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रास्ते का हर कदम दहशत से भरा

Sat, 04 Jun 2016 01:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sat, 04 Jun 2016 01:46 AM IST
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Filled with dread every step of the way
पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है जबकि दो अन्य अभी तक फरार हैं।
इलाहाबाद। छेड़खानी के ये दो उदाहरण सिर्फ इसलिए सामने आ गए, क्योंकि इन मामलों में केस दर्ज हो गया। शहर में आए दिन ऐसी घटनाएं होती हैं। कभी बदनामी के डर से तो कभी धमकी मिलने या परिवार का साथ न मिलने के कारण पीड़ित लड़कियों को खून का घूट पीना पड़ता है। मनचलों की मनमानी भी इस कदर बढ़ गई है कि दिनदहाड़े और बीच बाजार भी अपनी करतूत को अंजाम देने में नहीं हिचकते। ऐसे में घर से निकलने वाली लड़कियों को रास्ते का हर कदम दहशत भरा लगने लगा है।
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आलम यह है कि देर रात घर से अकेले बाहर निकलने के बारे में सोचना भी छोड़ दिया है। हालांकि ऐसे मनचलों की संख्या सीमित है लेकिन उनकी कुत्सित मानसिकता लोगों के दिलों में डर पैदा कर रही है। रास्ते चलते लड़कियों पर छींटाकशी करना, उनका हाथ पकड़ा, धक्का देकर आगे निकल जाना, पीछे से आकर प्रेशर हार्न हार्न बजाने जैसे कोई मौका नहीं छोड़ते हैं। अक्सर इनकी वजह से या इनसे बचने में लड़कियां एक्सिडेंट का शिकार हो जाती हैं। 
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लूकरगंज की विभा कहती हैं कि वह एक दो बार छेड़खानी का शिकार हो चुकी हैं। अब जब भी घर से बाहर निकलती हैं तो उनके मन में डर बना रहता है कि कहीं कोई पीछे से आकर धक्का न मार दे या कमेंट न करें कटरा की कविता बताती हैं कि रात में जब स्कूटी से निकलती हैं तो अपने आसपास से गुजरने वाले हर शख्स पर उन्हें निगाह रखनी पड़ती हैं। छेड़खानी से बचने के लिए हमेशा लड़कियों को ही सीखे दी जाती है जबकि उनका कोई दोष नहीं होता। 
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मनोवैज्ञानिक मालविका राव का कहना है कि छेड़खानी करने वाले लड़के मानसिक विकृति का शिकार होते हैं। लड़कियों को परेशान करके वह अपने मेल ईगो को संतुष्ट करना चाहते हैं। इस बात को प्रदर्शित करना चाहते हैं कि वो लड़कियों से ज्यादा ताकतवर हैं और कुछ भी कर सकते हैं। इसके पीछे का कारण नेगेटिव लर्निंग हैं। जो उन्होंने अपने परिवार और समाज को देखकर सीखा है। घर-परिवार और समाज अगर उन्हें सही संस्कार और परवरिश दे तो काफी हद तक स्थिति को बेहतर किया जा सकता है। अभिभाव अपने लड़के को लड़कियों का सम्मान करने का संस्कार सिखाएं और अलग से उनकी काउंसिलिंग करें तो बात बन सकती है। 


घर में बहन या फिर मां लड़के से अपने छेड़खानी के अनुभवों को शेयर करें। जिससे लड़कों को इस बात का अहसास हो कि छेड़खानी का शिकार होने पर उनकी मां या बहन को कितना खराब लगता था और वो रास्ते चलते किसी लड़की के साथ ऐसी हरकत करने से पहले हजार बार सोचे।

अभिभावक अपने लड़कों की संगत पर ध्यान दें। अगर दोस्त ठीक नहीं लगते हैं तो उसने दूर रहने के लिए कहें।
अभिभावक बेटे को इस का अहसास कराए कि लड़कियों पर कमेंट करना या उन्हें छेड़ना स्मार्टनेस, मर्दानगी की निशानी नहीं है। 
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