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मेडिकल लगाकर अफसर बनने वाले चिह्नित
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 27 May 2018 02:07 AM IST
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं में कई अभ्यर्थी मेडिकल की आड़ में अफसर बन गए। इसके लिए लंबा लेनदेन भी हुआ। यह खुलासा सीबीआई जांच में हुआ है। हालांकि यह शिकायत सीबीआई को दो माह पहले मिली थी। सीबीआई ने जब पूरा मामला खंगाला तो पता चला कि खेल काउंटर से शुरू होता था और इसके बाद अभिलेखों का सत्यापन करने वाले कुछ अफसर अभ्यर्थियों के साथ सौदा करते थे। मामले में एक अभ्यर्थी ने सीबीआई कैंप कार्यालय में अपनी शिकायत भी दर्ज कराई है। सीबीआई की टीम ने अभिलेखों की जांच करने वाले समीक्षा अधिकारियों और अनुभाग अधिकारियों के साथ ऐसे अभ्यर्थियों को भी चिह्नित कर लिया है, जिन्होंने मेडिकल लगाकर अलग से इंटरव्यू दिया और चयनित हो गए। इन सभी से पूछताछ होगी।
सूत्रों का कहना है कि इंटरव्यू में शामिल होने के लिए आयोग जाने वाले अभ्यर्थियों को पहले काउंटर में अपना मोबाइल आदि जमा कराना होता है। इसके बाद आयोग के अंदर प्रवेश करने पर उनके अभिलेखों का सत्यापन किया जाता है। इस कार्य के लिए समीक्षा अधिकारियों और अनुभाग अधिकारियों को लगाया जाता है। अभिलेखों के सत्यापन दौरान अगर कोई आपत्ति लगा दी गई तो अभ्यर्थी का परिणाम बिगड़ सकता है। सूत्रों का कहना है कि सत्यापन करने वाले अधिकारी अभ्यर्थियों से बातचीत करते थे और उन्हें मेडिकल लगाने की सलाह देते थे। मेडिकल लगाने वालों का इंटरव्यू बाद में अलग से होता है। हालांकि सलाह देने से पहले अभ्यर्थियों से बातचीत में उनकी पृष्ठभूमि खंगाली जाती थी और यह जानने की कोशिश होती थी कि अभ्यर्थी लेनदेन के लिए तैयार है या नहीं।
सीबीआई के सामने यह मामला तब आया, जब एक अभ्यर्थी ने सीबीआई कैंप कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। यह अभ्यर्थी लोअर-2015 की परीक्षा में शामिल हुआ था। इस अभ्यर्थी को भी मेडिकल लगाने की सलाह दी गई थी और उसने मेडिकल लगा दिया था। इस बीच सीबीआई टीम आयोग पहुंच गई और भर्ती परीक्षाओं की जांच शुरू हो गई। जब अभ्यर्थी का चयन नहीं हुआ तो वह सीबीआई कैंप कार्यालय पहुंचा और उसने पूरे मामले का खुलासा किया। सूत्रों के मुताबिक शिकायत के आधार पर सीबीआई ने जांच की तो पाया कि आयोग में यह खेल कई वर्षों से चल रहा था। केवल लोअर ही नहीं, पीसीएस, आरओ/एआरओ जैसी परीक्षाओं में भी ऐसा ही हो रहा था।
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सूत्रों का कहना है कि इंटरव्यू में शामिल होने के लिए आयोग जाने वाले अभ्यर्थियों को पहले काउंटर में अपना मोबाइल आदि जमा कराना होता है। इसके बाद आयोग के अंदर प्रवेश करने पर उनके अभिलेखों का सत्यापन किया जाता है। इस कार्य के लिए समीक्षा अधिकारियों और अनुभाग अधिकारियों को लगाया जाता है। अभिलेखों के सत्यापन दौरान अगर कोई आपत्ति लगा दी गई तो अभ्यर्थी का परिणाम बिगड़ सकता है। सूत्रों का कहना है कि सत्यापन करने वाले अधिकारी अभ्यर्थियों से बातचीत करते थे और उन्हें मेडिकल लगाने की सलाह देते थे। मेडिकल लगाने वालों का इंटरव्यू बाद में अलग से होता है। हालांकि सलाह देने से पहले अभ्यर्थियों से बातचीत में उनकी पृष्ठभूमि खंगाली जाती थी और यह जानने की कोशिश होती थी कि अभ्यर्थी लेनदेन के लिए तैयार है या नहीं।
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सीबीआई के सामने यह मामला तब आया, जब एक अभ्यर्थी ने सीबीआई कैंप कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। यह अभ्यर्थी लोअर-2015 की परीक्षा में शामिल हुआ था। इस अभ्यर्थी को भी मेडिकल लगाने की सलाह दी गई थी और उसने मेडिकल लगा दिया था। इस बीच सीबीआई टीम आयोग पहुंच गई और भर्ती परीक्षाओं की जांच शुरू हो गई। जब अभ्यर्थी का चयन नहीं हुआ तो वह सीबीआई कैंप कार्यालय पहुंचा और उसने पूरे मामले का खुलासा किया। सूत्रों के मुताबिक शिकायत के आधार पर सीबीआई ने जांच की तो पाया कि आयोग में यह खेल कई वर्षों से चल रहा था। केवल लोअर ही नहीं, पीसीएस, आरओ/एआरओ जैसी परीक्षाओं में भी ऐसा ही हो रहा था।
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