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प्रयागराज : एक किमी पहले रुकती थी कार, सुनसान पगडंडी से फैक्टरी पहुंचते थे तस्कर, अवैध ड्रग फैक्टरी का मामला

Sat, 05 Sep 2026 05:20 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 05 Sep 2026 05:20 PM IST
सार

शहर से करीब 68 किमी और मांडा थाने से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर बसा है कोसड़ा कला से लगा उंचडीह गांव। यहां पहुंचने के बाद जैसे-जैसे आगे बढ़ते हैं, आबादी पीछे छूटती जाती है।

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Car used to stop a kilometer away; smugglers would reach the factory via a deserted trail
इसी टिनशेड में चल रहा था नशे का कारोबार। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

शहर से करीब 68 किमी और मांडा थाने से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर बसा है कोसड़ा कला से लगा उंचडीह गांव। यहां पहुंचने के बाद जैसे-जैसे आगे बढ़ते हैं, आबादी पीछे छूटती जाती है। पहाड़ियों के बीच संकरा और सुनसान रास्ता, दूर-दूर तक खेत और जंगल। न दुकान, न बाजार और न ही लोगों की आवाजाही। इसी वीरान रास्ते के आखिरी छोर पर करीब तीन बीघे खेत के बीच एक टिनशेड बना था। पहली नजर में इसे देखकर किसी को भी शक नहीं होगा कि यहां अरबों रुपये के सिंथेटिक ड्रग का कारोबार संचालित होता होगा।

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खास बात यह कि यहां पहुंचने से करीब एक किलोमीटर पहले ही चार पहिया वाहन रोकना पड़ता है। पगडंडी से पैदल या साइकिल से ही लोग टिनशेड वाली जगह पर पहुंच सकते हैं। तस्कर भी यहां पहुंचने के लिए पैदल ही जाते थे। फैक्टरी की बनावट और सजावट ऐसी कि किसी की नजर पड़े तो यह नर्सरी लगे। आसपास रंग-बिरंगे फूल-पौधे नर्सरी जैसा माहौल दर्शा रहे थे।
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ग्रामीणों के मुताबिक, अंधेरा होने पर कभी-कभार यहां आवाजाही दिखाई देती थी। कुछ लोग पहले चार पहिया वाहन से आते थे। वाहन करीब एक किलोमीटर पहले रुकता था। इसके बाद लोग पैदल खेत की तरफ जाते थे। ये लोग कौन थे, कहां से आते थे, इसका किसी को कुछ नहीं पता रहता था। सूत्रों के मुबातिक, इस ठिकाने पर लगातार गतिविधि नहीं होती थी।
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कच्चा माल कैसे पहुंचता था?

पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि कच्चा माल और दूसरे सामान कैसे संकरे रास्ते से फैक्टरी तक पहुंचाए जाते थे। सामान लाने और ले जाने में कौन-कौन लोग शामिल थे? माल कहां से आता था यह भी जांच का विषय है।

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