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रैगिंग प्रकरण की लीपापोती में जुटा मेडिकल कॉलेज प्रशासन
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 01 Sep 2018 01:33 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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0 प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा ने लगाई फटकार, छात्रों से मिले एचओडी
अमर उजला ब्यूरो
इलाहाबाद। मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज प्रशासन रैगिंग के मामले में दोषियों को सजा देने के प्रति गंभीर नहीं है। शुक्रवार को भी कॉलेज की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों/डॉक्टरों ने छात्रों की काउंसलिंग के नाम पर पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डालने का प्रयास किया। रैगिंग पीड़ित एबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों से लिखवा लिया गया है कि ‘रैगिंग नहीं हुई’, यह सब हम बिना किसी दबाव के लिख रहे हैं।
अमर उजाला में रैगिंग प्रकरण में इंगित बिंदुओं को गंभीरता से लेते हुए प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ. रजनीश दुबे कार्यवाहक प्राचार्य को रैगिंग प्रकरण पर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने मां के निधन के कारण अवकाश पर चल रहे प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह को भी थोड़ी देर के लिए छात्रों के बीच जाने को कहा। थोड़ी ही देर में आवास से पहुंचे प्राचार्य ने सभी विभागाध्यक्षों, एंटी रैगिंग सेल, वार्डेन समेत प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े अन्य अफसरों को कार्यालय बुलाया। बैठक कर रैगिंग मामले पर विचार किया गया।
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बैठक के बाद प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह, कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. वत्सला मिश्रा समेत अन्य डॉक्टर, अफसर लेक्चर रूम गए। कक्षाओं में जूनियर छात्रों को भयमुक्त होकर रहने के साथ दिक्कत होने पर शिकायत करने को कहा गया। रैगिंग के बारे में जानकारी देकर संबंधित सेल के सदस्यों के मोबाइल नंबर और ईमेल नोट कराए गए। डॉक्टरों ने बताया कि रैगिंग के बारे में भी पूछा गया, लेकिन कोई कुछ नहीं बोला। वहीं सभी सीनियर छात्रों को भी कक्षाओं में बुलाकर रैगिंग के नियमों की जानकारी दी गई। चेतावनी देते हुए कहा गया कि कोई रैगिंग के आरोप में पकड़ा गया तो प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। तमाम कवायद के बाद भी कोई छात्र सोमवार को हुई घटना के बारे में बोलने सामने नहीं आया।
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इस खानापूरी के बाद शाम को नवप्रवेशी एमबीबीएस छात्र-छात्राओं से कॉलेज के अफसरों/डॉक्टरों ने कहा कि सभी रैगिंग के बारे में लिखकर दें। कागज मोड़ लें, सभी का नाम गुप्त रखा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक सभी छात्र-छात्राओं से लिखा लिया गया कि उनके साथ रैगिंग नहीं हुई है। वह यह सब बिना किसी दबाव में लिख रहे हैं। इन पत्रों को कॉलेज प्रशासन ने सुरक्षित रख लिया है। माना जा रहा है कि अभिभावकों की सक्रियता से हुई शिकायतों और शासन की सख्ती की काट करने में ये पत्र बड़ा काम करेंगे।
मेडिकल कॉलेज में रैगिंग प्रकरण के तूल पकड़ने के बाद आरोपियों की शिनाख्त के लिए सीनियर छात्रों की जूनियरों के सामने परेड भी कराई जाएगी। परिचय सभा के नाम पर प्रीतमदास प्रेक्षागृह में जूनियर और सीनियर जल्द आमने होंगे। इस मौके पर कालेज प्रशासन और एंटी रैगिंग सेल के सदस्य यह जानने की कोशिश करेंगे कि सीनियरों में किसे देखकर प्रथम वर्ष के छात्रों के चेहरे के भाव बदलते हैं।
