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High Court : धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत दर्ज मुकदमे में कोर्ट ने हस्तक्षेप से किया इन्कार

Wed, 19 Jun 2024 11:24 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 19 Jun 2024 11:24 AM IST
सार

मामले में याची पर दुष्कर्म और यूपी विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप था कि उसका पति अब्दुल रहमान वर्ष 2022 से पीड़िता का पीछा कर रहा था। पीड़िता से दोस्ती कर उसे घर बुलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया।

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Court refuses to intervene in the case registered under anti-conversion law
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 के तहत दर्ज मामले में हस्तक्षेप से कानून अपना उद्देश्य प्राप्त नहीं कर पाएगा। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर व न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने महिला की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।

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मामले में याची पर दुष्कर्म और यूपी विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप था कि उसका पति अब्दुल रहमान वर्ष 2022 से पीड़िता का पीछा कर रहा था। पीड़िता से दोस्ती कर उसे घर बुलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद उसके छोटे भाई ने भी पीड़िता से दुष्कर्म किया। याची पर पीड़िता को इस्लाम धर्म अपनाने और अपने देवर से शादी करने के लिए दबाव बनाने के आरोप में अधिनियम 2021 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

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याची अधिवक्ता ने दलील दी कि पीड़िता के साथ दुष्कर्म का आरोप पुरुषों के खिलाफ है, न कि याची के खिलाफ। याची के खिलाफ लगाए गए आरोप अधिनियम 2021 के तहत सीमित हैं। उसने सिर्फ इस्लाम धर्म अपना कर पति के छोटे भाई से शादी करने की बात कही थी। कोर्ट ने कहा कि अधिनियम 2021 एक नया कानून है, जिसे समाज में व्याप्त एक कुप्रथा को रोकने के लिए विधायिका ने अधिनियमित किया है। यदि इस अधिनियम के तहत प्रारंभिक चरण में अभियोजन में हस्तक्षेप किया जाता है, तो यह अपने उद्देश्य को प्राप्त करने में विफल हो जाएगा। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए मामले में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया।

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