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मुआवजा वितरण भी सूखे का शिकार
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 11 Apr 2016 02:24 AM IST
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किसानों को सूखे से राहत दिलाने के लिए शासन से मिली मुआवजे की रकम खुद सूखे का शिकार हो गई। सर्वे के बाद प्रशासन ने तकरीबन 21 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा, जहां से साढ़े पांच करोड़ रुपये बांटने के लिए जारी किए गए। वितरण गिने-चुने क्षेत्रों में हुआ। उन इलाकों के किसानों को मुआवजा वितरण में तरजीह दी गई, जहां सत्ता पक्ष का प्रभाव ज्यादा है। यही हाल पिछले साल अतिवृष्टि के बाद हुआ। डिमांड के मुकाबले मुआवजे की आधी रकम जारी की गई और वह भी चुनिंदा इलाकों में वितरित की गई।
यमुनापार का बड़ा हिस्सा सूखे की चपेट में है। नहरें और तालाब सूख चुके हैं। कोरांव, मांडा, शंकरगढ़, मेजा में किसानों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। सिंचाई विभाग के अफसर भी पानी की पर्याप्त उपलब्धता पर हाथ खड़े कर चुके हैं। यूपी मेें जिन जनपदों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है, उनमें इलाहाबाद भी शामिल है। इलाहाबाद में सूखे से निपटने के लिए तकरीबन 21 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया था। इसमें शासन की ओर से अब तक साढ़े पांच करोड़ रुपये ही जारी किए गए हैं। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक मुआवजे के लिए मिली रकम का बड़ा हिस्सा करछना में वितरित किया गया। हालांकि सूखे के कारण सबसे बदतर हालात कोरांव, शंकरगढ़ सहित मेजा के पठारी इलाकों में हैं। यहां के 90 फीसदी किसानों को मुआवजे का अब तक इंतजार है।
इन इलाकों में रहने वाले किसानों के सिर पर सत्तारूढ़ दल के किसी नेता का हाथ नहीं है, सो किसानों की कोई सुनवाई भी नहीं हो रही है। अफसर भी दबाव में सबसे पहले मुआवजा वहीं बांट रहे हैं, जहां सत्तारूढ़ दल के नेता चाहते हैं। नुकसान का आंकलन सिर्फ सर्वे तक सीमित रहा। मुआवजा वितरण में इस पैमाने को दरकिनार कर दिया गया। यही हालत पिछले साल अतिवृष्टि और ओलावृष्टि में बर्बाद हुई फसलों के मुआवजे को लेकर भी हुआ था। जिला प्रशासन ने मुआवजे के लिए शासन को 165 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा था जबकि मिले थे 72 करोड़ रुपये। आधे किसानों को मुआवजा मिला और आधे इससे वंचित रह गए। साल भर बीत गए और वंचित किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला। किसानों का भरोसा शासन और प्रशासन से उठता जा रहा है। उन्हें लगने लगा है कि पिछले साल की तरह कहीं इस बार भी मुआवजे का इंतजार करने पूरा साल न बीत जाए।
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‘मुआवजा वितरण में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है। मुआवजे की बाकी रकम जल्द मिलने की उम्मीद है। शासन से रकम जारी होते ही चयनित किसानों को मुआवजा दे दिया जाएगा।’ राम सहाय यादव, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी
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यमुनापार का बड़ा हिस्सा सूखे की चपेट में है। नहरें और तालाब सूख चुके हैं। कोरांव, मांडा, शंकरगढ़, मेजा में किसानों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। सिंचाई विभाग के अफसर भी पानी की पर्याप्त उपलब्धता पर हाथ खड़े कर चुके हैं। यूपी मेें जिन जनपदों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है, उनमें इलाहाबाद भी शामिल है। इलाहाबाद में सूखे से निपटने के लिए तकरीबन 21 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया था। इसमें शासन की ओर से अब तक साढ़े पांच करोड़ रुपये ही जारी किए गए हैं। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक मुआवजे के लिए मिली रकम का बड़ा हिस्सा करछना में वितरित किया गया। हालांकि सूखे के कारण सबसे बदतर हालात कोरांव, शंकरगढ़ सहित मेजा के पठारी इलाकों में हैं। यहां के 90 फीसदी किसानों को मुआवजे का अब तक इंतजार है।
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इन इलाकों में रहने वाले किसानों के सिर पर सत्तारूढ़ दल के किसी नेता का हाथ नहीं है, सो किसानों की कोई सुनवाई भी नहीं हो रही है। अफसर भी दबाव में सबसे पहले मुआवजा वहीं बांट रहे हैं, जहां सत्तारूढ़ दल के नेता चाहते हैं। नुकसान का आंकलन सिर्फ सर्वे तक सीमित रहा। मुआवजा वितरण में इस पैमाने को दरकिनार कर दिया गया। यही हालत पिछले साल अतिवृष्टि और ओलावृष्टि में बर्बाद हुई फसलों के मुआवजे को लेकर भी हुआ था। जिला प्रशासन ने मुआवजे के लिए शासन को 165 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा था जबकि मिले थे 72 करोड़ रुपये। आधे किसानों को मुआवजा मिला और आधे इससे वंचित रह गए। साल भर बीत गए और वंचित किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला। किसानों का भरोसा शासन और प्रशासन से उठता जा रहा है। उन्हें लगने लगा है कि पिछले साल की तरह कहीं इस बार भी मुआवजे का इंतजार करने पूरा साल न बीत जाए।
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‘मुआवजा वितरण में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है। मुआवजे की बाकी रकम जल्द मिलने की उम्मीद है। शासन से रकम जारी होते ही चयनित किसानों को मुआवजा दे दिया जाएगा।’ राम सहाय यादव, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी