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मालखाने से 25 लाख रुपये उड़ाने वाला मुंशी गया जेल
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Sat, 16 Jan 2016 12:58 AM IST
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नैनी कोतवाली के मालखाने में जमा 1 करोड़ 62 लाख रुपये में से 25 लाख रुपये उड़ाने वाले मुंशी राजेंद्र कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इंस्पेक्टर कोतवाली की तहरीर पर मालखाना इंचार्ज रहे राजेंद्र कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। एसपी यमुनापार ने बताया कि मामले की जांच घूरपुर थाना प्रभारी को सौंपी गई है। पूछताछ में आरोपी मुंशी ने बताया कि वह जब जरूरत पड़ती थी, मालखाने से रकम निकाल कर ले जाता था।
करीब डेढ़ साल पूर्व पुलिस ने यूनिवर्सल मल्टी क्रेडिट कंपनी के कर्मचारियों को गिरफ्तार कर 1 करोड 86 लाख रुपये बरामद किए गए थे।
इसमें एक करोड़ 62 लाख रुपये नैनी थाने के मालखाने में सील कर जमा कराए गए थे। पिछले साल सितंबर में कंपनी के चेयरमैन की अर्जी पर अदालत ने नैनी थाना प्रभारी को मालखाना में जमा रकम रिलीज करने का आदेश जारी किया मगर कई बार थाने जाने पर भी रकम अवमुक्त नहीं की गई। थाने से बताया कि तत्कालीन मालखाना प्रभारी राजेंद्र कुमार का छह महीने पहले भदोही तबादला हो गया। इसके बाद से वह लापता हो गया। ऐसे में कोर्ट ने डीएम और एसएसपी को एक टीम गठित कर रकम की गिनती करने का आदेश दिया। तब बृहस्पतिवार सुबह कौशांबी के पश्चिम शरीरा का रहने वाला मुंशी नैनी थाने पहुंचा।
उसने बताया कि बीमारी के चलते वह ड्यूटी पर नहीं आ रहा था। उसके आने के बाद गठित टीम के सामने वीडियोग्राफी के बीच जिस बक्शे में रकम रखी गई थी, उसे खोला गया। बताया जाता है कि रकम को कपड़े में लपेटकर सील किया गया था लेकिन वह फटा हुआ था। बक्शे में दो ताले लगाकर सील किया गया था। उसकी सील भी टूटी थी। देर रात तक नोटों की गिनती हुई। गिनती पूरी होने के बाद पता चला कि 24 लाख 49 हजार रुपये गायब हैं। 1 करोड़ 62 लाख रुपये में 1 करोड़ 38 लाख 4 हजार दस रुपये ही मिले। इसके बाद थाने में खलबली मच गई। मालखाना इंचार्ज राजेंद्र कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया।
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उसके खिलाफ नैनी इंस्पेक्टर रमेश पांडेय की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया। शुक्रवार सुबह मेडिकल के बाद राजेंद्र कुमार को जेल भेज दिया गया। वहीं थाने के मालखाने से रकम गायब होने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। लोगों में चर्चा है कि इस मामले में मालखाना प्रभारी के अलावा भी कुछ लोगों का हाथ है। एसपी यमुनापार आशुतोष मिश्र ने बताया कि आरोपी मुंशी के खिलाफ मुकदमा लिखकर जेल भेज दिया गया। मामले की जांच एसओ घूरपुर को सौंपी गई है।
थाने के मालखाने में जमा रकम उड़ाकर मालखाना प्रभारी राजेंद्र कुमार ने बेटे को प्रधानी का चुनाव लड़वाया था। कौशांबी के पश्चिम शरीरा के रहने वाले राजेंद्र कुमार ने बेटे के चुनाव में काफी रकम खर्च की थी। गांव में लोग परेशान थे कि सिपाही की नौकरी करने वाले राजेंद्र कुमार के पास बेटे के पास चुनाव में खर्च करने के लिए इतनी रकम कहां से आई। हालांकि राजेंद्र कुमार का बेटा चुनाव हार गया था।
