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विदेश में नौकरी के नाम पर सवा करोड़ की ठगी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 09 Feb 2017 01:23 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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विदेश में नौकरी लगाने और वीजा दिलाने का झांसा देकर एक फर्जी कंपनी के ठगों ने डेढ़ सौ से ज्यादा लोगों को चूना लगा दिया। चार महीने में तकरीबन सवा करोड़ रुपये बटोरने के बाद ठग गिरोह के लोग ट्रैफिक लाइन के निकट दफ्तर में ताला लगाकर फरार हो गए। ठगी का शिकार हुए लोगों ने बुधवार दोपहर कंपनी पर ताला लगा देख हंगामा किया तो कैंट थाने की पुलिस पहुंची। पुलिस का कहना है कि ठगों की तलाश में छापे मारे जा रहे हैं। कैंट कोतवाल ने बताया कि करोड़ों की ठगी करने वाले ठगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।
बांदा के एक शातिर ने करीब चार महीने पहले स्टेनली रोड पर ट्रैफिक चौराहे के निकट स्टार मैरिन कंपनी का दफ्तर खोल प्रचारित किया कि कंपनी विदेश में नौकरी लगाने और वीजा दिलाने का काम करती है। पता चला तो बेरोजगार युवक कंपनी के दफ्तर पहुंचने लगे। कंपनी के मुख्य संचालक ने शुरू में युवकों में भरोसा पैदा करने के लिए एक भी पैसे नहीं मांगे और कहा कि वीजा आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जो खर्च लगेगा उसके बारे में बताया जाएगा। चार महीने में डेढ़ सौ से ज्यादा युवकों से दुबई, मलेशिया, सिंगापुर, हांगकांग, अबूधाबी, बहरीन, आस्ट्रेलिया में एक लाख रुपये मासिक से ज्यादा वेतन की नौकरी और वीजा का फार्म भराने के बाद ठगों ने पैसों की मांग शुरू कर दी। सिर्फ वीजा के लिए 30 से 40 हजार रुपये और नौकरी के लिए 70 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक का खर्च बताया गया। इधर करीब दस रोज में ठगों ने सभी आवेदकों से पैसे जमा करा लिए। पैसे नहीं जमा करने वाले कुछ युवकों को मंगलवार शाम तक फोन कर कहा गया कि भुगतान नहीं हुआ तो आखिरी तिथि के बाद उनका काम नहीं हो सकेगा।
ऐसे में मंगलवार रात तक कई युवकों ने मोटी रकम जमा की। ठगी का शिकार हुए राजापुर मुहल्ले के सरताज, नौशाद, अजहर आदि ने बताया कि ठग गिरोह का सरगना मंगलवार आधी रात तक दफ्तर में मौजूद था। सरताज ने उसने कहा कि काम ज्यादा है इसलिए देर तक रुकना पड़ा है। मगर रात में ही ठग गिरोह पैसे और दफ्तर का सारा सामान बटोरकर फरार हो गए। आवेदन करने वाले कुछ युवक बुधवार सुबह पहुंचे तो दफ्तर में ताला लगा था। दोपहर एक बजे तक जब कंपनी के लोग नहीं आए तो मुख्य संचालक को आवेदकों ने फोन किया मगर उसके दोनों नंबर स्विच ऑफ बता रहे थे। ऐसे में युवक संशकित हो गए। शाम चार बजे तक वहां बड़ी संख्या में आवेदक जुट गए। वे समझ गए कि कंपनी ने ठगी कर ली है। अनुमान है कि ठगों ने सवा करोड़ रुपये से ज्यादा बटोरे हैं। सरताज, नौशाद समेत 42 युवकों ने कैंट थाने जाकर लिखित शिकायत की। पुलिस ने देर शाम कंपनी के दफ्तर पर छापा मारा लेकिन ताला लगा मिला। पुलिस का कहना है कि ठगी करने वाले गिरोह के मुख्य संचालक के बांदा स्थित ठिकाने पर दबिश दी जाएगी।
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ट्रैफिक चौराहे के निकट जिस मकान में कंपनी का दफ्तर है, उसके मालिक ने पुलिस और आवेदकों को बताया कि बांदा के सुरेश ने चार महीने पहले यह कहकर एग्रीमेंट कराया था कि उसे एक निजी कंपनी का संचालन करना है। उन्हें भी सुरेश ने कुछ नहीं बताया कि वह कहां चला गया है।
-नौकरी की चाहत में ठगे गए कई युवक ठग कंपनी के दफ्तर के बाहर रो पड़े। बेरोजगारी से निजात पाने के लिए युवकों और उनके परिवार के लोग ने इधर-उधर से उधार लेकर 80 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक जमा किए थे। अब जब उन्हें विदेश में नौकरी की उम्मीद थी तभी पता चला कि वे ठगे गए हैं। राजापुर के नौशाद ने बताया कि उसने मंगलवार सुबह कंपनी के दफ्तर में एक लाख दस हजार रुपये जमा किए थे। अब वह तबाह हो गया है।
