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नोटों की गिनती में खेल, लाखों लगा दिए ठिकाने
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 23 Jul 2018 12:57 AM IST
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कैंट स्थित आबकारी कॉलोनी में नोटों से भरा कुकर मिलने के मामले में रविवार को चौंकाने वाली बातें सामने आईं। पता चला है कि पुलिस के पहुंचने से पहले ही नोटों की गिनती आबकारी विभाग के एक सिपाही ने की थी। उधर जिस अधिकारी के क्वार्टर के पीछे स्थित गैरेज में कुकर मिला, उन्होंने भी कुकर में 25-30 लाख रुपये होने की बात पुलिस को बताई है। अब बड़ा सवाल यह है कि पुलिस को केवल 7.93 लाख रुपये मिले तो बाकी के रुपये कहां गए?
आबकारी विभाग में सहायक एल्कोहल टेक्नालॉजिस्ट के पद पर तैनात इंजीनियर दीपक रस्तोगी के सरकारी क्वार्टर के पीछे स्थित गैरेज में शनिवार को नोटों से भरा कुकर मिला था। मौके पर पहुंची पुलिस ने गिनती कराई तो कुकर में 7.93 रुपये बरामद हुए थे। हालांकि इन रुपयों का कोई दावेदार सामने नहीं आया था। पुलिस नोटों को कब्जे में लेकर थाने लाई थी। उधर एसएसपी ने मामले की जांच सीओ व एसीएम से कराने का निर्णय लिया था। रविवार को इस मामले में कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। पता चला है कि टेकभनोलॉजिस्ट ने सबसे पहले अपने विभागीय अफसरों को नोटों से भरा कुकर मिलने की सूचना दी थी। इस दौरान पड़ोस में ही रहने वाले एक अफसर के घर पर कुछ काम से पहुंचा सिपाही भी आ गया था। यही नहीं पुलिस के पहुंचने से पहले उसने नोटों की गिनती भी की थी। उधर सूत्रों का कहना है कि दीपक ने भी पुलिस को कुकर में अनुमानत: 25-30 लाख रुपये होने की बात बताई थी। पुलिस का कहना है कि उस सिपाही का पता लगाया जा रहा है जिसने नोटों की गिनती की थी। जल्द ही उससे भी पूछताछ की जाएगी। आशंका है कि नोटों की गिनती के दौरान लाखों रुपए ठिकाने लगा दिए गए।
रविवार को सीओ सिविल लाइंस श्रीश्चंद्र ने आबकारी कॉलोनी पहुंचकर टेकभनोलॉजिस्ट दीपक का बयान दर्ज किया। इस दौरान उन्होंने उनसे पूछताछ की। साथ ही आबकारी विभाग के उन अफसरों की भी जानकारी ली, जो पुलिस के पहुंचने से पहले ही मौके पर पहुंच गए थे। सीओ सिविल लाइंस ने बताया कि मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया गया। साथी ही संबंधित अफसर से पूछताछ की गई। जांच की जा रही है।
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दीपक ने बताया कि जिस गैरेज में नोटों से भरा कुकर मिला, उसमें करीब साल भर से ताला लगा था। हाल ही में उन्हें यह मकान आवंटित हुआ और इसके पीछे ही गैरेज स्थित है। हालांकि गैरेज में ताला किसने लगाया, इसकी जानकारी किसी के पास नहीं थी। दीपक से पहले इस मकान में रहने वाले गोरखपुर में तैनात वीपी दीक्षित से बात की गई तो उन्होंने भी ताले की चाबी के बारे में अनभिज्ञता जाहिर की। सवाल यह भी है कि जब पूर्व और मौजूदा, दोनों आवंटियों ने गैरेज में ताला नहीं लगाया, तो वह कौन था, जिसने गैरेज में ताला बंद किया।
