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मनमानी कर रहे सीआईएसर्सीई स्कूल, कोई अंकुश नहीं

Wed, 06 Apr 2016 02:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Wed, 06 Apr 2016 02:02 AM IST
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Cisce school are arbitrary , not hook
स्कूल फीस में बढ़ोत्तरी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
शहर के कान्वेंट स्कूलों में प्रत्येक वर्ष फीस वृद्धि, किताबों संग ड्रेस, टाई, जूते बदलने के अतिरिक्त सभी सामग्री को चुनिंदा दुकानों से ही खरीदने के मामले में तमाम कोशिशों के बावजूद कोई अंकुश नहीं लग रहा है। स्थानीय स्तर पर नियंत्रण के लिए कोई प्राधिकारी नहीं होने पर ऐसे स्कूलों की मनमानी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
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शहर में सरकारी स्कूलों के मुकाबले सीआईएससीई से मान्यता प्राप्त मिशनरी स्कूलों की संख्या लगातार बढ़ती गई। फिलहाल सीआईएससीई से जुड़े सेंट जोसफ स्कूल एवं कॉलेज, सेंट मैरी कान्वेंट इंटर कॉलेज, ब्वायज हाईस्कूल एंड कॉलेज, गर्ल्स हाईस्कूल, होली ट्रिनिटी स्कूल, बिशप जॉनसन स्कूल एंड कॉलेज (ब्वायज एंड गर्ल्स विंग अलग-अलग), मेरी लुकस स्कूल, आईपीईएम इंटरनेशनल स्कूल, बेनहर स्कूल एंड कॉलेज आदि संचालित हैं।
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ऐसे स्कूलों में फीस तय करने सहित किताबों को लागू करने के लिए कोई नियम नहीं होने से अभिभावक अपनी बात लेकर किसी सक्षम अधिकारी के पास शिकायत नहीं कर सकते हैं। मिशनरी स्कूलों का नियंत्रण लखनऊ ऐंग्लो इंडियन स्कूल विभाग के पास है। इसका प्रभारी जिला विद्यालय निरीक्षक स्तर का अधिकारी होता है। लोगों को  जानकारी न होने से अभिभावक परेशान रहते हैं।
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शहर के तथाकथित इन अच्छे स्कूलों में प्रवेश को लेकर मानक इतने कड़े हैं कि अभिभावक, इनके कैंपस में प्रवेश से हिचकते हैं। ऐसे स्कूल एक ही दिन फार्म का वितरण करते हैं और उसी दिन फार्म पूरा करके विद्यालयों में जमा करने होते हैं। सीआईएससीई से जुड़े एक बड़े स्कूल में इस वर्ष वार्षिक फीस में लगभग 650 रुपये की बढ़ोतरी करने के साथ छोटे बच्चों के ड्रेस भी बदल दिए गए। किताबें भी उनके कैंपस के बीच स्थित बुक सेंटर से खुलेआम बिक रही हैं। अभिभावकों को प्रवेश के साथ ड्रेस के लिए तय दुकानों की पर्ची पकड़ाई जा रही है।
0 हर्षमणि त्रिपाठी, अभिभावक

शहर में संचालित हो रहे सीआईएससीई से जुड़े स्कूल एवं कॉलेजों में कक्षाओं में छात्र-छात्राओं की संख्या तय नहीं है। क्लासरूम में बच्चे किसी प्रकार से बैठ पाते हैं। एक कक्षा में 60 से 65 विद्यार्थी बैठते हैं। वहीं शिक्षकों को मनमाने तरीके से सप्ताह भर में 32 पीरियड पढ़ाना होता है जबकि मानक 22 से अधिक का नहीं है।
0 रामजी पांडेय, अभिभावक

शहर के नामी स्कूलों में बच्चों को स्कूल लाने और ले जाने के लिए कोई वाहन की व्यवस्था नहीं की गई है। यह काम निजी वाहन करते हैं जिन पर स्कूल वालों का नियंत्रण नहीं होने से बच्चों को परेशानी होती है। स्कूल वाले उनके बच्चों को ढोने के नाम पर वाहन मालिकों से कमीशन भी वसूल करते हैं।

0 अजय जायसवाल, अभिभावक

सीआईएससीई और सीबीएसई स्कूलों की मनमानी पर नियंत्रण के लिए 2009 में शासन की ओर से जिला स्तर के अधिकारियों की एक कमेटी बनाई गई थी। इस कमेटी का संयोजक जिला विद्यालय निरीक्षक को बनाया गया था। हाईकोर्ट की ओर से इस पर रोक लगाए जाने के बाद उनके हाथ बंधे हैं। फिलहाल जिले में माध्यमिक शिक्षा विभाग का मुखिया होने के कारण समय-समय पर जिलाधिकारी अथवा किसी वरिष्ठ अधिकारी की ओर से इन स्कूलों के बारे में जानकारी मांगे जाने के बाद वह अपनी रिपोर्ट देते हैं। इन विद्यालयों के निगरानी की जिम्मेदारी जिला प्रशासन के जिम्मे है।
0 कोमल यादव, जिला विद्यालय निरीक्षक, इलाहाबाद
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