ठगी का शिकार हुए लोगों ने बताया कि कंपनी के संचालक ने पचास से ज्यादा आवेदकों से कहा था कि दुबई, सिंगापुर और मलेशिया के लिए नौ फरवरी को उनकी अलग-अलग फ्लाईट है। दिल्ली और लखनऊ से फ्लाईट में जाना था। मगर सात फरवरी की रात ही वह फरार हो गया।
कैंट कोतवाल राकेश कुमार अवस्थी ने बताया कि वीजा बनाने और विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है। आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए टीम बनाकर छापेमारी की जाएगी।
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बांदा के एक शातिर ने करीब चार महीने पहले स्टेनली रोड पर ट्रैफिक चौराहे के निकट स्टार मैरिन कंपनी का दफ्तर खोल प्रचारित किया कि कंपनी विदेश में नौकरी लगाने और वीजा दिलाने का काम करती है। पता चला तो बेरोजगार युवक कंपनी के दफ्तर पहुंचने लगे। कंपनी के मुख्य संचालक ने शुरू में युवकों में भरोसा पैदा करने के लिए एक भी पैसे नहीं मांगे और कहा कि वीजा आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जो खर्च लगेगा उसके बारे में बताया जाएगा। चार महीने में डेढ़ सौ से ज्यादा युवकों से दुबई, मलेशिया, सिंगापुर, हांगकांग, अबूधाबी, बहरीन, आस्ट्रेलिया में एक लाख रुपये मासिक से ज्यादा वेतन की नौकरी और वीजा का फार्म भराने के बाद ठगों ने पैसों की मांग शुरू कर दी। सिर्फ वीजा के लिए 30 से 40 हजार रुपये और नौकरी के लिए 70 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक का खर्च बताया गया। इधर करीब दस रोज में ठगों ने सभी आवेदकों से पैसे जमा करा लिए। पैसे नहीं जमा करने वाले कुछ युवकों को मंगलवार शाम तक फोन कर कहा गया कि भुगतान नहीं हुआ तो आखिरी तिथि के बाद उनका काम नहीं हो सकेगा।
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ऐसे में मंगलवार रात तक कई युवकों ने मोटी रकम जमा की। ठगी का शिकार हुए राजापुर मुहल्ले के सरताज, नौशाद, अजहर आदि ने बताया कि ठग गिरोह का सरगना मंगलवार आधी रात तक दफ्तर में मौजूद था। सरताज ने उसने कहा कि काम ज्यादा है इसलिए देर तक रुकना पड़ा है। मगर रात में ही ठग गिरोह पैसे और दफ्तर का सारा सामान बटोरकर फरार हो गए। आवेदन करने वाले कुछ युवक बुधवार सुबह पहुंचे तो दफ्तर में ताला लगा था। दोपहर एक बजे तक जब कंपनी के लोग नहीं आए तो मुख्य संचालक को आवेदकों ने फोन किया मगर उसके दोनों नंबर स्विच ऑफ बता रहे थे। ऐसे में युवक संशकित हो गए। शाम चार बजे तक वहां बड़ी संख्या में आवेदक जुट गए। वे समझ गए कि कंपनी ने ठगी कर ली है। अनुमान है कि ठगों ने सवा करोड़ रुपये से ज्यादा बटोरे हैं। सरताज, नौशाद समेत 42 युवकों ने कैंट थाने जाकर लिखित शिकायत की। पुलिस ने देर शाम कंपनी के दफ्तर पर छापा मारा लेकिन ताला लगा मिला। पुलिस का कहना है कि ठगी करने वाले गिरोह के मुख्य संचालक के बांदा स्थित ठिकाने पर दबिश दी जाएगी।
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ट्रैफिक चौराहे के निकट जिस मकान में कंपनी का दफ्तर है, उसके मालिक ने पुलिस और आवेदकों को बताया कि बांदा के सुरेश ने चार महीने पहले यह कहकर एग्रीमेंट कराया था कि उसे एक निजी कंपनी का संचालन करना है। उन्हें भी सुरेश ने कुछ नहीं बताया कि वह कहां चला गया है।
-नौकरी की चाहत में ठगे गए कई युवक ठग कंपनी के दफ्तर के बाहर रो पड़े। बेरोजगारी से निजात पाने के लिए युवकों और उनके परिवार के लोग ने इधर-उधर से उधार लेकर 80 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक जमा किए थे। अब जब उन्हें विदेश में नौकरी की उम्मीद थी तभी पता चला कि वे ठगे गए हैं। राजापुर के नौशाद ने बताया कि उसने मंगलवार सुबह कंपनी के दफ्तर में एक लाख दस हजार रुपये जमा किए थे। अब वह तबाह हो गया है।
ठगी का शिकार हुए लोगों ने बताया कि कंपनी के संचालक ने पचास से ज्यादा आवेदकों से कहा था कि दुबई, सिंगापुर और मलेशिया के लिए नौ फरवरी को उनकी अलग-अलग फ्लाईट है। दिल्ली और लखनऊ से फ्लाईट में जाना था। मगर सात फरवरी की रात ही वह फरार हो गया।
कैंट कोतवाल राकेश कुमार अवस्थी ने बताया कि वीजा बनाने और विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है। आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए टीम बनाकर छापेमारी की जाएगी।