दीपक ने बताया कि वह एक साल पहले ही जिले में गोरखपुर से स्थानांतरित होकर आए हैं। सूत्रों का कहना है कि जिले में आते ही दीपक ने शराब में एल्कोहल मानक से संबंधित एक जांच की थी। इसमें उन्होंने पाया था कि कई कंपनियों की शराब की बोतलों पर अधिक एल्कोहल प्रतिशत अंकित कर बेचा जा रहा था जबकि वास्तव में इसकी मात्रा बोतल पर दर्शाए जा रहे एल्कोहल प्रतिशत से काफी कम थी। इस संबंध में उन्होंने उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भी प्रेषित की। जिस पर कई कंपनियों को करोड़ों का नुकसान भी हुआ। बाद में डिस्टलर्स एसोएिसएशन के पदाधिकारियों ने जांच का जमकर विरोध भी किया था। एक आशंका इस बात की भी है कि कहीं उनकी ईमानदारी से डरे भ्रष्ट अफसरों ने साजिश के तहत तो गैरेज में नोटों से भरा कुकर नहीं रखा। इस मामले में पुलिस का कहना है कि हर बिंदु पर जांच की जा रही है।
मामले की जांच सीओ और एसीएम संयुक्त रूप से कर रहे हैं। उधर घटना के बाद से आबकारी अफसरों ने मामले में चुप्पी साध रखी है। सूत्रों की मानें तो रविवार को आबकारी विभाग के अफसरों ने भी घटना के संबंध में दीपक से बातचीत की। हालांकि इस बारे मेें कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं। आबकारी अफसर यही कहते रहे कि मामले की जानकारी पुलिस अफसरों को दे दी गई है। पुलिस अपने स्तर से जांच करेगी।
इस पूरे मामले में आबकारी महकमे के अफसरों की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है। दरअसल इतनी बड़ी रकम मिलने के बाद भी अब तक कोई विभागीय जांच नहीं शुरू की गई है। वह भी तब जब मामले की जानकारी विभाग के उच्चाधिकारियों को भी है। जांच न होने से मामले में बड़ी साजिश की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता। इस बारे में जब आबकारी आयुक्त धीरज साहू से बात करने की कोशिश की गई तो उनसे संपर्क नहीं हो सका। उधर अपर आयुक्त ओपी आर्या ने बताया कि अभी तक किसी तरह की विभागीय जांच के आदेश की जानकारी उन्हें नहीं है। पुलिस को बताया गया है।
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आबकारी विभाग में सहायक एल्कोहल टेक्नालॉजिस्ट के पद पर तैनात इंजीनियर दीपक रस्तोगी के सरकारी क्वार्टर के पीछे स्थित गैरेज में शनिवार को नोटों से भरा कुकर मिला था। मौके पर पहुंची पुलिस ने गिनती कराई तो कुकर में 7.93 रुपये बरामद हुए थे। हालांकि इन रुपयों का कोई दावेदार सामने नहीं आया था। पुलिस नोटों को कब्जे में लेकर थाने लाई थी। उधर एसएसपी ने मामले की जांच सीओ व एसीएम से कराने का निर्णय लिया था। रविवार को इस मामले में कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। पता चला है कि टेकभनोलॉजिस्ट ने सबसे पहले अपने विभागीय अफसरों को नोटों से भरा कुकर मिलने की सूचना दी थी। इस दौरान पड़ोस में ही रहने वाले एक अफसर के घर पर कुछ काम से पहुंचा सिपाही भी आ गया था। यही नहीं पुलिस के पहुंचने से पहले उसने नोटों की गिनती भी की थी। उधर सूत्रों का कहना है कि दीपक ने भी पुलिस को कुकर में अनुमानत: 25-30 लाख रुपये होने की बात बताई थी। पुलिस का कहना है कि उस सिपाही का पता लगाया जा रहा है जिसने नोटों की गिनती की थी। जल्द ही उससे भी पूछताछ की जाएगी। आशंका है कि नोटों की गिनती के दौरान लाखों रुपए ठिकाने लगा दिए गए।
