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प्रो. रज्जू राज्य विवि : राज्य विश्वविद्यालय में नए सत्र से सीबीसीएस पाठ्यक्रम
Sun, 10 Oct 2021 10:27 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 10 Oct 2021 10:27 PM IST
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प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विश्वविद्यालय
- फोटो : prayagraj
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प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विश्वविद्यालय में नए सत्र 2021-22 से सीबीसीएस आधारित पाठ्यक्रम लागू किए जाएंगे। रविवार को विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार सिंह ने सभी 638 संघटक महाविद्यालयों के प्राचार्यों एवं शिक्षकों के साथ बैठक कर इस बारे में
दिशा-निर्देश जारी किए और विस्तृत चर्चा की।
कुलपति ने सीबीसीएस आधारित पाठ्यक्रम के संचालन और छात्रों के सतत मूल्यांकन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने सीबीसीएस आधारित पाठ्यक्रम में प्रश्नपत्रों की संख्या, माइनर व मेजर प्रश्नपत्र के साथ व्यावसायिक प्रश्नपत्रों एवं उनके क्रेडिट्स के बारे में बताया। उन्होंने
सतत मूल्यांकन प्रणाली एवं परीक्षा प्रणाली के बारे में भी बताया।
सतत मूल्यांकन से विद्यार्थियों को होने वाले लाभ, सतत मूल्यांकन की प्रक्रिया, थ्योरी एवं प्रायोगिक परीक्षाओं के अंकों के बारे में भी जानकारी दी। कुलपति ने पूरे सत्र का अकादमिक कैलेंडर भी साझा किया। शोध निदेशक प्रो. विवेक कुमार सिंह ने शोध प्रस्ताव तैयार करने एवं उनको शासन को भेजने की प्रक्रिया के बारे में बताया।
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कुलपति ने राजकीय/अनुदानित महाविद्यालयों में शोध कराने के लिए शोध केंद्र बनाए जाने और महाविद्यालयों को शोध केंद्र के लिए जल्द से जल्द प्रस्ताव भेजने के लिए कहा, ताकि महाविद्यालयों में पीएचडी के लिए शोध कार्य शीघ्र शुरू किए जा सकें। बैठक में कुलसचिव एसके शुक्ला समेत प्रो. अर्चना चंद्रा, प्रो. राजकुमार गुप्त, डॉ. अविनाश कुमार, डॉ. अतुल कुमार वर्मा, डॉ. महविश अंजुम, डॉ. गौतम कोहली आदि मौजूद रहे।
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दिशा-निर्देश जारी किए और विस्तृत चर्चा की।
कुलपति ने सीबीसीएस आधारित पाठ्यक्रम के संचालन और छात्रों के सतत मूल्यांकन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने सीबीसीएस आधारित पाठ्यक्रम में प्रश्नपत्रों की संख्या, माइनर व मेजर प्रश्नपत्र के साथ व्यावसायिक प्रश्नपत्रों एवं उनके क्रेडिट्स के बारे में बताया। उन्होंने
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सतत मूल्यांकन प्रणाली एवं परीक्षा प्रणाली के बारे में भी बताया।
सतत मूल्यांकन से विद्यार्थियों को होने वाले लाभ, सतत मूल्यांकन की प्रक्रिया, थ्योरी एवं प्रायोगिक परीक्षाओं के अंकों के बारे में भी जानकारी दी। कुलपति ने पूरे सत्र का अकादमिक कैलेंडर भी साझा किया। शोध निदेशक प्रो. विवेक कुमार सिंह ने शोध प्रस्ताव तैयार करने एवं उनको शासन को भेजने की प्रक्रिया के बारे में बताया।
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कुलपति ने राजकीय/अनुदानित महाविद्यालयों में शोध कराने के लिए शोध केंद्र बनाए जाने और महाविद्यालयों को शोध केंद्र के लिए जल्द से जल्द प्रस्ताव भेजने के लिए कहा, ताकि महाविद्यालयों में पीएचडी के लिए शोध कार्य शीघ्र शुरू किए जा सकें। बैठक में कुलसचिव एसके शुक्ला समेत प्रो. अर्चना चंद्रा, प्रो. राजकुमार गुप्त, डॉ. अविनाश कुमार, डॉ. अतुल कुमार वर्मा, डॉ. महविश अंजुम, डॉ. गौतम कोहली आदि मौजूद रहे।