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जर्जर मकान की दीवार ढही, बच्ची की मौत

Sat, 20 Aug 2016 01:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sat, 20 Aug 2016 01:50 AM IST
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Dilapidated house wall collapsed , killing child
allahabad
इलाहाबाद। मुट्ठीगंज के मुंशीराम की बगिया इलाके में शुक्रवार तड़के दो मंजिला मकान की दीवार टीन शेड पर गिर गई। इससे शेड के नीचे सो रहे लोग मलबे में दब गए। चीख-पुकार सुनकर पहुंचे आसपास के लोग बचाव में जुट गए। एक-एक कर मलबे में दबे लोगों बाहर निकाला गया। हादसे में नौ वर्षीय बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई जबकि चार लोग गंभीर रूप से घायल हैं। सभी को एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां उनकी हालत नाजुक बनी है। प्रशासन ने पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद का भरोसा दिया है।
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मुंशीराम की बगिया में एक कई साल पुराना एक मकान है। इसके मालिकाना हक को लेकर मुकदमा चल रहा है।

मकान के दीवार से लगकर बने टीन शेड में विमला देवी (55) स्व.श्याम बाबू कुशवाहा किराएदार हैं। उनकी दो बेटियों संध्या (25), सुमन (20), एक बेटा राजेंद्र और पोती राधिका (9) साथ ही रहते हैं। बाकी दो बेटों में बड़ा बेटा सुनील कुशवाहा बलुआघाट में, जबकि अनिल शहर में ही अलग रहता है। राधिका सुनील की बेटी है। रक्षाबंधन पर सुनील भी पत्नी यशोदा के साथ मां के पास आया था। भोर में करीब चार बजे पिछले कई दिनों से हो रही बारिश के कारण पहले से जर्जर दो मंजिला मकान की दीवार अचानक ढह गई। आवाज सुनकर आसपास के लोग पहुंचे तो देखा कि मलबे में परिवार के लोग दबे पड़े हैं। तुरंत दबे लेागों को बाहर निकालने का काम शुरू हुआ। खबर पाकर मुट्ठीगंज पुलिस भी पहुंच गई। सुमन, संध्या, विमला को गंभीर चोटें आई थीं। राधिका की मौत हो चुकी थी। सुनील इस हादसे में बाल-बाल बच गया। घायलों को एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया गया। पाकर प्रशासन के अफसर मौके पर पहुंचे। स्थानीय विधायक परवेज अहमद टंकी ने भी एसआरएन अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल-चाल जाना। 
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बारिश में पेड़ की डाल टूटकर गिरी जर्जर दीवार पर
बृहस्पतिवार रात भर रुक-रुक कर बारिश और तेज हवाएं चलती रहीं। इसी दौरान पाकड़ के पेड़ की एक बड़ी डाल जर्जर दीवार पर गिर गई। माना जाता है कि इसी के चलते दीवार ढह गई। 
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घायलों का निजी अस्पताल में हो इलाज 
पार्षद सतीश केशरवानी ने प्रशासन के अफसरों से मांग की है कि घायलों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। वे मेहनत-मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। घायलों का प्रशासन निजी अस्पताल में इलाज कराए और उन्हें इलाज के लिए आर्थिक मदद दी जाए। 


बच्ची की मौत से घर में मातम
राधिका तीन बहनों में बड़ी थी। जिसके चलते वह सभी की दुलारी थी। उसकी मौत की बात घरवालों ने अस्पताल में भर्ती दादी और बुआ को नहीं दी। बड़ी की बेटी की मौत से सुनील और उनकी पत्नी यशोदा का रोकर बुरा हाल है। 
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