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प्रोफेसर गुंजन की मौत का मामला : कमरे में बंद जिंदगी, कराह सुनने वाला कोई नहीं

Mon, 14 Sep 2026 03:01 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 14 Sep 2026 03:01 PM IST
सार

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग की प्रोफेसर गुंजन सुशील की मौत ने शहर में अकेले रह रहे बुजुर्गों की जिंदगी और उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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Case of Professor Gunjan's death: A life confined to the room, with no one to hear the groans.
गुंजन सुशील। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग की प्रोफेसर गुंजन सुशील की मौत ने शहर में अकेले रह रहे बुजुर्गों की जिंदगी और उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के लिए पुलिस का सवेरा अभियान हर अकेले बुजुर्ग तक नहीं पहुंच सका है। साफ है बुजुर्गों के लिए अकेलापन मुसीबत साबित हो रहा है। अकेले रहने वालों की जिंदगी कमरे में बंद रहती है। जरूरत पर उनकी कराह सुनने वाला कोई नहीं मिलता।

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सवेरा अभियान की शुरुआत वर्ष 2019 में हुई थी। जिले में 600 से अधिक बुजुर्ग सवेरा पोर्टल पर पंजीकृत भी हैं। इसके बावजूद जिले में अब तक सिर्फ 67 बुजुर्गों ने अपनी समस्या साझा की। इस व्यवस्था में पुलिस को यह भी सुनिश्चित करना होता है कि पंजीकृत बुजुर्गाें से संपर्क स्थापित कर समय-समय पर उनका हाल भी जानें। पुलिस के आला अफसरों के लिए पड़ताल का विषय ये भी है कि क्या प्रोफेसर गुंजन सुशील सवेरा पोर्टल पर पंजीकृत थीं। स्थानीय पुलिस ने उनका हाल जाना था?
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पुलिस के मुताबिक, पता चला है कि बीमार गुंजन शुक्रवार रात दवा खाकर कमरे में सोईं थीं। सुबह खाना बनाने के लिए मेड आई और आवाज लगाई। भीतर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। दरवाजा तोड़कर पुलिस अंदर पहुंची तो उनकी मौत हो चुकी थी। प्रोफेसर गुंजन सुशील के पति स्वर्गीय मनोज वर्मा सीएमएस पद पर कार्यरत थे। करीब दो वर्ष पहले बीमारी से उनका निधन हो गया था।
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इकलौती बेटी समृद्धि राय और दामाद हितेश राय के मुताबिक, उनकी मां गुंजन सुशील कैंट के मुन्ना हाता में घर में अकेली रहती थीं। बेटी और दामाद के अलावा उनका कोई और नहीं था। मां को खांसी, जुकाम के साथ सांस लेने में भी परेशानी थी। नौकर और खाना बनाने वाली मेड उनकी बराबर निगरानी कर रही थी। शुक्रवार की रात मेड मां को खाना और दवा खिलाकर अपने घर चली गई थी। रात में उनकी देखभाल के लिए कोई नहीं था।

रिश्तों में दूरी बढ़ने से मदद पहुंचने में होती है देरी

शहर में ऐसे कई बुजुर्ग दंपती और वरिष्ठ नागरिक अकेले रह रहे हैं, जिनके बच्चे नौकरी, कारोबार और रोजी-रोटी के सिलसिले में दूसरे शहरों में रहते हैं। कुछ परिवारों में रिश्तों की दूरी भी बुजुर्गों को अकेलेपन के हवाले कर देती है। दिन में किसी तरह समय गुजर जाता है, लेकिन रात का सन्नाटा उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। कई घरों में बुजुर्गों का सहारा केवल घरेलू सहायिका, पड़ोसी या कभी-कभार फोन करने वाले रिश्तेदार होते हैं। अचानक तबीयत बिगड़ने, गिर जाने या किसी आपात स्थिति में मदद पहुंचने में देरी जानलेवा साबित हो सकती है।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए जरूरी हैं ये हेल्पलाइन

डीसीपी सिटी सागर जैन ने बताया कि शहर में वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और सहायता के लिए आपात स्थिति में हेल्पलाइन नंबर 112 और 14567 नंबर उपयोगी हैं। गंभीर संकट या तत्काल पुलिस सहायता के लिए 112 पर कॉल करें। वहीं, 14567 एल्डरलाइन के माध्यम से दुर्व्यवहार, कानूनी सहायता, पेंशन संबंधी जानकारी और भावनात्मक सहयोग प्राप्त किया जा सकता है। यह टोल फ्री हेल्पलाइन सुबह आठ से रात आठ बजे तक संचालित होती है। पुलिस की सवेरा योजना के तहत बुजुर्ग 112 पर पंजीकरण कराकर विशेष सुरक्षा निगरानी का लाभ भी ले सकते हैं। वरिष्ठ नागरिकों से अपील है कि वे परेशानी छिपाने के बजाय हेल्पलाइन पर संपर्क कर अपनी समस्या जरूर साझा करें।

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