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एके 47 का इस्तेमाल करता था डकैत महेंद्र

Fri, 06 Jul 2018 12:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Fri, 06 Jul 2018 12:56 AM IST
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Dakat Mahendra used AK 47
इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
यूपी के साथ ही मध्य प्रदेश में आतंक का पर्याय बन चुका डकैत महेंद्र पासी कितना कुख्यात था, इसका अंदाजा इसी से लग जाता है कि वह आपराधिक घटनाओं में एके 47 का इस्तेमाल करता था। इसका खुलासा तब हुआ था जब इसी साल मार्च में पुलिस ने मऊ जिले में हुई मुठभेड़ के दौरान यह अत्याधुनिक  हथियार बरामद किया था। तब अंधाधुंध गोलियां बरसाता हुआ महेंद्र मौके से भाग निकलने में कामयाब हो गया था। मूल रूप से चित्रकूट के रैपूरा थाना क्षेत्र का रहने वाला महेंद्र पासी पुत्र लखपत पासी तीन भाइयों में छोटा था। उसके दो भाई भी इस वक्त जेल में हैं। इसी साल मार्च में पुलिस को पता चला कि महेंद्र के पास अत्याधुनिक एके 47 राइफल भी है। इसका खुलासा तब हुआ जब चित्रकूट जिले के मऊ थाना क्षेत्र के दशरथघाटी जंगल में पुलिस और महेंद्र के गोप्पा गैंग के बीच मुठभेड़ हुई। इस दौरान अंधाधुंध फायरिंग करता हुआ महेंद्र अपने गिरोह के सदस्यों संग भाग निकला था लेकिन, हड़बड़ी में उसकी एके 47 वहीं छूट गई थी। तलाशी के दौरान पुलिस को यह मिली तो उसके कान खड़े हो गए। इस दौरान भारी मात्रा में कारतूस भी बरामद हुए थे।
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32 साल के इनामी महेंद्र पर यूपी के साथ ही मध्य प्रदेश सरकार ने भी 50-50 हजार का इनाम घोषित किया था। उस पर दर्ज मुकदमों की कुल संख्या फिलहाल पता नहीं चल सकी है। हालांकि सिर्फ यूपी के चित्रकूट में ही इस पर 21 मुकदमे दर्ज थे। रैपूरा थाने में 145 ए उसकी हिस्ट्रीशीट संख्या है। 21 में से 13 मुकदमे रैपूरा, पांच मुकदमे मानिकपुर और तीन मुकदमे मऊ थाने में दर्ज हैं। इनमें से दो मुकदमे हत्या और बाकी हत्या का प्रयास, आर्म्स एक्ट, अपहरण समेत अन्य धाराओं से संबंधित हैं।
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महेंद्र पर रैपूरा के साथ ही मानिकपुर, मऊ में भी मुकदमे दर्ज है लेकिन, उसका ज्यादातर समय यूपी एमपी से सटे रीवा के जंगलों में बीतता था। कई बार मुठभेड़ के दौरान वह एक राज्य से दूसरे राज्य की सीमा में प्रवेश कर खुद को बचाता था। पुलिस अफसरों का कहना है कि उस पर हत्या, हत्या के प्रयास समेत अन्य आरोपों में मुकदमे दर्ज थे। हालांकि उसका मुख्य काम फिरौती के लिए अपहरण का था। दिसंबर 2017 में उसने रीवा के हरदोनी गांव में रहने वाले दो किसान सगे भाइयों को अपहरण कर पांच लाख की फिरौती मांगी थी। दोनों को महेंद्र व उसके साथियों ने रीवा के ही एक जंगल 10 दिनों तक बंधक बनाकर रखा था। बाद में फिरौती मिलने पर दोनों को छोड़ दिया था।
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