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13 महीने की बीमारी 48 घंटे में ठीक
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 20 Apr 2017 01:50 AM IST
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जेल
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13 महीने से एसआरएन अस्पताल में इलाज कराने के लिए भर्ती कुंडा नगर पंचायत अध्यक्ष गुलशन यादव अमर उजाला में खबर छपने के 48 घंटे के भीतर ही ठीक हो गए। शासन स्तर से पूछताछ शुरू हुई तो कार्रवाई से बचने के लिए खुद जेल अधीक्षक प्रतापगढ़ दल बल के साथ बुधवार दोपहर अस्पताल पहुंचे। उन्होंने करीब सवा महीने पहले मिली सीएमओ की रिपोर्ट को ही आधार बनाकर अस्पताल के एसआईसी को बंदी गुलशन को डिस्चार्ज करने संबंधी पत्र दिया। आननफानन में औपचारिकताएं पूरी करा गुलशन को डिस्चार्ज कराकर प्रतापगढ़ जेल ले गए। जबकि एक दिन पहले तक जेल अधीक्षक विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बारे में अनभिज्ञता जता रहे थे। इससे साफ हो गया है कि जेल प्रशासन ही रसूखदार बंदियों को हर तरह की सुविधाएं मुहैया कराता है। गुलशन को बिना मर्ज के ही मौज काटने के लिए अस्पताल में रखा गया था।
अमर उजाला ने सोमवार और मंगलवार के अंक में गुलशन को बिना बीमारी एसआरएन अस्पताल में भर्ती रखने और जांच रिपोर्ट के बारे में खबर प्रकाशित की गई तो हड़कंप मच गया। इस मामले से जुड़ा हर व्यक्ति खुद को पाक साफ बताते हुए गुलशन के बारे में किसी भी तरह की रिपोर्ट के मिलने से अनभिज्ञता जताता रहा। एक दिन पहले तक गुलशन को बीमार बता रहे जेल अधीक्षक प्रतापगढ़ बुधवार दोपहर उसे डिस्चार्ज कराने एसआरएन अस्पताल पहुंच गए। अपने पत्र के साथ उन्होंने एसआरएन अस्पताल के एसआईसी को सीएमओ की वह रिपोर्ट भी संलग्न कर दी, जिसके बारे में वह एक दिन पहले तक अनभिज्ञता जता रहे थे। मेडिसिन विभाग की एचओडी की संस्तुति पर गुलशन का इलाज कर रहे नेफ्रोलॉजी और आर्थों विभाग के चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद कुछ दवाएं लिखीं फिर गुलशन को डिस्चार्ज करने की सहमति दे दी। ओपीडी अवधि के भीतर दिन में करीब दो बजे जेल अधीक्षक गुलशन को डिस्चार्ज कराकर अपने साथ प्रतापगढ़ जेल ले गए।
उल्लेखनीय है कि कुंडा नगर पंचायत अध्यक्ष गुलशन यादव प्रतापगढ़ के सहिबापुर जमेठी निवासी पुष्पेंद्र सिंह को गोली मारने के आरोपी हैं। हत्या के प्रयास मामले में 11 सितंबर 2014 से गुलशन जेल में थे। वहां गुलशन ने यूरिन इंफेक्शन और रीढ़ की हड्डी में खिंचाव की शिकायत की थी। पिछले वर्ष 2016 में 17 मार्च को प्रतापगढ़ जेल से उन्हें एसआरएन अस्पताल के आर्थो विभाग के वार्ड नंबर दो में भर्ती कराया गया।
