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चिन्मय मिशन : अमृत महोत्सव की मांगलिक यात्रा का सहभागी और साक्षी बना महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर विद्यालय

Thu, 13 Aug 2026 09:13 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 13 Aug 2026 09:13 PM IST
सार

वेदांत मर्मज्ञ स्वामी चिन्मयानंद के द्वारा प्रतिष्ठापित भारतीय ज्ञान, वेदांत के पवित्र संदेश व मानव सेवा के लिए प्रतिबद्ध चिन्मय मिशन के गौरवशाली 75 वर्ष पूर्ण होने के पावन अवसर को "अमृत महोत्सव" के रूप में मनाया गया।

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Chinmaya Mission: Maharshi Patanjali Vidya Mandir became a participant and witness to the auspicious journey
एएमए में आयोजित चिन्मय मिशन के कार्यक्रम में बोलते स्वामी मित्रानंद। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

वेदांत मर्मज्ञ स्वामी चिन्मयानंद के द्वारा प्रतिष्ठापित भारतीय ज्ञान, वेदांत के पवित्र संदेश व मानव सेवा के लिए प्रतिबद्ध चिन्मय मिशन के गौरवशाली 75 वर्ष पूर्ण होने के पावन अवसर को "अमृत महोत्सव" के रूप में मनाया गया। इसी क्रम में 35,000 किलोमीटर की अखिल भारतीय अमृत यात्रा का शुभागमन प्रयागराज में हुआ। जिसका भव्य स्वागत महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर समूह की ओर से किया गया।

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चिन्मय मिशन के स्वामी मित्रानंद जी और स्वामी अभेदानंद जी के नेतृत्व व दिशा-निर्देश में पूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद जी तथा बस वाहिनी पर पवित्र स्मृति-चिह्नों 'चरण-पादुका व प्रतिमा' के साथ आध्यात्मिक उन्नति व आत्मकल्याण की भावना से अनुप्राणित 'अमृत यात्रा' का यह  ऐतिहासिक क्षण अभूतपूर्व था। यात्रा के साथ ‘प्रदर्शनी बस भी थी। जिसमें गुरुदेव के जीवन, कार्य एवं चिन्मय मिशन की 75 वर्षों की दिव्य आध्यात्मिक यात्रा को दर्शाया गया था।
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गीता के ज्ञान प्रचार प्रसार में संलग्न है चिन्मय मिशन

सन 1951 में स्थापित चिन्मय मिशन एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संगठन है। विश्व भर में व्याप्त यह वर्षों से भारतीय वेदांत और श्रीमद्भगवद्गीता के अलौकिक ज्ञान के प्रचार-प्रसार में संलग्न है। 'अमृत यात्रा' के पवित्र संकल्प के साक्षी-सहभागी बनते हुए विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने मंत्रोच्चार, शंखनाद, पुष्पगुच्छ एवं पवित्र कलश के मांगलिक वातावरण में पूज्य स्वामी चिन्मयानंद जी के स्मृति-चिह्नों का पूजन-अर्चन कर अपनी श्रद्धा प्रकट की। गुरु-वंदना व श्रीमद्भगवद्गीता के पवित्र स्वरों से वहाँ उपस्थित सभी का मन भक्ति और आध्यात्मिक चेतना से अभिभूत हो उठा।
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कार्यक्रम के दूसरे चरण में सायं 5 बजे एएमए हॉल स्टैनली रोड में महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने चिन्मय मिशन के गणमान्य अतिथियों का परंपरागत रूप से आतिथ्य-सत्कार करते हुए श्रीमद्भगवद्गीता के शाश्वत ज्ञान और पूज्य स्वामी चिन्मयानंद जी के जीवन-दर्शन को समर्पित सांस्कृतिक संध्या 'अमृतांजलि' का भव्य आयोजन किया। इस पुण्य बेला में स्वामी मित्रानंद जी, स्वामी अभेदानंद जी, ब्रह्मचारी सुधीर चैतन्य जी, ब्रह्मचारिणी तारिणी चैतन्य जी, ब्रह्मचारिणी शाश्वती चैतन्य जी, युवा वीर,  महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर विद्यालय समूह के कोषाध्यक्ष श्री रवीन्द्र गुप्ता जी,  निदेशक श्री यशोवर्धन गुप्ता जी , निदेशक रेखा वैद्य, महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर विद्यालय समूह के प्रधानाचार्य, शिक्षकगण, छात्र समूह मौजूद रहे। 

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एएमए में आयोजित चिन्मय मिशन के कार्यक्रम में प्रस्तुति देते बच्चे। - फोटो : अमर उजाला।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुरू हुआ कार्यक्रम