रकम कम मिलने के बाद पहले तो वह पुलिस अफसरों को गुमराह करता लेकिन बाद में टूट गया है। वह रोने लगा और अपनी गलती पर पछतावा करने लगा। पुलिस अफसरों को पूछताछ में बताया कि जब जरूरत पड़ती मालखाने से रकम निकाल ले जाता। थाने के पीछे ही आवास में रहता था। ऐसे में जब उसे मौका मिलता वह आता और कुछ रकम निकालकर ले जाता और कमरे में रखे बक्शे में रख लेता था। उसने बताया कि उसने काफी रकम अपनी बीमारी में खर्च कर दी। सिपाहियों ने जब उसे गिरफ्तार कर लिया तो उसकी आंखों से आंसू निकल आए।
बरामद हुए करोड़ों रुपए की नकदी ट्रेजरी कार्यालय में जमा न करा कर मालखाने में रखने के पीछे को पूर्व में रहे नैनी कोतवाल की क्या मंशा थी। आखिर उन्होंने उसे कोषागार में न जमा कराकर थाने के मालखाने में क्यों रखवाया। बता दें कि पूर्व कोतवाल ने नैनी कोतवाली में तीन बार तैनाती ली। इस दौरान तीन कोतवालों का तबादला हुआ। हालांकि इसे गंभीर विभागीय चूक कहें या जानबूझकर की गई लापरवाही। पुलिस सूत्रों के मुताबिक चौबीस घंटे में नकदी को कोषागार में जमा कराकर उसकी रसीद ले ली जाती है। मजे की बात है कि नकदी को जिस मालखाने में रखा गया था, उसे गिनती के दौरान दूसरी जगह पाया गया।
गिनती के वक्त जब टीम ने मुंशी के साथ मालखाने को खंगाला तो रुपए से भरा बक्सा वहां से गायब था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बाक्स पर लगी सील व ताले भी टूटे हुए थे। सूत्रों के मुताबिक गायब हुए रुपयों में केवल मुंशी राजेन्द्र का हाथ है फिर किसी अन्य सिपाहियों का भी। गौर करने की बात तो यह है थाने में कुछ ऐसे भी लोग थे जिन्हें हर किसी मामले में पूरी छूट थी। वह पूरे कोतवाली में कहीं भी किसी वक्त बेरोकटोक आते जाते थे। इस मामले में उन सिपाहियों पर भी शक की सुई घूम रही है।
एसपी यमुनापार आशुतोष मिश्रा के अनुसार विवेचना घूरपुर थाना प्रभारी को दी गई है। जिसमें हर बिन्दु पर जांच की जाएगी। मुंशी राजेन्द्र के खाते में कितने पैसे हैं या नहीं है, इसकी भी जांच करायी जा रही है। जिससे जानकारी हो सके कि पैसे गए कहां। इतने सारे पैसों का क्या किया गया।
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करीब डेढ़ साल पूर्व पुलिस ने यूनिवर्सल मल्टी क्रेडिट कंपनी के कर्मचारियों को गिरफ्तार कर 1 करोड 86 लाख रुपये बरामद किए गए थे।
इसमें एक करोड़ 62 लाख रुपये नैनी थाने के मालखाने में सील कर जमा कराए गए थे। पिछले साल सितंबर में कंपनी के चेयरमैन की अर्जी पर अदालत ने नैनी थाना प्रभारी को मालखाना में जमा रकम रिलीज करने का आदेश जारी किया मगर कई बार थाने जाने पर भी रकम अवमुक्त नहीं की गई। थाने से बताया कि तत्कालीन मालखाना प्रभारी राजेंद्र कुमार का छह महीने पहले भदोही तबादला हो गया। इसके बाद से वह लापता हो गया। ऐसे में कोर्ट ने डीएम और एसएसपी को एक टीम गठित कर रकम की गिनती करने का आदेश दिया। तब बृहस्पतिवार सुबह कौशांबी के पश्चिम शरीरा का रहने वाला मुंशी नैनी थाने पहुंचा।
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उसने बताया कि बीमारी के चलते वह ड्यूटी पर नहीं आ रहा था। उसके आने के बाद गठित टीम के सामने वीडियोग्राफी के बीच जिस बक्शे में रकम रखी गई थी, उसे खोला गया। बताया जाता है कि रकम को कपड़े में लपेटकर सील किया गया था लेकिन वह फटा हुआ था। बक्शे में दो ताले लगाकर सील किया गया था। उसकी सील भी टूटी थी। देर रात तक नोटों की गिनती हुई। गिनती पूरी होने के बाद पता चला कि 24 लाख 49 हजार रुपये गायब हैं। 1 करोड़ 62 लाख रुपये में 1 करोड़ 38 लाख 4 हजार दस रुपये ही मिले। इसके बाद थाने में खलबली मच गई। मालखाना इंचार्ज राजेंद्र कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया।
