फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   atiq no bail

शियाट्स मामले में अतीक की जमानत खारिज

Sun, 19 Feb 2017 01:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sun, 19 Feb 2017 01:38 AM IST
विज्ञापन
atiq no bail
अतीक अहमद (फाइल फोटो)
शियाट्स परिसर में घुसकर मारपीट और तोड़फोड़ के मामले में जिला न्यायालय ने पूर्व सांसद अतीक अहमद को जमानत देने से इंकार करते हुए उनकी अर्जी खारिज कर दी। अतीक की अर्जी पर स्पेशल सीजेएम सुशील कुमार ने सुनवाई की। अर्जी पर शनिवार को दिन में करीब सवा बजे सुनवाई प्रारंभ हुई जो डेढ़ घंटे तक चली। दोनों पक्षों की बहस को सुनने के बाद अदालत ने अतीक के लंबे आपराधिक इतिहास और घटना की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने से मना कर दिया।
विज्ञापन


अतीक के बचाव में अधिवक्ता दयाशंकर मिश्र, राधेश्याम पांडेय, खान शौलत हनीफ और खान फरहत हनीफ ने पक्ष रखा। दलील दी गई कि अतीक 11 फरवरी से नैनी जेल में बंद हैं। वह पूर्व सांसद हैं, पांच बार विधायक रह चुके हैं। राजनैतिक रंजिश के कारण उनको फंसाया गया है। वह जनप्रतिनिधि का दायित्व निभाने संस्थान गए थे। उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है। घटना में छात्रों और स्कूल के स्टाफ के बीच कहासुनी और मारपीट हुई थी।
विज्ञापन


अभियोजन ने जो क्राइम हिस्ट्री पेश की है वह गलत है। उसमें कई मुकदमे समाप्त हो चुके हैं। इसी मामले में सह अभियुक्त सिराज और मो. सैफ की जमानत सत्र न्यायालय से हो चुकी है। समानता के आधार पर जमानत पर रिहा किए जाने की याचना की गई। बचाव पक्ष की ओर से विधि व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा गया है कि आपराधिक इतिहास के आधार पर जमानत निरस्त नहीं की जा सकती है। यह भी तर्क दिया कि धारा सात सीएलए छोड़कर सभी धाराएं जमानतीय हैं और सीएलए एक्ट में मात्र छह माह की सजा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


अभियोजन अधिकारी शिवश्याम ने जमानत अर्जी का विरोध किया। तर्क दिया कि अभियुक्त ने असलहों से लैस होकर संस्थान में घुसकर कर्मचारियों से मारपीट और गालीगलौज की। अतीक का लंबा आपराधिक  इतिहास है, जिसमें लोक सेवकों पर हमले से लेकर हत्या जैसे गंभीर अपराध होने का उल्लेख है। जमानत मंजूर होने पर वह गवाहों पर दबाव बनाकर प्रभावित किया जा सकता है। कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत अर्जी नामंजूर कर दी है। जमानत पर सुनवाई के पूर्व मामले के विवेचक ने अभियुक्त के संबंध में जानकारी और साक्ष्य संकलन का हवाला देते हुए सुनवाई स्थगित किए जाने की याचना की थी, लेकिन कोर्ट ने उनकी अर्जी खारिज कर दी।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed