{"_id":"5f68e16a67b85a43a51c48af","slug":"challenge-of-nsa-in-allahabad-high-court-of-accused-in-attack-on-scsc-colony","type":"story","status":"publish","title_hn":"अनुसूचित जाति की बस्ती पर हमले के आरोपी की रासुका निरूद्धि को चुनौती ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अनुसूचित जाति की बस्ती पर हमले के आरोपी की रासुका निरूद्धि को चुनौती
Mon, 21 Sep 2020 10:52 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 21 Sep 2020 10:52 PM IST
विज्ञापन
हाईकोर्ट
- फोटो : file photo
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जौनपुर के सराय बक्सा थाना क्षेत्र में आम तोड़ने के विवाद पर दो समुदायों के बीच हुए सांप्रदायिक झगड़े में रासुका निरुद्धि के खिलाफ याचिका पर राज्य सरकार से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। याचिका की अगली सुनवाई 12अक्टूबर के सप्ताह में होगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर तथा न्यायमूर्ति सुभाष चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने जावेद सिद्दीकी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया है । याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता दयाशंकर मिश्र व चंद्रकेश मिश्र ने बहस की।
सराय बक्शा में एक समुदाय के लोगों द्वारा अनुसूचित जाति की बस्ती पर हमला करने का आरोप है। इस मामले में 37 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। याची को भी 10 जून को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इन पर गिरोहबंद कानून लगाया गया है। याची अधिवक्ता का कहना है कि याची को जमानत मिलने के बाद जिलाधिकारी ने 10 जुलाई को रासुका लगा दी।
विज्ञापन
जिसे चुनौती दी गई है। याची अधिवक्ता का कहना है कि याची का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। जमानत मिलने पर जेल से बाहर आने से रोकने के लिए रासुका लगाई गई है। याची को रासुका लगाने संबंधी दस्तावेज नहीं दिए जा रहे हैं। इस आधार पर निरुद्धि रद्द की जाए। दोनों पक्षों को सुनकर कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
विज्ञापन
यह आदेश न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर तथा न्यायमूर्ति सुभाष चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने जावेद सिद्दीकी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया है । याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता दयाशंकर मिश्र व चंद्रकेश मिश्र ने बहस की।
विज्ञापन
सराय बक्शा में एक समुदाय के लोगों द्वारा अनुसूचित जाति की बस्ती पर हमला करने का आरोप है। इस मामले में 37 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। याची को भी 10 जून को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इन पर गिरोहबंद कानून लगाया गया है। याची अधिवक्ता का कहना है कि याची को जमानत मिलने के बाद जिलाधिकारी ने 10 जुलाई को रासुका लगा दी।
विज्ञापन
जिसे चुनौती दी गई है। याची अधिवक्ता का कहना है कि याची का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। जमानत मिलने पर जेल से बाहर आने से रोकने के लिए रासुका लगाई गई है। याची को रासुका लगाने संबंधी दस्तावेज नहीं दिए जा रहे हैं। इस आधार पर निरुद्धि रद्द की जाए। दोनों पक्षों को सुनकर कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है।