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विशेषज्ञों के मुताबिक जिस तरह की बीमारी गुलशन को थी, वह सामान्य तौर पर एक सप्ताह के भीतर ठीक हो जाती है। कांप्लीकेशन की स्थिति में उपचार की अवधि अधिकतम तीन महीने हो सकती है। गुलशन की फाइल देखने से पता चला कि गुलशन को सामान्य यूरिन इंफेक्शन ही था। रीढ़ की हड्डी के खिंचाव के मामले में फिजियोथेरेपी से ही कुछ दिन में आराम मिल जाता है। फिर भी विचाराधीन बंदी को 13 महीने अस्पताल में रखा गया। अस्पताल में वार्ड नंबर दो में भर्ती मरीजों के तीमारदारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि गुलशन अपने लिए आवंटित बेड पर कभी रहा ही नहीं। दिन में एक या दो बार वह वहां खानापूरी करने आता फिर अपने ड्राइवर के नाम आवंटित एसी रूम में आराम करने चला जाता। दिन हो या रात, उसके घूमने फिरने पर भी रोकटोक नहीं थी।
बंदियों को इलाज के नाम सरकारी अस्पताल में मौज कराने के मामले में बदनाम जेल प्रशासन ने इस मामले में भी डॉक्टरों से सेटिंग कर बेहद सतर्क ता बरती। जेल अधीक्षक प्रतापगढ़ ने कागज की खानापूरी करने में भी चूक नहीं की लेकिन उनकी चालाकी उन्हीं पर भारी पड़ गई। हर दो महीने में वह एसआरएन अस्पताल के अधीक्षक को पत्र भेजकर गुलशन के स्वास्थ्य के बारे में रिपोर्ट मांगते। रिपोर्ट में डॉक्टर बंदी का इलाज जारी रखने की जरूरत बताते और हर बार बंदी को अस्पताल में उपचार के नाम पर मौज करने की छूट मिल जाती।
पिछले साल दिसंबर में गुलशन को आगे भी अस्पताल में रखने की योजना के तहत जेल अधीक्षक प्रतापगढ़ ने सीएमओ इलाहाबाद को एक पत्र भेजा। जिसमें गुलशन की बीमारी तथा स्वास्थ्य की जांच विशेषज्ञों के पैनल से कराने का अनुरोध किया गया था। सूत्र बताते हैं कि सीएमओ ने विशेषज्ञों का बोर्ड गठित कर एसआरएन अस्पताल भेजा तो जांच टीम में गुलशन का इलाज कर रहे नेफ्रोलॉजी और आर्थो विभाग के दो डॉक्टर भी शामिल हो गए। इसके बाद रिपोर्ट में लीपापोती कर दी गई। यह प्रक्रिया इसी मार्च में फिर दोहराई गई तो सीएमओ ने बोर्ड गठित कर विशेषज्ञों को अचानक अस्पताल भेजकर गुलशन के स्वास्थ्य की जांच कराई। सूत्र बताते हैं कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की इस रिपोर्ट में गुलशन फिट बताया गया। यह रिपोर्ट दस मार्च को डीएम इलाहाबाद के साथ एसपी प्रतापगढ़ और जेल अधीक्षक प्रतापगढ़ को भेज दी गई। बावजूद इसके जेल प्रशासन नहीं चेता। रिपोर्ट मिलने के करीब सवा महीने बाद अचानक जेल प्रशासन का सक्रिय होकर बंदी गुलशन को आननफानन में डिस्चार्ज करा जेल ले जाना किसी न किसी गड़बड़ी का संकेत दे रहे हैं।
जेल अधीक्षक प्रतापगढ़, एसआरएन अस्पताल के चिकित्सकों और दोनों जिलों के प्रशासनिक अफसरों की मामले से अनभिज्ञता से कई सवाल उठे हैं। जेल और अस्पताल प्रशासन अपनी गर्दन बचाने के लिए एक-दूसरे पर तोहमत मढ़ रहे हैं। बंदी को फिट बता जेल भेजने संबंधी रिपोर्ट को क्यों दबाया गया, इस बारे में सभी के गोलमोल जवाब हैं। जेल प्रशासन तो मान चुका है कि उसे दस मार्च को भेजी गई रिपोर्ट मिली लेकिन अस्पताल प्रशासन इससे इनकार कर रहा है। एसपी प्रतापगढ़ भी रिपोर्ट न मिलने की बात कह रहे हैं। ऐसे में मामले की बिंदुवार जांच की जाए तो कई चेहरे बेनकाब होंगे और बंदियों को बिना मर्ज अस्पताल भर्ती रखने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकेगी।
