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मऊआइमा से एसआरएन तक मचा रहा कोहराम
Updated Sun, 27 May 2018 02:08 AM IST
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मऊआइमा से एसआरएन तक मचा रहा कोहराम
एक साथ पांच घायलों के पहुंचने पर इमरजेंसी में रहा हड़कंप
एक साथ बुलाए गए कई डॉक्टर, नहीं बच सकी भाई लाल की जान
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। मऊआइमा में उस्तरे से हमले की घटना से एसआरएन तक कोहराम मचा रहा। एसआरएन अस्पताल की इमरजेंसी में एक साथ पांच घायलों के पहुंचने पर हड़कंप मच गया। आननफानन में एक साथ कई डॉक्टरों की ड्यूटी भी इमरजेंसी में लगा दी गई। उधर परिजनों की चीख-पुकार से अस्पताल गूंजता रहा। मौके पर एडीजी भी पहुंचे और घायलों के घरवालों से पूछताछ की।
मऊआइमा में एक साथ पांच लोगों के घायल होने की सूचना पर पुलिस में हड़कंप मच गया। मामला दो समुदायों से जुड़ा था, इसलिए अफसरों के होश उड़ गए। एसएसपी नितिन तिवारी समेत कई अफसर जहां मौके पर पहुंच गए तो एसपी सिटी बृजेश कुमार श्रीवास्तव कई थानों की फोर्स लेकर एसआरएन अस्पताल पहुंच गए। यहां एक साथ पांचों घायलों को लाया गया तो हड़कंप मच गया। सभी खून से लथपथ थे और हालात यह थे कि उन्हेें लेकर पहुंचने वाले कुछ पुलिसकर्मियों के भी कपड़े खून से तरबतर हो गए थे। भाईलाल की हालत बेहद गंभीर थी। उसके पेट में गहरा जख्म था और अंदरूनी हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। सूरज के पेट में गहरी चोट थी। इसी तरह मनोज मौर्य के सीने में बांई तरफ, मनोज कुमार के कमर के पिछले हिस्से और नरेंद्र की पीठ में वार किया गया था। उधर हालात की गंभीरता देखते हुए अस्पताल प्रशासन की ओर से भी इमरजेंसी में लगभग एक दर्जन डॉक्टरों को बुला लिया गया। डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया ही था कि भाईलाल की मौत हो गई। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम हाउस भेजवाया गया। कुछ देर बाद एडीजी एसएन साबत भी पहुंच गए। उन्होंने डॉक्टरों से घायलों की हालत के बारे में पूछा और परिजनों से पूछताछ की।
‘साहब एक बार मिलवाय द्या बेटवा से’
झगड़े की खबर मिलने पर घायलों के परिजन भी अस्पताल पहुंच गए। उनकी चीख पुकार से अस्पताल परिसर गूंजता रहा। मृतक भाईलाल की मां अमरावती और बहन गीता बदहवास सी इधर-उधर घूम रही थीं। दरअसल उनकी हालत देखकर पुलिसवाले भी उन्हें भाईलाल की मौत की खबर देने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। अमरावती बार-बार अस्पताल परिसर में खड़े पुलिसवालों से यह कहकर गिड़गिड़ाती रही कि साहब एक बार बेटवा से मिलवाय द्या। पुलिसकर्मी उन्हें यही कहकर दिलासा देते रहे कि सबकुछ ठीक है। हालांकि कुछ देर बाद बेटे की मौत की जानकारी होने पर वह फूट-फूटकर रोने लगी। बहन ननकी देवी का भी रो-रोकर बुरा हाल था।
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हमले में घायल नरेंद्र व मनोज हैं रिश्तेदार
घटना में घायल नरेंद्र व मनोज रिश्तेदार भी हैं। अस्पताल पहुंचे नरेंद्र के परिजनों ने बताया कि मनोज चाचा जबकि नरेंद्र भतीजा है। परिजनों से जब विवाद का कारण पूछा गया तो उन्होंने जानकारी से इंकार कर दिया। नरेंद्र की मां ने बताया कि अचानक बहुत तेजी से शोर हुआ। कुछ देर बाद पुलिस की ढेर सारी गाड़ियां देख गांव के लोगों में दहशत फैल गई। इसके बाद परिवारवाले भागकर मौके पर पहुंचे तो बेटों को लहूलुहान पड़ा देख उनके होश उड़ गए।
