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तीन साल में छपरा तक दौड़ेगी इलेक्ट्रिक ट्रेन
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Sat, 24 Jan 2015 01:44 AM IST
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इलाहाबाद। संगम नगरी से पूर्वांचल को जाने वाली ज्यादातर ट्रेनें तीन साल बाद विद्युतीकृत मार्ग से दौड़ने लगेंगी। इलाहाबाद से झूंसी होते हुए वाराणसी-औड़िहार-छपरा तक रेलमार्ग को पिछले रेल बजट में विद्युतीकृत करने का ऐलान हुआ था। रेल विकास निगम लिमिटेड के हिस्से आए इस कार्य को जल्द शुरू करने और तेजी से पूरा कराने का रेलवे पर जबरदस्त दबाव है। प्रोजेक्ट पर करीब 280 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है। मोदी सरकार यह दिखाना चाहती है कि उसके दौर में हुई घोषणाओं पर तेजी से अमल हो रहा है। पुरानी कई योजनाओं में पांच-छह साल पहले हुई घोषणा के बाद भी ट्रेनें दौड़ नहीं पा रही हैं।
इलाहाबाद से छपरा का यह रेलमार्ग रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा के गृह जनपद गाजीपुर से होकर निकलता है। रेलवे में चर्चा है कि रेल राज्यमंत्री के प्रयास से ही यह प्रोजेक्ट स्वीकृत हुआ है। सो, जुलाई के रेल बजट में घोषणा होने के पांच महीने के अंदर यह प्रोजेक्ट टेंडर प्रक्रिया के स्तर पर आ गया। पहले रेल बजट में घोषणा के डेढ़ से दो साल बाद मौके पर कार्य शुरू होते रहे हैं। इसके कारण रेल विद्युतीकरण की परियोजनाएं पिछड़ती रही हैं। फिलहाल, रेल मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट को रेल विकास निगम को सौंपा है। निगम ने प्रोजेक्ट के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। निगम के अफसर बताते हैं कि कार्य जल्दी पूरा हो, इसके लिए प्रोजेक्ट को दो सेक्शन में बांटा गया है। पहला सेक्शन छपरा से औड़िहार और दूसरा सेक्शन औड़िहार से इलाहाबाद जंक्शन का है।
प्रोजेक्ट में पड़ने वाले छपरा और वाराणसी जैसे बड़े स्टेशन पहले ही विद्युतीकृत हैं। कार्य को जल्द पूरा करने में इसका भी फायदा मिलेगा। रेल मंत्रालय ने दोनों सेक्शन के कार्य तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य दिया है। इस रूट के विद्युतीकृत होने के बाद इलाहाबाद से वाराणसी के लिए दूसरे और सबसे नजदीकी रूट से चलने वाली डेढ़ दर्जन यात्री ट्रेनों को फायदा मिलेगा।
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इलाहाबाद से छपरा का यह रेलमार्ग रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा के गृह जनपद गाजीपुर से होकर निकलता है। रेलवे में चर्चा है कि रेल राज्यमंत्री के प्रयास से ही यह प्रोजेक्ट स्वीकृत हुआ है। सो, जुलाई के रेल बजट में घोषणा होने के पांच महीने के अंदर यह प्रोजेक्ट टेंडर प्रक्रिया के स्तर पर आ गया। पहले रेल बजट में घोषणा के डेढ़ से दो साल बाद मौके पर कार्य शुरू होते रहे हैं। इसके कारण रेल विद्युतीकरण की परियोजनाएं पिछड़ती रही हैं। फिलहाल, रेल मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट को रेल विकास निगम को सौंपा है। निगम ने प्रोजेक्ट के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। निगम के अफसर बताते हैं कि कार्य जल्दी पूरा हो, इसके लिए प्रोजेक्ट को दो सेक्शन में बांटा गया है। पहला सेक्शन छपरा से औड़िहार और दूसरा सेक्शन औड़िहार से इलाहाबाद जंक्शन का है।
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प्रोजेक्ट में पड़ने वाले छपरा और वाराणसी जैसे बड़े स्टेशन पहले ही विद्युतीकृत हैं। कार्य को जल्द पूरा करने में इसका भी फायदा मिलेगा। रेल मंत्रालय ने दोनों सेक्शन के कार्य तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य दिया है। इस रूट के विद्युतीकृत होने के बाद इलाहाबाद से वाराणसी के लिए दूसरे और सबसे नजदीकी रूट से चलने वाली डेढ़ दर्जन यात्री ट्रेनों को फायदा मिलेगा।
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