- सीएमओ इलाहाबाद की ओर से मेरे पत्र के आधार पर गठित मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट मार्च में मिली थी। उसमें गुलशन का स्वास्थ्य ठीक और उन्हें जेल ले जाने के लिए फिट बताया गया था। तब एसआरएन अस्पताल के एसआईसी से गुलशन को डिस्चार्ज करने के संबंध में मौखिक वार्ता हुई थी, लेकिन उन्होंनेे लेटर न मिलने की वजह से बंदी को डिस्चार्ज करने से असमर्थता जताई थी। अस्पताल की ओर से कोई कार्रवाई न होने के कारण बुधवार को बंदी को अस्पताल से डिस्चार्ज करा जेल में दाखिल करा दिया गया है।
-दिलीप पांडेय - जेल अधीक्षक प्रतापगढ़
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अमर उजाला ने सोमवार और मंगलवार के अंक में गुलशन को बिना बीमारी एसआरएन अस्पताल में भर्ती रखने और जांच रिपोर्ट के बारे में खबर प्रकाशित की गई तो हड़कंप मच गया। इस मामले से जुड़ा हर व्यक्ति खुद को पाक साफ बताते हुए गुलशन के बारे में किसी भी तरह की रिपोर्ट के मिलने से अनभिज्ञता जताता रहा। एक दिन पहले तक गुलशन को बीमार बता रहे जेल अधीक्षक प्रतापगढ़ बुधवार दोपहर उसे डिस्चार्ज कराने एसआरएन अस्पताल पहुंच गए। अपने पत्र के साथ उन्होंने एसआरएन अस्पताल के एसआईसी को सीएमओ की वह रिपोर्ट भी संलग्न कर दी, जिसके बारे में वह एक दिन पहले तक अनभिज्ञता जता रहे थे। मेडिसिन विभाग की एचओडी की संस्तुति पर गुलशन का इलाज कर रहे नेफ्रोलॉजी और आर्थों विभाग के चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद कुछ दवाएं लिखीं फिर गुलशन को डिस्चार्ज करने की सहमति दे दी। ओपीडी अवधि के भीतर दिन में करीब दो बजे जेल अधीक्षक गुलशन को डिस्चार्ज कराकर अपने साथ प्रतापगढ़ जेल ले गए।
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उल्लेखनीय है कि कुंडा नगर पंचायत अध्यक्ष गुलशन यादव प्रतापगढ़ के सहिबापुर जमेठी निवासी पुष्पेंद्र सिंह को गोली मारने के आरोपी हैं। हत्या के प्रयास मामले में 11 सितंबर 2014 से गुलशन जेल में थे। वहां गुलशन ने यूरिन इंफेक्शन और रीढ़ की हड्डी में खिंचाव की शिकायत की थी। पिछले वर्ष 2016 में 17 मार्च को प्रतापगढ़ जेल से उन्हें एसआरएन अस्पताल के आर्थो विभाग के वार्ड नंबर दो में भर्ती कराया गया।
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विशेषज्ञों के मुताबिक जिस तरह की बीमारी गुलशन को थी, वह सामान्य तौर पर एक सप्ताह के भीतर ठीक हो जाती है। कांप्लीकेशन की स्थिति में उपचार की अवधि अधिकतम तीन महीने हो सकती है। गुलशन की फाइल देखने से पता चला कि गुलशन को सामान्य यूरिन इंफेक्शन ही था। रीढ़ की हड्डी के खिंचाव के मामले में फिजियोथेरेपी से ही कुछ दिन में आराम मिल जाता है। फिर भी विचाराधीन बंदी को 13 महीने अस्पताल में रखा गया। अस्पताल में वार्ड नंबर दो में भर्ती मरीजों के तीमारदारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि गुलशन अपने लिए आवंटित बेड पर कभी रहा ही नहीं। दिन में एक या दो बार वह वहां खानापूरी करने आता फिर अपने ड्राइवर के नाम आवंटित एसी रूम में आराम करने चला जाता। दिन हो या रात, उसके घूमने फिरने पर भी रोकटोक नहीं थी।
