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कोरोना से लड़ने में मददगार साबित हो सकती है अजवाइन
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कोरोना वायरस के संक्रमण से लड़ने में अजवाइन मददगार साबित हो सकती है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ साइंस एंड सोसाइटी के समन्वयक डॉ. रोहित कुमार मिश्र ने अपने एक शोध के बाद यह दावा किया है। उनके मुताबिक अजवाइन में कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता तेजी से बढ़ाते हैं।
डॉ. रोहित का कहना है कि भारत में प्राचीन समय से मसालों का प्रयोग हर्बल मेडिसिन के रूप में होता रहा है। अजवाइन के एसेंशियल ऑयल में थाइमोल नामक कंपाउंड पाया जाता है, जिसकी मात्रा 39.2 फीसदी होती है। यह कंपाउंड वाइरसरोधी है और फेफड़ों को मजबूत बनाता है। कोविड-19 श्वसन संबंधी रोग है। इससे बचने के लिए अजवाइन की भाप का इस्तेमाल किया जा सकता है, जो सीधे श्वसन मार्ग से फेफड़ों में जाकर इस संक्रमण में लड़ने में मददगार साबित हो सकती है। इसके लिए अजवाइन को बंद ढक्कन वाले बर्तन में उबाल लें और इससे बनी भाप को रोज सुबह और शाम लें। हो सके तो तुलसी के दो पत्तों को भी उबालते समय डाल लें। इस प्रक्रिया को स्वस्थ मनुष्य भी कर सकता है।
डॉ. रोहित के मुताबिक अजवाइन के वायरस रोधी गुणों को विश्व की कई प्रसिद्ध वैज्ञानिक पत्रिकाओं में भी प्रकाशित किया जा चुका है। डॉ. रोहित ने अजवाइन के गुणों पर एंटरो वायरस के ऊपर आरटी पीसीआर की सहायता से अध्ययन किया जो काफी असरदार रहा। डॉ. रोहित का इससे पहले भी श्वसन संबंधी शोध पत्र विश्व की प्रतिष्ठित पत्रिका बायोमैटेरिल्य एल्सिवियर इंपैक्ट फैक्टरी 10.2 में प्रकाशित हो चुका है और उनके नाम एक भारतीय पेटेंट भी है, जो 2017 में मिला।
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डॉ. रोहित का कहना है कि भारत में प्राचीन समय से मसालों का प्रयोग हर्बल मेडिसिन के रूप में होता रहा है। अजवाइन के एसेंशियल ऑयल में थाइमोल नामक कंपाउंड पाया जाता है, जिसकी मात्रा 39.2 फीसदी होती है। यह कंपाउंड वाइरसरोधी है और फेफड़ों को मजबूत बनाता है। कोविड-19 श्वसन संबंधी रोग है। इससे बचने के लिए अजवाइन की भाप का इस्तेमाल किया जा सकता है, जो सीधे श्वसन मार्ग से फेफड़ों में जाकर इस संक्रमण में लड़ने में मददगार साबित हो सकती है। इसके लिए अजवाइन को बंद ढक्कन वाले बर्तन में उबाल लें और इससे बनी भाप को रोज सुबह और शाम लें। हो सके तो तुलसी के दो पत्तों को भी उबालते समय डाल लें। इस प्रक्रिया को स्वस्थ मनुष्य भी कर सकता है।
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डॉ. रोहित के मुताबिक अजवाइन के वायरस रोधी गुणों को विश्व की कई प्रसिद्ध वैज्ञानिक पत्रिकाओं में भी प्रकाशित किया जा चुका है। डॉ. रोहित ने अजवाइन के गुणों पर एंटरो वायरस के ऊपर आरटी पीसीआर की सहायता से अध्ययन किया जो काफी असरदार रहा। डॉ. रोहित का इससे पहले भी श्वसन संबंधी शोध पत्र विश्व की प्रतिष्ठित पत्रिका बायोमैटेरिल्य एल्सिवियर इंपैक्ट फैक्टरी 10.2 में प्रकाशित हो चुका है और उनके नाम एक भारतीय पेटेंट भी है, जो 2017 में मिला।
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