बीते सोमवार को प्रस्तावित परिचय सभा प्राचार्य की मां के निधन पर हुए कंडोलेंस के कारण स्थगित कर दी गई थी। इसी दिन शाम सीनियरों ने जूनियरों पर ऐसा कहर ढाया, जिससे वे दहशत में हैं। रैगिंग पीड़ित छात्रों के अभिभावकों का कहना है कि बिना ड्रेस कोड सफेद कपड़े और काली टाई पहनने को मजबूर किया गया। बाल छोटे कराने के नाम पर मुंडन कराया, शर्ट में एक लाल बटन लगवा दी, सिर नीचे झुकाकर लाइन लगाकर चलने का दबाब बनाया गया। उत्पीड़न यहीं नहीं रुका, इसके बाद बच्चों को मेस के भीतर ले जाकर मुर्गा बनाना, कान छोड़ने पर मारना पीटना, गालियां दी गईं। कई बार धमकी दी जा चुकी है कि मुंह खोला तो कॅरियर चौपट समझो। ऐसे में वे और बच्चे क्या करें।
अब बदली परिस्थितियों में आरोपियों की शिनाख्त कराने के लिए परिचय सभा के नाम पर परेड कराई जाएगी। इसमें कुछ मिला तो ठीक नहीं तो जांच टीम अपने स्तर से आरोपियों को चिह्नित कर सकती है।
एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों के कुछ अभिभावकों को सीएम योगी आदित्यनाथ, चिकित्सा शिक्षा मंत्री, एमसीआई, प्राचार्य और डीएम इलाहाबाद आदि को भेजे गए शिकायती पत्र में बच्चों के साथ अश्लील हरकत करने का संगीन आरोप लगाया है। शनिवार को एक अभिभावक ने आगे आकर प्राचार्य के नाम से भेजे गए पत्र में लिखा है कि बच्चों को मुर्गा बनाने, पीटने के साथ उनकी पैंट फाड़ दी गई। अश्लील हरकतें भी की गईं, कृत्य ऐसा कि बच्चे न तो पिता को खुलकर बता पा रहे हैं, न मां को। ऐसे में कॉलेज प्रशासन अपेक्षा कर रहा है कि शिकायत करने वाला सामने आए। अभिभावकों ने संदेह जताया है कि इसकी क्या गारंटी है कि शिकायत करने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा।
रैगिंग के पीड़ित कुछ बच्चों के अभिभावकों का कहना है कि प्रकरण को दबाने के लिए कॉलेज प्रशासन ने सभी बच्चों से रैगिंग नहीं हुई का अनापत्ति प्रमाण पत्र ले लिया है। अभिभावकों का कहना है कि बंद कमरे में प्रशासनिक अधिकारी बच्चों से अलग-अलग बात करें तो मामला खुल जाएगा। आरोपियों के चेहरे भी बेनकाब होंगे। लोगों ने जिलाधिकारी सुहास एलवाई के उस कदम की सराहना की है, जिसमें उन्होंने मौके पर उसी दिन मजिस्ट्रेट और पुलिस को भेजकर जांच के निर्देश दिए। बृहस्पतिवार को भी कॉलेज और हॉस्टल में एसीएम विनय सिंह के पहुंचने से छात्रों का मनोबल बढ़ा। यह बात और है कि वे वार्डेन की मौजूदगी में कुछ बोल नहीं पाए लेकिन इसका असर रहा कि आरोपी फिर घटना को दोहरा नहीं सके।
छात्रों से रैगिंग मामले में एस्कॉर्ट करने वाले रेजीडेंट डॉक्टर भी जांच के घेरे में हैं। जानकारी के मुताबिक सोमवार की शाम रैगिंग के आरोपी छात्रों को लेक्चर रूम से कवर कर यही मेस तक ले गए। रैगिंग की घटना इसी दौरान हुई। सवाल उठ रहा है कि एस्कोर्ट करने वालों ने छात्रों को धमकी देकर ले जाने वालों को क्यों नहीं रोका। आरोपियों की पहचान रेजीडेंट डॉक्टर कर सकते हैं लेकिन, वे भी मुंह खोलने के लिए तैयार नहीं।
ये भी हैं सवाल-
0 बुधवार को जूनियरों को ‘जो हुआ भूल जाओ’ मुंह नहीं खोलना, अब नहीं होगा जैसी नसीहत देने वाले कौन थे।
0 बृहस्पतिवार को मामले ने तूल पकड़ा तो एस्कोर्ट करने वाले रेजीडेंट कैसे गुम हो गए। शुक्रवार को भी कोई नजर नहीं आया।
एबीबीएस प्रथम वर्ष के सभी छात्रों शिकायत लिखकर मांगी गई थी। छात्र-छात्राओं ने रैगिंग के बारे में कुछ नहीं लिखा है। पत्रों को फाइल में लगा दिया गया है। फेकेल्टी मेंबर, एंटी रैगिंग सेल, वार्डेन आदि लेक्चर रूम, हॉस्टल का कई बार दौरा कर छात्रों से मुलाकात कर रहे हैं। किसी ने शिकायत नहीं की है।
डॉ. वत्सला मिश्रा, कार्यवाहक प्राचार्य