बंदियों को इलाज के नाम सरकारी अस्पताल में मौज कराने के मामले में बदनाम जेल प्रशासन ने इस मामले में भी डॉक्टरों से सेटिंग कर बेहद सतर्क ता बरती। जेल अधीक्षक प्रतापगढ़ ने कागज की खानापूरी करने में भी चूक नहीं की लेकिन उनकी चालाकी उन्हीं पर भारी पड़ गई। हर दो महीने में वह एसआरएन अस्पताल के अधीक्षक को पत्र भेजकर गुलशन के स्वास्थ्य के बारे में रिपोर्ट मांगते। रिपोर्ट में डॉक्टर बंदी का इलाज जारी रखने की जरूरत बताते और हर बार बंदी को अस्पताल में उपचार के नाम पर मौज करने की छूट मिल जाती।
पिछले साल दिसंबर में गुलशन को आगे भी अस्पताल में रखने की योजना के तहत जेल अधीक्षक प्रतापगढ़ ने सीएमओ इलाहाबाद को एक पत्र भेजा। जिसमें गुलशन की बीमारी तथा स्वास्थ्य की जांच विशेषज्ञों के पैनल से कराने का अनुरोध किया गया था। सूत्र बताते हैं कि सीएमओ ने विशेषज्ञों का बोर्ड गठित कर एसआरएन अस्पताल भेजा तो जांच टीम में गुलशन का इलाज कर रहे नेफ्रोलॉजी और आर्थो विभाग के दो डॉक्टर भी शामिल हो गए। इसके बाद रिपोर्ट में लीपापोती कर दी गई। यह प्रक्रिया इसी मार्च में फिर दोहराई गई तो सीएमओ ने बोर्ड गठित कर विशेषज्ञों को अचानक अस्पताल भेजकर गुलशन के स्वास्थ्य की जांच कराई। सूत्र बताते हैं कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की इस रिपोर्ट में गुलशन फिट बताया गया। यह रिपोर्ट दस मार्च को डीएम इलाहाबाद के साथ एसपी प्रतापगढ़ और जेल अधीक्षक प्रतापगढ़ को भेज दी गई। बावजूद इसके जेल प्रशासन नहीं चेता। रिपोर्ट मिलने के करीब सवा महीने बाद अचानक जेल प्रशासन का सक्रिय होकर बंदी गुलशन को आननफानन में डिस्चार्ज करा जेल ले जाना किसी न किसी गड़बड़ी का संकेत दे रहे हैं।
जेल अधीक्षक प्रतापगढ़, एसआरएन अस्पताल के चिकित्सकों और दोनों जिलों के प्रशासनिक अफसरों की मामले से अनभिज्ञता से कई सवाल उठे हैं। जेल और अस्पताल प्रशासन अपनी गर्दन बचाने के लिए एक-दूसरे पर तोहमत मढ़ रहे हैं। बंदी को फिट बता जेल भेजने संबंधी रिपोर्ट को क्यों दबाया गया, इस बारे में सभी के गोलमोल जवाब हैं। जेल प्रशासन तो मान चुका है कि उसे दस मार्च को भेजी गई रिपोर्ट मिली लेकिन अस्पताल प्रशासन इससे इनकार कर रहा है। एसपी प्रतापगढ़ भी रिपोर्ट न मिलने की बात कह रहे हैं। ऐसे में मामले की बिंदुवार जांच की जाए तो कई चेहरे बेनकाब होंगे और बंदियों को बिना मर्ज अस्पताल भर्ती रखने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकेगी।
- सीएमओ इलाहाबाद की ओर से मेरे पत्र के आधार पर गठित मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट मार्च में मिली थी। उसमें गुलशन का स्वास्थ्य ठीक और उन्हें जेल ले जाने के लिए फिट बताया गया था। तब एसआरएन अस्पताल के एसआईसी से गुलशन को डिस्चार्ज करने के संबंध में मौखिक वार्ता हुई थी, लेकिन उन्होंनेे लेटर न मिलने की वजह से बंदी को डिस्चार्ज करने से असमर्थता जताई थी। अस्पताल की ओर से कोई कार्रवाई न होने के कारण बुधवार को बंदी को अस्पताल से डिस्चार्ज करा जेल में दाखिल करा दिया गया है।
-दिलीप पांडेय - जेल अधीक्षक प्रतापगढ़