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Prayagraj : विभागीय जांच में दोषमुक्ति के बाद आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग

Thu, 18 Dec 2025 02:01 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 18 Dec 2025 02:01 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी को जिन आरोपों में विभागीय जांच में दोषमुक्त कर दिया गया हो, उन्हीं पर आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

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Continuing criminal proceedings after acquittal in departmental inquiry is an abuse of legal process.
अदालत का आदेश - फोटो : istock

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी को जिन आरोपों में विभागीय जांच में दोषमुक्त कर दिया गया हो, उन्हीं पर आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति समीर जैन की एकल पीठ ने सोनभद्र में ग्राम पंचायत सचिव के पद पर तैनात रहे पार्थ राज सिंह के खिलाफ लंबित आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।

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याची पर आरोप था कि उसने अन्य सह-अभियुक्तों के साथ मिलकर ग्राम पंचायत निधि से ऊंची दरों पर सीमेंट की बेंच खरीदी। वहीं, भुगतान के बावजूद सभी बेंच स्थापित नहीं कराईं। इस संबंध में 2022 में दुद्धी थाने में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम एवं भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी। वहीं, दूसरी ओर विभागीय कार्यवाही भी शुरू हुई थी।
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विभागीय कार्यवाही में याची को दोषमुक्त कर दिया गया, जबकि विवेचना के बाद पुलिस ने ट्रायल कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। इस पर संज्ञान लेकर कोर्ट ने याची को बतौर आरोपी तलब किया। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याची के अधिवक्ता विभु राय ने दलील दी कि जिला विकास अधिकारी, सोनभद्र की ओर से कराई गई विस्तृत विभागीय जांच में आरोप पूरी तरह असिद्ध पाए गए।
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साथ ही याची के विरुद्ध पारित वसूली आदेश भी हाईकोर्ट के आदेश पर रद्द हो चुका है। कोर्ट ने वसूली गई राशि को आठ प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया भी दिया था। उन्हीं आधार पर आपराधिक कार्यवाही जारी है, जो अवैधानिक है। कोर्ट ने याची के विरुद्ध वाराणसी की भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विशेष अदालत में लंबित संपूर्ण आपराधिक कार्यवाही, आरोप पत्र एवं समन आदेश को रद्द कर दिया। 

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