बीडीओ भर्तीः सतर्कता आयोग तक पहुंची शिकायत, भ्रष्टाचार की जताई आशंका
खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) के रिक्त पदों को प्रतिनियुक्ति से भरे जाने के निर्णय को लेकर विवाद बढ़ गया है। मुख्य सचिव के इस आदेश के खिलाफ प्रतियोगी छात्रों ने मोर्चा खोल दिया है। प्रतिनियुक्ति से बीडीओ के पद भरे जाने की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए छात्रों ने केंद्रीय सतर्कता आयोग को पत्र लिखकर अपनी शिकायत दर्ज कराई है। साथ ही मानवाधिकार आयोग को पत्र भेजकर कहा है कि शासन प्रतियोगी छात्रों के अधिकारों का हनन कर रहा है।
मुख्यमंत्री को भी हजारों ट्वीट किए गए हैं और मांग की गई है कि हमेशा की तरह पीसीएस परीक्षा के माध्यम से बीडीओ के पद भरे जाएं। मुख्य सचिव की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि बीडीओ के रिक्त 336 पद प्रतिनियुक्ति से भरे जाएंगे। इसके लिए उत्तर प्रदेश ग्राम्य विकास विभाग राजपत्रित अधिकारी सेवा नियमावली, 1991 में संशोधन का निर्णय लिया गया है।
इस निर्णय के विरोध में हजारों प्रतियोगी छात्रों ने मुख्यमंत्री को ट्वीट कर अपनी शिकायत दर्ज कराई है और उनसे मांग की है कि पूर्व की भांति बीडीओ के रिक्त पदों पर पीसीएस परीक्षा के माध्यम से ही भर्ती की जाए। भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष कौशल सिंह, प्रांतीय सिविल सेवा मार्गदर्शक दुर्गेश त्रिपाठी समेत अन्य छात्रों ने ट्वीट के जरिये इस मामले में मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करने की मांग की है।
वहीं, प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय एवं अन्य छात्रों की ओर से केंद्रीय सतर्कता आयोग को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि एक अगस्त 2017 को शासन की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट तौर पर निर्देश दिए गए थे कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से ही बीडीओ के रिक्त पदों पर भर्ती की जाए। इसके बावजूद पीसीएस-2017, 2018 एवं 2019 की परीक्षा में लिए ग्राम्य विकास विभाग ने आयोग को बीडीओ के पदों का अधियाचन नहीं भेजा।
साथ ही राज्य मानवाधिकार आयुक्त को पत्र लिखकर कहा है कि पीसीएस अभ्यर्थियों के मानवाधिकारों का हनन किय जा रहा है और मांग की है कि इस मामले में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए। साथ ही यह मांग भी की है कि मानवाधिकार आयोग इस प्रकरण की जांच करे, ताकि प्रतियोगी छात्रों को न्याय मिल सके।