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उसके खिलाफ नैनी इंस्पेक्टर रमेश पांडेय की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया। शुक्रवार सुबह मेडिकल के बाद राजेंद्र कुमार को जेल भेज दिया गया। वहीं थाने के मालखाने से रकम गायब होने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। लोगों में चर्चा है कि इस मामले में मालखाना प्रभारी के अलावा भी कुछ लोगों का हाथ है। एसपी यमुनापार आशुतोष मिश्र ने बताया कि आरोपी मुंशी के खिलाफ मुकदमा लिखकर जेल भेज दिया गया। मामले की जांच एसओ घूरपुर को सौंपी गई है।
थाने के मालखाने में जमा रकम उड़ाकर मालखाना प्रभारी राजेंद्र कुमार ने बेटे को प्रधानी का चुनाव लड़वाया था। कौशांबी के पश्चिम शरीरा के रहने वाले राजेंद्र कुमार ने बेटे के चुनाव में काफी रकम खर्च की थी। गांव में लोग परेशान थे कि सिपाही की नौकरी करने वाले राजेंद्र कुमार के पास बेटे के पास चुनाव में खर्च करने के लिए इतनी रकम कहां से आई। हालांकि राजेंद्र कुमार का बेटा चुनाव हार गया था।
रकम कम मिलने के बाद पहले तो वह पुलिस अफसरों को गुमराह करता लेकिन बाद में टूट गया है। वह रोने लगा और अपनी गलती पर पछतावा करने लगा। पुलिस अफसरों को पूछताछ में बताया कि जब जरूरत पड़ती मालखाने से रकम निकाल ले जाता। थाने के पीछे ही आवास में रहता था। ऐसे में जब उसे मौका मिलता वह आता और कुछ रकम निकालकर ले जाता और कमरे में रखे बक्शे में रख लेता था। उसने बताया कि उसने काफी रकम अपनी बीमारी में खर्च कर दी। सिपाहियों ने जब उसे गिरफ्तार कर लिया तो उसकी आंखों से आंसू निकल आए।
बरामद हुए करोड़ों रुपए की नकदी ट्रेजरी कार्यालय में जमा न करा कर मालखाने में रखने के पीछे को पूर्व में रहे नैनी कोतवाल की क्या मंशा थी। आखिर उन्होंने उसे कोषागार में न जमा कराकर थाने के मालखाने में क्यों रखवाया। बता दें कि पूर्व कोतवाल ने नैनी कोतवाली में तीन बार तैनाती ली। इस दौरान तीन कोतवालों का तबादला हुआ। हालांकि इसे गंभीर विभागीय चूक कहें या जानबूझकर की गई लापरवाही। पुलिस सूत्रों के मुताबिक चौबीस घंटे में नकदी को कोषागार में जमा कराकर उसकी रसीद ले ली जाती है। मजे की बात है कि नकदी को जिस मालखाने में रखा गया था, उसे गिनती के दौरान दूसरी जगह पाया गया।
गिनती के वक्त जब टीम ने मुंशी के साथ मालखाने को खंगाला तो रुपए से भरा बक्सा वहां से गायब था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बाक्स पर लगी सील व ताले भी टूटे हुए थे। सूत्रों के मुताबिक गायब हुए रुपयों में केवल मुंशी राजेन्द्र का हाथ है फिर किसी अन्य सिपाहियों का भी। गौर करने की बात तो यह है थाने में कुछ ऐसे भी लोग थे जिन्हें हर किसी मामले में पूरी छूट थी। वह पूरे कोतवाली में कहीं भी किसी वक्त बेरोकटोक आते जाते थे। इस मामले में उन सिपाहियों पर भी शक की सुई घूम रही है।
एसपी यमुनापार आशुतोष मिश्रा के अनुसार विवेचना घूरपुर थाना प्रभारी को दी गई है। जिसमें हर बिन्दु पर जांच की जाएगी। मुंशी राजेन्द्र के खाते में कितने पैसे हैं या नहीं है, इसकी भी जांच करायी जा रही है। जिससे जानकारी हो सके कि पैसे गए कहां। इतने सारे पैसों का क्या किया गया।