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 छह साल से ताक में था कातिल 

Fri, 20 May 2016 01:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Fri, 20 May 2016 01:19 AM IST
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Murderer ambushed by six years
मर्डर
दिवंगत डिप्टी एसपी अर्जुन सिंह की पत्नी इंदिरा (65) के कत्ल की जांच में जुटी पुलिस के सामने एक और जानकारी आई है। पता चला है कि उन पर छह साल पहले भी घातक हमला हुआ था। घटनास्थल और घटना का वक्त भी यही थी। हमले का तरीका भी वही। हालांकि तब गले में घाव के बावजूद वह बच गई थीं। मगर हमलावर का पता नहीं चल सका था। तो क्या कातिल छह साल से उनकी जान लेने की ताक में लगा था। पुलिस भी यही मान रही है कि कातिल वही हो सकता है जिसने पहले भी उनकी जान लेने की कोशिश की थी। पुलिस उसका पता लगाने की कोशिश कर रही है। हालांकि कत्ल की वजह ही साफ नहीं है। ऐसे में जायदाद हथियाने के लिए हत्या के एंगल पर जांच की जा रही है।
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दरोगा से प्रमोट होकर डिप्टी एसपी बने अर्जुन सिंह का वर्ष 2009 में देहांत हो गया था। अगले साल 2010 में उनकी पत्नी इंदिरा पर भोर में ही करीब चार बजे कमरे में घुसकर हमला किया गया। तब पेचकस जैसी किसी नुकीली चीज उनके गले में घोंपी गई थी जिससे जख्म तो हुआ लेकिन उनकी जान खतरे में नहीं पड़ी। तब भी कुछ लूटा नहीं गया था। भोर में हमला और लूट नहीं। मगर तब थाने में केस भी नहीं दर्ज कराया गया था इसलिए न तो जांच हुई और न हमलावर का पता चल सका। घटना का तरीका, स्थान और समय एक होने से भी यह अनुमान है कि कातिल वही है जिसने पहले भी उन्हें मारने की कोशिश की थी।
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जांच और पूछताछ से पुलिस को पता चला कि इंदिरा करोड़ों की संपत्ति की मालिक थीं। अल्लापुर का तीन मंजिला मकान ही एक करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत का है। उसमें आठ दुकानें हैं। उनके पति दिवंगत अर्जुन सिंह ने फतेहपुर में अपने पैतृक गांव के बगल के जयरामपुर में डिग्री कॉलेज बनाया था। लखनऊ के मोहनलालगंज में भी उनका मकान है। यूं उनकी जायदाद करीब तीन करोड़ रुपये की है। इसके अलावा हर महीने पेंशन तथा किराए में एक लाख रुपये से ज्यादा इंदिरा को मिलता था। परिवार समेत साथ रहने वाला भतीजा अमरेंद्र कुमार फतेहपुर के एक इंटर कॉलेज में लिपिक है। उसके बेटे शिवम की पढ़ाई और फीस का पूरा खर्च भी इंदिरा उठाती थीं।
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अर्जुन सिंह चार भाइयों में छोटे थे। उनके सहित तीन भाइयों का देहांत हो चुका है। एक भाई करन सिंह फतेहपुर में रहकर वकालत करते हैं। साथ रहने वाला भतीजा अमरेंद्र उनके भाई दिवंगत लखन सिंह का पुत्र है। पुलिस ने इंदिरा के फतेहपुर स्थित ससुराल तथा कौशाम्बी में चंपहा के निकट सोनौली गांव से आए मायके वालों से पूछताछ की। उनके भाई प्रभुनारायण से भी बात की गई। एसपी क्राइम रमाकांत प्रसाद के मुताबिक, यह पता करने की कोशिश हो रही है ऐसा तो नहीं कि खानदान में कोई शख्स संपत्ति को लेकर इंदिरा से नाराज रहा हो। जिसे लगता रहा हो कि उसकी उपेक्षा की जा रही है।

इंदिरा के कातिल को बेनकाब करने के लिए पुलिस ने पूरे घर को खंगाला ताकि कोई क्लू मिल सके लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। एसपी क्राइम और एसपी सिटी ने जार्जटाउन पुलिस और क्राइम ब्रांच के जवानों से इंदिरा के तीनों कमरों से लेकर टायलेट तक में खोजबीन की। कमरे की तलाशी में तमाम धार्मिक पुस्तक और एक डायरी मिलीं। डायरी में उन्होंने खुद और पति के बारे में लिखा था। कमरे में आशाराम बापू की तस्वीर लगा रखी थी। रिश्तेदारों से बातचीत में यह पता चला कि इंदिरा बेहद धार्मिक थीं।


रोज सुबह शाम देर तक पूजा करती थीं। तीन मई को वह उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ में भी गई थीं। पुलिस को तलाशी में कुल्हाड़ी समेत कई औजार मिले लेकिन वह हथियार नहीं मिला, जिससे इंदिरा का कत्ल किया गया था। पूछताछ में भतीजे के बेटे शिवम ने बताया कि वह रात में नीचे इंदिरा के साथ ही रहता था। हालांकि वह दूसरे कमरे में सोता था। मगर कल पेट दर्द होने पर आधी रात बाद ऊपर अपनी मां के पास चला गया था। पुलिस हत्याकांड की तह में जाने के लिए पड़ोसियों से भी पूछताछ कर रही है।
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