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सीएम के बारे में आपत्तिजनक मैसेज लिखने वाले को राहत
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 07 Sep 2017 01:16 AM IST
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कुछ विधायकों के संबंध मेें आपत्तिजनक मैसेज लिखकर वायरल करने वाले प्राथमिक अध्यापक के खिलाफ कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने अध्यापक को उसके मूल पद पर भेजने के बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई और जांच प्रारंभ करने का निर्देश दिया है। आरोपी अध्यापक मनोज यादव ने विभागीय कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उसकी याचिका पर न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल सुनवाई कर रहे हैं।
याची झांसी के प्राथमिक विद्यालय प्रीतमपुर बड़ा गांव में प्रधानाध्यापक के पद पर मूल रूप से तैनात है। इन दिनों उसकी नियुक्ति बीआरसी में सहसमन्वयक के पद पर थी। याचिका में कहा गया कि विवेकानंद नाम के एक व्यक्ति ने याची के मोबाइल पर मैसेज फारवर्ड किया जिसमें लिखा था कि ‘सरकार को इतना बहुमत मिला है कि मुख्यमंत्री और कई विधायक सरप्लस हो गए हैं’ इसके बाद लिखा था कि ‘सरकार के पास वेतन देने के पैसे नहीं हैं तो सरप्लस लोगों से इस्तीफा लिया जाए’। याची के अधिवक्ता राय साहब यादव का कहना था कि बच्चे ने गलती से इस मैसेज को व्हाट्स एप ग्रुपों में डाल दिया। बीएसए झांसी को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने मनोज यादव को उसके मूल पद पर भेजते हुए विभागीय जांच प्रारंभ कर दी।
दलील दी गई कि उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 1999 इस मामले में लागू नहीं होगी। याची की सेवा शर्तों का इस मैसेज से कोई सरोकार नहीं है। उसकी सेवा उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली से संचालित होती है। उसने ख्रुद मैसेज फारवर्ड नहीं किया है। दूसरे यह कि वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मौलिक अधिकार में शामिल है इसलिए मैसेज भेजने पर कार्रवाई नहीं की जा सकती है। याची को जो कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है उसमें यह नहीं लिखा है कि याची ने कोई मैसेज भेजा है और कौन सा मैसेज भेजा है। कोर्ट ने इस मामले में 18 सितंबर तक प्रदेश सरकार और बेसिक शिक्षा विभाग को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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याची झांसी के प्राथमिक विद्यालय प्रीतमपुर बड़ा गांव में प्रधानाध्यापक के पद पर मूल रूप से तैनात है। इन दिनों उसकी नियुक्ति बीआरसी में सहसमन्वयक के पद पर थी। याचिका में कहा गया कि विवेकानंद नाम के एक व्यक्ति ने याची के मोबाइल पर मैसेज फारवर्ड किया जिसमें लिखा था कि ‘सरकार को इतना बहुमत मिला है कि मुख्यमंत्री और कई विधायक सरप्लस हो गए हैं’ इसके बाद लिखा था कि ‘सरकार के पास वेतन देने के पैसे नहीं हैं तो सरप्लस लोगों से इस्तीफा लिया जाए’। याची के अधिवक्ता राय साहब यादव का कहना था कि बच्चे ने गलती से इस मैसेज को व्हाट्स एप ग्रुपों में डाल दिया। बीएसए झांसी को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने मनोज यादव को उसके मूल पद पर भेजते हुए विभागीय जांच प्रारंभ कर दी।
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दलील दी गई कि उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 1999 इस मामले में लागू नहीं होगी। याची की सेवा शर्तों का इस मैसेज से कोई सरोकार नहीं है। उसकी सेवा उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली से संचालित होती है। उसने ख्रुद मैसेज फारवर्ड नहीं किया है। दूसरे यह कि वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मौलिक अधिकार में शामिल है इसलिए मैसेज भेजने पर कार्रवाई नहीं की जा सकती है। याची को जो कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है उसमें यह नहीं लिखा है कि याची ने कोई मैसेज भेजा है और कौन सा मैसेज भेजा है। कोर्ट ने इस मामले में 18 सितंबर तक प्रदेश सरकार और बेसिक शिक्षा विभाग को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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