘ बैंक में छापे के दौरान ब्रांच हैड सहित आधा दर्जन अफसर पुलिस की ओर से पूछे गए सवालों का ठीक से जवाब नहीं दे पाए। इसीलिए आंतरिक जांच के लिए बनी टीम के अधिकारियों को पूछताछ के लिए तलब किया है। उनकी रिपोर्ट के आधार पर कई और अफसरों को दोषी मानकर पुलिस कार्रवाई होगी। बैंक का यह तर्क ठीक नहीं है कि उनकी जांच में तो दोषी हैं लेकिन उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। छोटे स्तर के सिर्फ दो लोगों को नामजद करने से बैंक की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।’ बीके मिश्रा, एसपी क्राइम
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