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गार्ड हत्याकांड में दरोगा शत्रुघ्न सिंह को उम्रकैद

Sat, 17 Feb 2018 01:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sat, 17 Feb 2018 01:19 AM IST
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Life imprisonment for Durga Shatrughan Singh in guards murder
चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय - फोटो : file photo
सिविल लाइंस कानपुर रोड स्थित बंगला नंबर-11 में 11 साल पहले हुए गार्ड हत्याकांड में अदालत ने फैसला सुना दिया है। गार्ड को दिनदहाड़े गोली मारने वाले सबइंस्पेक्टर शत्रुघ्न सिंह को अदालत ने उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने शत्रुघ्न सिंह को गार्ड रामऔतार शुक्ला की हत्या करने का दोषी पाया है। उसकी पत्नी प्रमोदनी को भी कोर्ट ने तीन माह के कारावास की सजा दी है। सजा का आदेश अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुदीप कुमार जायसवाल ने सुनाया।
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एडीजीसी गुलाब चंद्र अग्रहरि और वादी के अधिवक्ता रवि प्रकाश मिश्र ने अभियुक्तों के खिलाफ साक्ष्य प्रस्तुत किए। कोर्ट ने शत्रुघ्न सिंह पर 30 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है, जबकि उसकी पत्नी प्रमोदिनी सिंह को मारपीट करने के लिए तीन माह की कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इसी मामले में आरोपी व्यापारी इम्तियाज और उसके बेटे तारिक को दोषमुक्त कर दिया है। 14 मई 2006 को सुबह साढ़े आठ बजे सिविल लाइंस में कानपुर रोड स्थित बंगला नंबर-11 की मालकिन रविबाला गर्ग ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसका करेली निवासी इम्तियाज से प्रापर्टी का विवाद चल रहा है।
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इम्तियाज ने बंगले में दरोगा शत्रुघ्न सिंह को टिका दिया था। साथ में उसकी पत्नी और बेटा रहते थे। घटना वाले दिन सुबह तार लगाने को लेकर दरोगा से वादिनी का विवाद हुआ। शत्रुघ्न सिंह उसे मारने को चढ़ आए तो गार्ड रामऔतार ने उसे रोकने की कोशिश की थी। तब शत्रुघ्न ने उसे अपनी राइफल से गोली मार दी। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद शत्रुघ्न सिंह अपनी राइफल मौके पर छोड़कर भागा। उस समय बाहर गाड़ी मेें इम्तियाज और उसका बेटा भी मौजूद थे। इम्तियाज शत्रुघ्न सिंह को लेकर भाग गया। अभियोजन के अनुसार इम्तियाज और उसके लड़के तारिक पर ललकारने और प्रमोदिनी सिंह पर मारपीट में सहयोग का आरोप है।
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अभियोजन की ओर से वादिनी रविबाला गर्ग, उनकी पुत्री राधिका गर्ग,  प्रथम विवेचक एसएसआई बृजमनी, विवेचक सीओ अनिल राय, चिक लेखक अरविंद मिश्रा, एसएचओ बीबी सिंह, एसआई एके दुबे, डॉ. विक्रम आनंद सहित 15 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। इसमें रविबाला और राधिका चश्मदीद गवाह थे, जिनके बयान निर्णायक साबित हुए।

इस मामले में लंबी चली कानूनी लड़ाई में पक्षकार सुप्रीमकोर्ट तक गए। हालांकि, सुप्रीमकोर्ट ने किसी को राहत नहीं दी अपितु अधीनस्थ न्यायालय को मुकदमे की सुनवाई शीघ्र पूरी करने का निर्देश दिया था।

गार्ड की हत्या के बाद दरोगा शत्रुघ्न सिंह लगभग एक साल तक फरार रहा। एक साल बाद पर वह गिरफ्तार किया गया, तब से लगातार वह जेल में ही बंद है। उसकी जमानत अर्जी अदालतों में खारिज हो गई।


सिविल लाइंस के बंगला नंबर-11 में हुई गार्ड की हत्या के पीछे असल वजह प्रापर्टी का विवाद था। कई एकड़ के इस बंगले की कीमत करोड़ों रुपये में है। इसके स्वामित्व को लेकर ही रविबाला गर्ग और इम्तियाज के बीच विवाद चल रहा था। बंगले पर इसके अलावा भी कई भूमाफिया की नजर थी। चर्चा है कि इसी बंगले के लिए अंडरवर्ल्ड डॉन बबलू श्रीवास्तव ने भी एक पुलिस अधिकारी को फोन कर बंगले पर अपना दावा जताया था। इस बात को लेकर उस वक्त काफी हंगामा मचा था। एसओजी ने प्रकरण की जांच भी की थी। हालांकि, बाद में कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।
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