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चैत्र नवरात्रि 2022 : रत्नजड़ित आभूषणों से दुर्गा के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्चारिणी की सजी झांकियां

Mon, 04 Apr 2022 12:00 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 04 Apr 2022 12:00 AM IST
सार

मीरापुर स्थित महाशक्ति पीठ मां कल्याणी देवी के मंदिर में वासंतिक नवरात्र की द्वितीया यानी रविवार को भक्तों की भीड़ भोर में ही उमड़ पड़ी। मंगला आरती के बाद सुबह पांच बजे मां के कपाट खुलने के साथ ही दर्शन आरंभ हो गया।

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Chaitra Navratri 2022: The tableaux of Mother Brahmacharini, the second form of Durga, adorned with gem-studded ornaments
Prayagraj News : कल्याणी देवी शक्तिपीठ। - फोटो : प्रयागराज

वासंतिक नवरात्र की द्वितीया को देवी मंदिरों में नौ रूपों वाली मां दुर्गा के द्वितीय मां ब्रह्मचारिणी स्वरूप की झांकियों के दर्शन के लिए आस्थावानों का हुजूम उमड़ पड़ा। देवी मंदिरों में मां ब्रह्मचारिणी की झांकी के दर्शन के लिए भीड़ इस कदर उमड़ी कि लंबी कतारें लग गईं और मंदिर परिसर में खड़ा होने की भी जगह नहीं बची। इस दौरान फूलों और ध्वजा-पताकाओं से सजे मंदिरों में जगत जननी के जयकारे गूंजते रहे।




मीरापुर स्थित महाशक्ति पीठ मां कल्याणी देवी के मंदिर में वासंतिक नवरात्र की द्वितीया यानी रविवार को भक्तों की भीड़ भोर में ही उमड़ पड़ी। मंगला आरती के बाद सुबह पांच बजे मां के कपाट खुलने के साथ ही दर्शन आरंभ हो गया। द्वितीया को मां ब्रह्मचारिणी स्वरूप में मां की झांकी सजाई गई। फूलों और रत्नजड़ित आभूषणों से मां के शृंगार की झलक पाकर भक्त निहाल होते रहे।

Chaitra Navratri 2022: The tableaux of Mother Brahmacharini, the second form of Durga, adorned with gem-studded ornaments
Prayagraj News : ललिता देवी शक्तिपीठ। - फोटो : प्रयागराज

देर रात तक मंदिरों में रही भीड़़

मां ब्रह्मचारिणी स्वरूप में भव्य शृंगार का दर्शन शाम छह बजे से मध्य रात्रि एक बजे तक चलता रहा। मां तप मुद्रा में अपने हाथों में कमंडल और जप माला धारण किए हुए दर्शन दे रही थीं। गर्भ गृह का शृंगार रंग-बिरंगे पुष्पों से किया गया। मां की महाआरती शात बजे घंटे-घड़ियाल के साथ की गई। इस दौरान मंदिर परिसर में बच्चों के मुंडन संस्कार भी होते रहे।


इसी तरह शक्तिपीठ मां ललिता देवी की भी ब्रह्मचारिणी स्वरूप में रत्नजड़ित आभूषणों और रंग-बिरंगे फूलों से झांकी सजाई गई। मंगला आरती के बाद दिन भर मां के दर्शन का सिलसिला चलता रहा। इस दौरान मंदिर में दुर्गा सप्तशती के पाठ, शतचंडी पाठ के अलावा कई अनुष्ठान होते रहे। जगह-जगह जप और ध्यान में साधक लीन नजर आए। भोर से लेकर रात तक देवी दर्शन, पूजन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।

Chaitra Navratri 2022: The tableaux of Mother Brahmacharini, the second form of Durga, adorned with gem-studded ornaments
Prayagraj News : अलोपशंकरी शक्तिपीठ। - फोटो : प्रयागराज

अलोपीबाग मंदिर में हुआ पूजन

मंदिर समिति के अध्यक्ष हरिमोहन वर्मा, महामंत्री धीरज नागर सुमित श्रीवास्तव के अलावा कई पदाधिकारियों ने मंदिर में सहज दर्शन की व्यवस्था संभाली। इसी तरह अलोपीदेवी स्थित मां अलोपशंकरी देवी मंदिर में द्वितीया को दर्शन, पूजन के लिए भोर से ही श्रद्धालुओं का तांता लग गया। मंदिर परिसर में जगह-जगह अनुष्ठान होते रहे गए। गर्भगृह परिसर और पालकी को रंग-बिरंगे फूलों से भव्यता से सजाया गया। इस दौरान मां के जयकारे गूंजते रहे।

