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सड़क पर उतरे कांस्टेबल भर्ती के अभ्यर्थी, हंगामा
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 27 Feb 2018 12:58 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
केन्द्रीय बलों की भर्ती परीक्षा-2011 में धांधली का आरोप लगाते हुए कई राज्यों से जुटे अभ्यर्थियों ने सोमवार को सड़क पर उतरकर खलबली मचा दी। हाईकोर्ट के पास पोलो ग्राउंड में जमकर हंगामा किया। बाद में सैकड़ों की संख्या में अभ्यर्थी हाईकोर्ट में घुसने की कोशिश करने लगेे। पुलिस ने रोका तो प्रधर्शनकारी नोकझोंक करने लगे। किसी तरह उन्हें समझाकर वापस किया गया। यहां से अभ्यर्थी मामले को देख रहे अधिवक्ता विजय गौतम के आवास पर पहुंच गए। बवाल की आशंका को देखते हुए फोर्स बुलानी पड़ी। किसी तरह समझाकर उन्हें शांत किया गया।
प्रदेश के साथ ही, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान से सैकड़ों की संख्या में पहुंचे अभ्यर्थियों का कहना था कि वर्ष 2011 में एसएससी द्वारा आयोजित आईटीबीपी, बीएसएफ, सीआईएसएफ, एसएसबी, सीआरपीएफ, असम राइफल्स की जनरल ड्यूटी परीक्षा में जमकर धांधली हुई है। इसके लिए इन अभ्यर्थियों ने जन सूचना अधिकार अधिनियम द्वारा एकत्रित साक्ष्य भी प्रस्तुत किए। आरोप है कि हाईकोर्ट से 13 नवंबर 2017 को आगे की भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाने के बावजूद एसएससी से नियुक्ति पत्र दिया रहा है। इसमें भी कम नंबर वालों को बैकडोर से नियुक्ति दी जा रही है जबकि अधिक नंबर पाने वाले बाहर हैं। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक अभी भी 28044 पद खाली हैं। इसके सापेक्ष करीब 10 हजार अभ्यर्थी ही बचे हैं। ये अभ्यर्थी भी शारीरिक दक्षता, लिखित व चिकित्सा परीक्षा पास हैं।
इसके बाद भी एसएससी के स्तर से नियम-कायदों को ताक पर रख नियुक्ति पत्र दिए जा रहे हैं। एसएससी के कर्ताधर्ता अधिकारी हाईकोर्ट के स्थगन आदेश की भी अनदेखी कर रहे हैं। शहर में जुटे अभ्यर्थियों ने पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि अगर उनके मामले में जल्द से जल्द न्याय नहीं हुआ तो वे उग्र कदम उठाने को बाध्य होंगे। अभ्यर्थियों के अधिवक्ता विजय गौतम का कहना है कि इस मामले में सुनवाई अभी लंबित है। मुकदमे की सुनवाई के लिए पीठ नामित करने हेतु प्रकरण मुख्य न्यायाधीश को भेजा गया है। पीठ नामित होते ही सुनवाई शुरू हो जाएगी।
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प्रदेश के साथ ही, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान से सैकड़ों की संख्या में पहुंचे अभ्यर्थियों का कहना था कि वर्ष 2011 में एसएससी द्वारा आयोजित आईटीबीपी, बीएसएफ, सीआईएसएफ, एसएसबी, सीआरपीएफ, असम राइफल्स की जनरल ड्यूटी परीक्षा में जमकर धांधली हुई है। इसके लिए इन अभ्यर्थियों ने जन सूचना अधिकार अधिनियम द्वारा एकत्रित साक्ष्य भी प्रस्तुत किए। आरोप है कि हाईकोर्ट से 13 नवंबर 2017 को आगे की भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाने के बावजूद एसएससी से नियुक्ति पत्र दिया रहा है। इसमें भी कम नंबर वालों को बैकडोर से नियुक्ति दी जा रही है जबकि अधिक नंबर पाने वाले बाहर हैं। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक अभी भी 28044 पद खाली हैं। इसके सापेक्ष करीब 10 हजार अभ्यर्थी ही बचे हैं। ये अभ्यर्थी भी शारीरिक दक्षता, लिखित व चिकित्सा परीक्षा पास हैं।
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इसके बाद भी एसएससी के स्तर से नियम-कायदों को ताक पर रख नियुक्ति पत्र दिए जा रहे हैं। एसएससी के कर्ताधर्ता अधिकारी हाईकोर्ट के स्थगन आदेश की भी अनदेखी कर रहे हैं। शहर में जुटे अभ्यर्थियों ने पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि अगर उनके मामले में जल्द से जल्द न्याय नहीं हुआ तो वे उग्र कदम उठाने को बाध्य होंगे। अभ्यर्थियों के अधिवक्ता विजय गौतम का कहना है कि इस मामले में सुनवाई अभी लंबित है। मुकदमे की सुनवाई के लिए पीठ नामित करने हेतु प्रकरण मुख्य न्यायाधीश को भेजा गया है। पीठ नामित होते ही सुनवाई शुरू हो जाएगी।
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