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सीवर चैंबर की सफाई करने उतरे दो मजदूरों की मौत
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 25 Mar 2016 12:19 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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सीवर लाइन के काम में गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अफसरों की अनदेखी और कंपनी की लापरवाही के कारण होली के ठीक पहले मंगलवार को एक बार फिर दो मजदूर काल के गाल में समा गए। बिना सुरक्षा उपकरणों के हेस्टिंग रोड पर इंदिरा मूर्ति चौराहा से बहुगुणा मार्केट के बीच सीवर चैंबर की सफाई कर रहे दोनों मजदूर जहरीली गैस का शिकार हो गए। उधर से गुजर रहे सेना के एक जवान ने बहादुरी का परिचय देते हुए चैंबर में उतरकर दोनों को बाहर निकाला लेकिन मजदूरों की जान नहीं बचाई जा सकी।
गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने सीवर लाइन की सफाई का काम गाजियाबाद की शर्मा कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया है। कंपनी यह काम खुद करने के बजाए पेटी कॉन्ट्रेक्टरों से करा रही है, जिनके पास न कार्य का अनुभव और न ही मजदूरों की सुरक्षा के लिए कोई उपकरण। पेटी कॉन्ट्रेक्टर मजदूरों को बाल्टी और रस्सी देकर सीवर की सफाई कराते हैं। सराय इनायत के महमूदाबाद गांव के पिंकू (28) पुत्र रामसुमेर एवं लल्ली (35) पुत्र मुन्नी लाल अपने एक अन्य साथी के साथ मंगलवार को दिन में करीब 11 बजे इंदिरा मूर्ति चौराहा से बहुगुणा मार्केट के बीच सड़क पर बने चैंबर की सफाई कर रहे थे।
पिंकूऔर लल्ली रस्सी के सहारे बाल्टी लेकर नीचे उतरे हुए थे, जबकि उनका साथी ऊपर था। इस बीच चैंबर से अचानक जहरीली गैस निकली, जिसकी चपेट में आते ही दोनों मजदूर अंदर ही बेहोश हो गए। गैस का अहसास होते ही ऊपर खड़ा मजदूर पीछे हट गया। कुछ मिनट बाद उसने चैंबर में झांका और चिल्लाकर मदद मांगी। सड़क से गुजर रहे लोग वहां जुट गए लेकिन चैंबर में उतरने की हिम्मत किसी की नहीं हुई।
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वहां मौजूद पूर्व पार्षद चंद्र प्रकाश गंगा एवं प्रदेश कांग्रेस महासचिव मुकुंद तिवारी ने इसकी जानकारी फायर बिग्रेड के साथ सौ नंबर पर दी। इस बीच उधर से गुजर रहे न्यू कैंट में तैनात सेना के जवान रामजी कुमार यादव कमर में रस्सी और नाक में रुमाल बांधकर चैंबर में कूद पड़े। हालांकि वह भी जहरीली गैस की चपेट में आए लेकिन उन्होंने बहादुरी का परिचय देते हुए दोनों मजदूरों को बाहर निकला। तब तक पिंकू की मौत हो चुकी थी। इस बीच कैंट थाने की पुलिस, फायर बिग्रेड भी मौके पर पहुंच गई। पिंकू का शव एवं बेहोश लल्ली को तत्काल स्वरूपरानी अस्पताल ले जाया गया लेकिन उसकी भी जान नहीं बचाई जा सकी।
गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने मजदूरों पिंकू और लल्ली के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी है। इसके साथ शर्मा कंस्ट्रक्शन कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। इकाई के महाप्रबंधक अजेय रस्तोगी ने बताया कि कंपनी को काम में लगातार लापरवाही कर रही है। ऐसे में उससे अब ब्लैक लिस्ट किया जाएगा।
दो मजदूरों की जान जाने के बावजूद सीवर सफाई करा रहे पेटी कॉन्ट्रेक्टर और शर्मा कंस्ट्रक्शन कंपनी का कोई भी कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा। यहां तक की अस्पताल भी नहीं गए। बाद में गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के जीएम ने अपने अभियंताओं को अस्पताल भेजा और मृत मजदूरों के परिजनों को सूचित भी किया।
डीएम संजय कुमार ने इंदिरा मूर्ति चौराहा के पास सीवर चैंबर की सफाई के दौरान मजदूरों की मौत के जांच का आदेश दिया है। उन्होंने गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के परियोजना प्रबंधक ज्ञानेंद्र चौधरी एवं अपर नगर आयुक्त विपिन कुमार मिश्रा के नेतृत्व में टीम गठित की है। टीम मजदूरों की मौत के कारणों की जांच कर एक सप्ताह में रिपोर्ट डीएम को सौंपेगी।