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Chaitra Navratri 2022: The tableaux of Mother Brahmacharini, the second form of Durga, adorned with gem-studded ornaments
Prayagraj News : ललिता देवी शक्तिपीठ। - फोटो : प्रयागराज

चंद्र किरणों के समान मन को शांति पहुंचाती है राम कथा

वृंदावन से आए संत राजेंद्र महाराज ने रविवार को भगवान राम के आदर्शों की कथा को गुणों की खान बताया। उन्होंने तुलसी की चौपाई- रामकथा शशि किरन समाना... की व्याख्या की। बताया कि रामकथा चंद्रमा की किरणों के समान मन को शांति पहुंचाने वाली होती है। इसलिए भगवान राम के आदर्श चरित्र को सुनने का अवसर कभी हाथ से निकलने नहीं देना चाहिए।  


नव संवत्सर मानस समिति की ओर से आयोजित रामकथा में मानस मर्मज्ञ पं. राजेंद्र महाराज ने भगवान राम के गुणों का विस्तार वर्णन किया। बताया कि त्रेता युग में भगवान शिव स्वयं माता सती के साथ ऋषि कुम्भज के पास राम कथा सुनने के लिए गए थे। तब कुम्भज ऋषि ने भगवान राम की कथा को चंद्रमा की किरणों के समान शांति देने वाली बताया था।


राम का गुणानुवाद मन, आत्मा और चित्त को शांति और शीतलता प्रदान करता है। भगवान राम कथा सुनने से मन के सभी विकार मिट जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस दौर में समाज में सुख-शांति और आपसी प्रेम की स्थापना सिर्फ रामकथा के अनुसरण से ही हो सकती है। मानस समिति के संयोजक पं. सुशील पाठक ने व्यास पीठ की पूजा की। उन्होंने बताया कि 10 अप्रैल तक शाम 7:30 से 11:00 बजे तक राम कथा होगी।

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Chaitra Navratri 2022: The tableaux of Mother Brahmacharini, the second form of Durga, adorned with gem-studded ornaments
Prayagraj News : अलोपशंकरी शक्तिपीठ। - फोटो : प्रयागराज

लोक मानस में पूजी जाने वाली देवियों पर रचे गीत अनुकरणीय

चाहे कुल देवी हों या ग्राम देवी या फिर नगर देवी। लोक मानस में रची-बसी ऐसी देवियों पर लोक कलाकार उदय चंद्र परदेसी की रचित लोक गीतों की पुस्तक का रविवार को हिंदुस्तानी एकेडेमी में किया गया। बतौर मुख्य अतिथि सांसद केशरी देवी पटेल ने इस पुस्तक को आने वाली पीढ़ियों के लिए वरदान बताया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी सभ्यता के अंधानुकरण से जहां संस्कार धूमिल होते जा रहे है, वहीं गांव से लेकर शहर तक में पूजा जाने वाली देवियों से परिचित होने के साथ ही उनकी महिमा से जुड़ने का लोगों को अवसर मिल सकेगा। 


लोक गायक उदय चंद्र परदेसी ने इस पुस्तक में कुल देवी, ग्राम देवी, नगर देवी, राज्य देवी के अलावा अलग-अलग राज्यों असम, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, पंजाब, महाराष्ट्र, बिहार, मध्यप्रदेश के लोक मानस में रची-बसी देवियों की महिमा का गीतों के जरिए गुणगान किया है। इसमें कुल 111 लोकगीत हैं। इस मौके पर परदेसी ने जल्द आने वाली अपनी दूसरी पुस्तक का भी जिक्र किया।


उन्होंने बताया कि जन्म से मृत्यु तक के संस्कारों पर आधारित पारंपरिक लोक गीतों की उनकी दूसरी किताब बी जल्द ही आने वाली है। इसमें संस्कारों के अलावा व्रत, पर्व, त्योहार, श्रम लोक गीत, मौसम संबंधी लोक गीत शामिल हैं।


इस मौके पर भोजपुरी संगम पत्रिका के अजीत सिंह, सरस्वती पत्रिका के संपादक रविनंदन सिंह, गीतकार यश मालवीय, आकाशवाणी इलाहाबाद के केंद्र निदेशक लोकेश शुक्ला, शिव मंगल मानव ने भी इस पुस्तक को सराहा। संचालन वंदना शुक्ला ने किया। इस दौरान राजेश कुमार गुप्ता, अंशुला सिंह, प्रतिमा मिश्रा, कमला देवी, धर्मेंद्र कुमार ने लोकगीतों की प्रस्तुतियों से मन मोह लिया। ढोलक पर राजेंद्र प्रसाद, पैड पर सुनील मिश्रा, बैंजो पर धर्मेंद्र कुमार, हारमोनियम पर संतोष पांडेय ने संगत की।  

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