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बैंक से पैसे नहीं मिले तो आग लगाकर दी जान
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 18 Dec 2016 02:12 AM IST
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झूठी शान में हत्या
- फोटो : demo pic
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नोटबंदी के चलते परेशान और हताश होकर आम लोग मौत गले लगा रहे हैं। शनिवार को यमुनापार इलाके के कौंधियारा में स्टेट बैंक में कई घंटे तक लाइन में लगे रहने के बावजूद पैसे नहीं मिलने से निराश मजदूर ने घर में पत्नी से कहासुनी के बाद मिट्टी का तेल डालकर आग लगा ली। पति-पत्नी के बीच बच्चों का पेट भरने के लिए पैसे नहीं होने से झड़प हो गई थी। अस्पताल में युवक की मौत के बाद पुलिस ने शव सील किया।
35 वर्षीय महेंद्र कौंधियारा में भनौरी गांव का रहने वाला था। वह मजदूरी कर पत्नी सुषमा और दो बच्चों के साथ गुजारा करता था। पत्नी भी उसके साथ मजदूरी करने जाती रही है। पिछले दिनों उन दोनों ने मनरेगा के तहत मजदूरी की थी। उसके पैसे सुषमा के बैंक खाते में आए थे। शनिवार दोपहर करीब बारह बजे महेंद्र पत्नी सुषमा को लेकर भारतीय स्टेट बैंक की करमा शाखा से पैसे लेने गया। वह शाम तक सुषमा की जगह लाइन में लगा रहा लेकिन पैसे नहीं मिले। निराश होकर दोनों घर लौट गए। ग्राम प्रधान जगदंबा पटेल के मुताबिक, घर आने पर महेंद्र और सुषमा के बीच झगड़ा हो गया। सुषमा ने कहा कि पैसे नहीं हैं तो दोनों बच्चों को खिलाने के लिए राशन कहां से आएगा।
पहले ही उधारी होने के चलते दुकानदार ने बिना पैसे मिले सामान देने से मना कर दिया था। झड़प के दौरान ही तैश में आकर महेंद्र ने शरीर पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा ली। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग जुटे और किसी तरह आग बुझाकर महेंद्र को एंबुलेंस में शहर में एसआरएन अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई। यह गरीब परिवार नोटबंदी की मुसीबत का शिकार हो गया। अब सुषमा के सामने दो मासूम बच्चों और अपना जीवनयापन करने की चुनौती है।
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35 वर्षीय महेंद्र कौंधियारा में भनौरी गांव का रहने वाला था। वह मजदूरी कर पत्नी सुषमा और दो बच्चों के साथ गुजारा करता था। पत्नी भी उसके साथ मजदूरी करने जाती रही है। पिछले दिनों उन दोनों ने मनरेगा के तहत मजदूरी की थी। उसके पैसे सुषमा के बैंक खाते में आए थे। शनिवार दोपहर करीब बारह बजे महेंद्र पत्नी सुषमा को लेकर भारतीय स्टेट बैंक की करमा शाखा से पैसे लेने गया। वह शाम तक सुषमा की जगह लाइन में लगा रहा लेकिन पैसे नहीं मिले। निराश होकर दोनों घर लौट गए। ग्राम प्रधान जगदंबा पटेल के मुताबिक, घर आने पर महेंद्र और सुषमा के बीच झगड़ा हो गया। सुषमा ने कहा कि पैसे नहीं हैं तो दोनों बच्चों को खिलाने के लिए राशन कहां से आएगा।
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पहले ही उधारी होने के चलते दुकानदार ने बिना पैसे मिले सामान देने से मना कर दिया था। झड़प के दौरान ही तैश में आकर महेंद्र ने शरीर पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा ली। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग जुटे और किसी तरह आग बुझाकर महेंद्र को एंबुलेंस में शहर में एसआरएन अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई। यह गरीब परिवार नोटबंदी की मुसीबत का शिकार हो गया। अब सुषमा के सामने दो मासूम बच्चों और अपना जीवनयापन करने की चुनौती है।
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