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तो बंद हो जाएंगे 90 फीसदी अल्ट्रासाउंड केंद्र
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 24 Jul 2017 02:17 AM IST
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इस हाल में पड़ी है गंगोलीहाट अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन
- फोटो : अमर उजाला
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शहर के 90 फीसदी अल्ट्रासाउंड केंद्र और डायग्नॉस्टिक सेंटर डिग्री, डिप्लोमा के चक्कर में बंद होने के कगार पर हैं। सीएमओ की ओर से केंद्र संचालकों को नए नियमों के तहत नोटिस जारी कर एमबीबीएस के अतिरिक्त डिप्लोमा, डिग्री का एमसीआई से पंजीकरण का प्रमाणपत्र मांगा गया है। नोटिस में कहा गया है कि क्यों न पीसी पीएनडीटी एक्ट के तहत आपके केंद्र बंद कर दिए जाएं। इन केंद्र संचालकों के औपचारिकताएं पूरी करने के बाद फाइल पर डीएम के हस्ताक्षर से नवीनीकरण किया जाएगा। इस कार्रवाई से विशेषज्ञ चिकित्सकों में हड़कंप मचा है। क्योंकि शहर के अधिकतर संचालक विशेषज्ञों के पास एमसीआई से पंजीकरण नहीं है।
पीसी पीएनडीटी एक्ट के पंजीकरण और नवीनीकरण के नियमों को 1 जनवरी 2017 और सख्त बना दिया गया है। साथ ही केंद्र संचालक को एमबीबीएस संग अतिरिक्त डिग्री या डिप्लोमा का एमसीआई से पंजीकरण का प्रमाण पत्र मांगा गया है। नए वित्तीय वर्ष में एक अप्रैल से नवीनीकरण कराने की प्रक्रिया शुरू हुई। केंद्र संचालकों ने नवीनीकरण के लिए सीएमओ दफ्तर में प्रार्थना पत्र दिया तो नए नियमों के चक्रव्यूह में उलझ गए। किसी तरह कागज, प्रमाण पत्र एकत्र कर जमा कराए तो डिग्री की मान्यता और एमसीआई का पेच फंस गया।
शहर में वर्तमान में सरकारी, गैर सरकारी 70 अल्ट्रासाउंड केंद्र पंजीकृत हैं। करीब दो दर्जन डायग्नॉस्टिक सेंटर भी चल रहे हैं। मौजूदा स्थिति में अधिकांश डिग्री, डिप्लोमाधारी चिकित्सकों का एमसीआई से पंजीकरण नहीं है। इसकी जानकारी होने पर सीएमओ डॉ. आलोक वर्मा ने नवीनीकरण के लिए आवेदन करने वाले संचालक चिकित्सकों को नोटिस जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि पात्रता पूरी न करने के कारण क्यों न आपके केंद्र को बंद करा दिया जाए। हालत यह है कि पंजीकरण की अवधि पूरी होने पर नवीनीकरण के लिए आवेदन करने वाले अधिकतर केंद्रों का मामला फंसा है। दस फीसदी ऐसे केंद्रों का नवीनीकरण हो जाएगा, जिनकी डिग्री या डिप्लोमा यूपी नहीं अन्य प्रदेशों के मेडिकल कॉलेजों का है। ऐसे में नियम बने रहे और अफसर अड़े रहे तो शहर के 90 फीसदी अल्ट्रासाउंड केंद्र और डायग्नॉस्टिक सेंटर बंद हो सकते हैं।
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अल्ट्रासाउंड केंद्रों डायग्नॉस्टिक सेंटरों के नवीनीकरण में अर्हता पूरी न कर पाने वाले केंद्र संचालकों को नोटिस जारी किया गया है। डिग्री, डिप्लोमा का एमसीआई या स्टेट मेडिकल कौंसिल से पंजीकरण अनिवार्य रूप से लगाना पड़ेगा। - डॉ. आलोक वर्मा, सीएमओ इलाहाबाद
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पीसी पीएनडीटी एक्ट के पंजीकरण और नवीनीकरण के नियमों को 1 जनवरी 2017 और सख्त बना दिया गया है। साथ ही केंद्र संचालक को एमबीबीएस संग अतिरिक्त डिग्री या डिप्लोमा का एमसीआई से पंजीकरण का प्रमाण पत्र मांगा गया है। नए वित्तीय वर्ष में एक अप्रैल से नवीनीकरण कराने की प्रक्रिया शुरू हुई। केंद्र संचालकों ने नवीनीकरण के लिए सीएमओ दफ्तर में प्रार्थना पत्र दिया तो नए नियमों के चक्रव्यूह में उलझ गए। किसी तरह कागज, प्रमाण पत्र एकत्र कर जमा कराए तो डिग्री की मान्यता और एमसीआई का पेच फंस गया।
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शहर में वर्तमान में सरकारी, गैर सरकारी 70 अल्ट्रासाउंड केंद्र पंजीकृत हैं। करीब दो दर्जन डायग्नॉस्टिक सेंटर भी चल रहे हैं। मौजूदा स्थिति में अधिकांश डिग्री, डिप्लोमाधारी चिकित्सकों का एमसीआई से पंजीकरण नहीं है। इसकी जानकारी होने पर सीएमओ डॉ. आलोक वर्मा ने नवीनीकरण के लिए आवेदन करने वाले संचालक चिकित्सकों को नोटिस जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि पात्रता पूरी न करने के कारण क्यों न आपके केंद्र को बंद करा दिया जाए। हालत यह है कि पंजीकरण की अवधि पूरी होने पर नवीनीकरण के लिए आवेदन करने वाले अधिकतर केंद्रों का मामला फंसा है। दस फीसदी ऐसे केंद्रों का नवीनीकरण हो जाएगा, जिनकी डिग्री या डिप्लोमा यूपी नहीं अन्य प्रदेशों के मेडिकल कॉलेजों का है। ऐसे में नियम बने रहे और अफसर अड़े रहे तो शहर के 90 फीसदी अल्ट्रासाउंड केंद्र और डायग्नॉस्टिक सेंटर बंद हो सकते हैं।
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अल्ट्रासाउंड केंद्रों डायग्नॉस्टिक सेंटरों के नवीनीकरण में अर्हता पूरी न कर पाने वाले केंद्र संचालकों को नोटिस जारी किया गया है। डिग्री, डिप्लोमा का एमसीआई या स्टेट मेडिकल कौंसिल से पंजीकरण अनिवार्य रूप से लगाना पड़ेगा। - डॉ. आलोक वर्मा, सीएमओ इलाहाबाद