वर्ष 2011 में ममफोर्डगंज में सीवर चैंबर के निर्माण के दौरान मिट्टी धंसने से उसमें दबकर दो मजदूरों की मौत हो गई थी। उस दौरान भी चैंबर बनाने का काम पेटी कॉन्ट्रेक्टरों को दिया गया था। इसके बाद वर्ष 2013 में स्टेनली रोड पर सीवर चैंबर की सफाई करते वक्त भी जहरीली गैस की चपेट में आने से दो मजदूरों की मौत हो चुकी है।
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गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने सीवर लाइन की सफाई का काम गाजियाबाद की शर्मा कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया है। कंपनी यह काम खुद करने के बजाए पेटी कॉन्ट्रेक्टरों से करा रही है, जिनके पास न कार्य का अनुभव और न ही मजदूरों की सुरक्षा के लिए कोई उपकरण। पेटी कॉन्ट्रेक्टर मजदूरों को बाल्टी और रस्सी देकर सीवर की सफाई कराते हैं। सराय इनायत के महमूदाबाद गांव के पिंकू (28) पुत्र रामसुमेर एवं लल्ली (35) पुत्र मुन्नी लाल अपने एक अन्य साथी के साथ मंगलवार को दिन में करीब 11 बजे इंदिरा मूर्ति चौराहा से बहुगुणा मार्केट के बीच सड़क पर बने चैंबर की सफाई कर रहे थे।
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पिंकूऔर लल्ली रस्सी के सहारे बाल्टी लेकर नीचे उतरे हुए थे, जबकि उनका साथी ऊपर था। इस बीच चैंबर से अचानक जहरीली गैस निकली, जिसकी चपेट में आते ही दोनों मजदूर अंदर ही बेहोश हो गए। गैस का अहसास होते ही ऊपर खड़ा मजदूर पीछे हट गया। कुछ मिनट बाद उसने चैंबर में झांका और चिल्लाकर मदद मांगी। सड़क से गुजर रहे लोग वहां जुट गए लेकिन चैंबर में उतरने की हिम्मत किसी की नहीं हुई।
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वहां मौजूद पूर्व पार्षद चंद्र प्रकाश गंगा एवं प्रदेश कांग्रेस महासचिव मुकुंद तिवारी ने इसकी जानकारी फायर बिग्रेड के साथ सौ नंबर पर दी। इस बीच उधर से गुजर रहे न्यू कैंट में तैनात सेना के जवान रामजी कुमार यादव कमर में रस्सी और नाक में रुमाल बांधकर चैंबर में कूद पड़े। हालांकि वह भी जहरीली गैस की चपेट में आए लेकिन उन्होंने बहादुरी का परिचय देते हुए दोनों मजदूरों को बाहर निकला। तब तक पिंकू की मौत हो चुकी थी। इस बीच कैंट थाने की पुलिस, फायर बिग्रेड भी मौके पर पहुंच गई। पिंकू का शव एवं बेहोश लल्ली को तत्काल स्वरूपरानी अस्पताल ले जाया गया लेकिन उसकी भी जान नहीं बचाई जा सकी।
गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने मजदूरों पिंकू और लल्ली के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी है। इसके साथ शर्मा कंस्ट्रक्शन कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। इकाई के महाप्रबंधक अजेय रस्तोगी ने बताया कि कंपनी को काम में लगातार लापरवाही कर रही है। ऐसे में उससे अब ब्लैक लिस्ट किया जाएगा।
दो मजदूरों की जान जाने के बावजूद सीवर सफाई करा रहे पेटी कॉन्ट्रेक्टर और शर्मा कंस्ट्रक्शन कंपनी का कोई भी कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा। यहां तक की अस्पताल भी नहीं गए। बाद में गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के जीएम ने अपने अभियंताओं को अस्पताल भेजा और मृत मजदूरों के परिजनों को सूचित भी किया।
डीएम संजय कुमार ने इंदिरा मूर्ति चौराहा के पास सीवर चैंबर की सफाई के दौरान मजदूरों की मौत के जांच का आदेश दिया है। उन्होंने गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के परियोजना प्रबंधक ज्ञानेंद्र चौधरी एवं अपर नगर आयुक्त विपिन कुमार मिश्रा के नेतृत्व में टीम गठित की है। टीम मजदूरों की मौत के कारणों की जांच कर एक सप्ताह में रिपोर्ट डीएम को सौंपेगी।
वर्ष 2011 में ममफोर्डगंज में सीवर चैंबर के निर्माण के दौरान मिट्टी धंसने से उसमें दबकर दो मजदूरों की मौत हो गई थी। उस दौरान भी चैंबर बनाने का काम पेटी कॉन्ट्रेक्टरों को दिया गया था। इसके बाद वर्ष 2013 में स्टेनली रोड पर सीवर चैंबर की सफाई करते वक्त भी जहरीली गैस की चपेट में आने से दो मजदूरों की मौत हो चुकी है।