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रविवार को सीओ सिविल लाइंस श्रीश्चंद्र ने आबकारी कॉलोनी पहुंचकर टेकभनोलॉजिस्ट दीपक का बयान दर्ज किया। इस दौरान उन्होंने उनसे पूछताछ की। साथ ही आबकारी विभाग के उन अफसरों की भी जानकारी ली, जो पुलिस के पहुंचने से पहले ही मौके पर पहुंच गए थे। सीओ सिविल लाइंस ने बताया कि मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया गया। साथी ही संबंधित अफसर से पूछताछ की गई। जांच की जा रही है।
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दीपक ने बताया कि जिस गैरेज में नोटों से भरा कुकर मिला, उसमें करीब साल भर से ताला लगा था। हाल ही में उन्हें यह मकान आवंटित हुआ और इसके पीछे ही गैरेज स्थित है। हालांकि गैरेज में ताला किसने लगाया, इसकी जानकारी किसी के पास नहीं थी। दीपक से पहले इस मकान में रहने वाले गोरखपुर में तैनात वीपी दीक्षित से बात की गई तो उन्होंने भी ताले की चाबी के बारे में अनभिज्ञता जाहिर की। सवाल यह भी है कि जब पूर्व और मौजूदा, दोनों आवंटियों ने गैरेज में ताला नहीं लगाया, तो वह कौन था, जिसने गैरेज में ताला बंद किया।
दीपक ने बताया कि वह एक साल पहले ही जिले में गोरखपुर से स्थानांतरित होकर आए हैं। सूत्रों का कहना है कि जिले में आते ही दीपक ने शराब में एल्कोहल मानक से संबंधित एक जांच की थी। इसमें उन्होंने पाया था कि कई कंपनियों की शराब की बोतलों पर अधिक एल्कोहल प्रतिशत अंकित कर बेचा जा रहा था जबकि वास्तव में इसकी मात्रा बोतल पर दर्शाए जा रहे एल्कोहल प्रतिशत से काफी कम थी। इस संबंध में उन्होंने उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भी प्रेषित की। जिस पर कई कंपनियों को करोड़ों का नुकसान भी हुआ। बाद में डिस्टलर्स एसोएिसएशन के पदाधिकारियों ने जांच का जमकर विरोध भी किया था। एक आशंका इस बात की भी है कि कहीं उनकी ईमानदारी से डरे भ्रष्ट अफसरों ने साजिश के तहत तो गैरेज में नोटों से भरा कुकर नहीं रखा। इस मामले में पुलिस का कहना है कि हर बिंदु पर जांच की जा रही है।
मामले की जांच सीओ और एसीएम संयुक्त रूप से कर रहे हैं। उधर घटना के बाद से आबकारी अफसरों ने मामले में चुप्पी साध रखी है। सूत्रों की मानें तो रविवार को आबकारी विभाग के अफसरों ने भी घटना के संबंध में दीपक से बातचीत की। हालांकि इस बारे मेें कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं। आबकारी अफसर यही कहते रहे कि मामले की जानकारी पुलिस अफसरों को दे दी गई है। पुलिस अपने स्तर से जांच करेगी।
इस पूरे मामले में आबकारी महकमे के अफसरों की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है। दरअसल इतनी बड़ी रकम मिलने के बाद भी अब तक कोई विभागीय जांच नहीं शुरू की गई है। वह भी तब जब मामले की जानकारी विभाग के उच्चाधिकारियों को भी है। जांच न होने से मामले में बड़ी साजिश की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता। इस बारे में जब आबकारी आयुक्त धीरज साहू से बात करने की कोशिश की गई तो उनसे संपर्क नहीं हो सका। उधर अपर आयुक्त ओपी आर्या ने बताया कि अभी तक किसी तरह की विभागीय जांच के आदेश की जानकारी उन्हें नहीं है। पुलिस को बताया गया है।