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एक साथ पांच घायलों के पहुंचने पर इमरजेंसी में रहा हड़कंप
एक साथ बुलाए गए कई डॉक्टर, नहीं बच सकी भाई लाल की जान
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। मऊआइमा में उस्तरे से हमले की घटना से एसआरएन तक कोहराम मचा रहा। एसआरएन अस्पताल की इमरजेंसी में एक साथ पांच घायलों के पहुंचने पर हड़कंप मच गया। आननफानन में एक साथ कई डॉक्टरों की ड्यूटी भी इमरजेंसी में लगा दी गई। उधर परिजनों की चीख-पुकार से अस्पताल गूंजता रहा। मौके पर एडीजी भी पहुंचे और घायलों के घरवालों से पूछताछ की।
मऊआइमा में एक साथ पांच लोगों के घायल होने की सूचना पर पुलिस में हड़कंप मच गया। मामला दो समुदायों से जुड़ा था, इसलिए अफसरों के होश उड़ गए। एसएसपी नितिन तिवारी समेत कई अफसर जहां मौके पर पहुंच गए तो एसपी सिटी बृजेश कुमार श्रीवास्तव कई थानों की फोर्स लेकर एसआरएन अस्पताल पहुंच गए। यहां एक साथ पांचों घायलों को लाया गया तो हड़कंप मच गया। सभी खून से लथपथ थे और हालात यह थे कि उन्हेें लेकर पहुंचने वाले कुछ पुलिसकर्मियों के भी कपड़े खून से तरबतर हो गए थे। भाईलाल की हालत बेहद गंभीर थी। उसके पेट में गहरा जख्म था और अंदरूनी हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। सूरज के पेट में गहरी चोट थी। इसी तरह मनोज मौर्य के सीने में बांई तरफ, मनोज कुमार के कमर के पिछले हिस्से और नरेंद्र की पीठ में वार किया गया था। उधर हालात की गंभीरता देखते हुए अस्पताल प्रशासन की ओर से भी इमरजेंसी में लगभग एक दर्जन डॉक्टरों को बुला लिया गया। डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया ही था कि भाईलाल की मौत हो गई। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम हाउस भेजवाया गया। कुछ देर बाद एडीजी एसएन साबत भी पहुंच गए। उन्होंने डॉक्टरों से घायलों की हालत के बारे में पूछा और परिजनों से पूछताछ की।
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‘साहब एक बार मिलवाय द्या बेटवा से’
झगड़े की खबर मिलने पर घायलों के परिजन भी अस्पताल पहुंच गए। उनकी चीख पुकार से अस्पताल परिसर गूंजता रहा। मृतक भाईलाल की मां अमरावती और बहन गीता बदहवास सी इधर-उधर घूम रही थीं। दरअसल उनकी हालत देखकर पुलिसवाले भी उन्हें भाईलाल की मौत की खबर देने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। अमरावती बार-बार अस्पताल परिसर में खड़े पुलिसवालों से यह कहकर गिड़गिड़ाती रही कि साहब एक बार बेटवा से मिलवाय द्या। पुलिसकर्मी उन्हें यही कहकर दिलासा देते रहे कि सबकुछ ठीक है। हालांकि कुछ देर बाद बेटे की मौत की जानकारी होने पर वह फूट-फूटकर रोने लगी। बहन ननकी देवी का भी रो-रोकर बुरा हाल था।
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हमले में घायल नरेंद्र व मनोज हैं रिश्तेदार
घटना में घायल नरेंद्र व मनोज रिश्तेदार भी हैं। अस्पताल पहुंचे नरेंद्र के परिजनों ने बताया कि मनोज चाचा जबकि नरेंद्र भतीजा है। परिजनों से जब विवाद का कारण पूछा गया तो उन्होंने जानकारी से इंकार कर दिया। नरेंद्र की मां ने बताया कि अचानक बहुत तेजी से शोर हुआ। कुछ देर बाद पुलिस की ढेर सारी गाड़ियां देख गांव के लोगों में दहशत फैल गई। इसके बाद परिवारवाले भागकर मौके पर पहुंचे तो बेटों को लहूलुहान पड़ा देख उनके होश उड़ गए।