सांध्यकालीन 'अमृतांजलि' कार्यक्रम का शुभारंभ चिन्मय मिशन प्रयागराज के प्रमुख स्वामी मित्रानंद जी एवं स्वामी अभेदानन्द जी ने दीप प्रज्ज्वलन तथा वैदिक मंत्रोच्चार से किया। दीप प्रज्वलन के पश्चात प्रथम पूजित,विघ्नहर्ता श्री गणपति जी की स्तुति से संपूर्ण सभागार भक्तिमय हो उठा। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय संस्कृति के गौरव, आध्यात्मिक चेतना, श्रीमद्भगवद्गीता के जीवनोपयोगी मूल्यों से नई पीढ़ी को परिचित कराना व उन्हें प्रेरित करना था। चिन्मय नवीन सेवाश्रम न्यास, प्रयागराज की अध्यक्ष , चिन्मय मिशन प्रयागराज की उपाध्यक्ष और महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर विद्यालय समूह की सचिव डॉक्टर कृष्णा गुप्ता ने गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद जी का स्मरण करते हुए विस्तार पूर्वक स्वामी चिन्मयानंद के द्वारा अभिसिंचित चिन्मय मिशन के उद्देश्यों को स्पष्ट किया।

उन्होंने बताया कि पूज्य गुरुदेव ने वैज्ञानिक चेतना के आलोक में वेदांत के गहन ज्ञान को जन - जन तक पहुंचाने की दिव्य साधना की है और आज उनका यह संकल्प विश्व व्यापी होकर एक अभियान, एक परिवार , एक विश्व का पर्याय बन गया है । विद्यालय परिवार की ज्येष्ठ सदस्य होने तथा चिन्मय मिशन प्रयागराज की अध्यक्षा के रूप डॉक्टर कृष्णा गुप्ता जी ने हृदय पूर्वक  मुख्य अतिथि के रूप में विराजमान पूज्य स्वामी मित्रानंद जी एवं पूज्य स्वामी अभेदानंद जी  चिन्मय  मिशन के अन्य गणमान्य अतिथियों एवं भक्तों का स्वागत करते हुए कहा कि अमृत महोत्सव का हिस्सा बनना महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर विद्यालय समूह का सौभाग्य है।

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एएमए में आयोजित चिन्मय मिशन के कार्यक्रम में मौजूद अतिथिगण। - फोटो : अमर उजाला।
चरैवेति चरैवेति को जीवन में परिभाषित करने पर जोर
 

स्वामी मित्रानंद ने अपने उद्बोधन विषय "ओ ! ट्रैवलर, यात्री चरैवेति" के माध्यम से वेदांत के इस  सूत्र को स्पष्ट करते हुए कहा कि चरैवेति’ का निहितार्थ केवल निरंतर चलते रहने तक सीमित नहीं है, अपितु यह मनुष्य को उसके सकारात्मक लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सतत कर्मशील और संघर्षशील रहने का संदेश देता है। जीवन की विषम परिस्थितियाँ, अवरोध व असफलताएं व्यक्ति की परीक्षा लेती हैं लेकिन उसे अपने ध्येय-पथ से विचलित नहीं होना चाहिए। निरंतर प्रयास और पुरुषार्थ के द्वारा ही व्यक्ति अपनी अंतर्निहित क्षमताओं का विकास कर सकता है। जीवन को सार्थक बना सकता है। अतः ‘चरैवेति’ जीवन की निरंतर प्रगतिशील यात्रा का प्रतीक है—रुको नहीं, थको नहीं, निरंतर अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होते रहो। इसी क्रम में विद्यालय निदेशक श्री यशोवर्धन गुप्ता जी ने स्वामी अभेदानन्द जी को पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया।

इसी क्रम में पूज्य स्वामी अभेदानंद जी ने अपने संबोधन विषय  "स्वामी चिन्मयानंद- द मैन मास्टर एंड द मिशन" के अंतर्गत आध्यात्मिक संस्था चिन्मय मिशन के संस्थापक के रूप में पूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद के व्यक्तित्व, कृतित्व व आध्यात्मिक वृत्त से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि कठोर तपश्चर्या, तितिक्षा व त्यागपूर्वक की गई साधना से ही गुरुदेव को स्वामी चिन्मयानंद की परम पदवी प्राप्त हुई। पूज्य स्वामी अभेदानन्द जी ने स्पष्ट किया कि परमपूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद जी का जीवन नि:स्वार्थ सेवा, करुणा का प्रतीक है। ईश्वर पर गहरी आस्था मनुष्य को निर्भय बनाती है ; आत्मनियंत्रण मनुष्य को सरल व सहज बनाता है । कार्यक्रम का समापन चिन्मय मिशन की ब्रह्मचारिणी शाश्वती जी के आभार ज्ञापन करते हुए गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद जी के आदर्शों पर चलने के लिए प्रेरित किया।

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