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जागी पुलिस, परिजनों-पड़ाेसी से फिर हुई पूछताछ
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प्रयागराज। अल्लापुर में मासूम दीपक के कत्ल के मामले में मंगलवार को जार्जटाउन पुलिस नींद से तो जागी लेकिन, उसकी कार्रवाई महज पीड़ित के परिजनों को थाने बुलाने तक ही सीमित रही। परिवार का आरोप है कि थाने में दो घंटे तक बैठाए रखने के बाद बिना बातचीत किए ही उन्हें वापस भेज दिया गया। हालांकि पुलिस का दावा है कि न सिर्फ परिजनों बल्कि संदिग्ध पड़ोसियों से भी पूछताछ की गई।
अल्लापुर के संजय नगर में सात नवंबर की शाम नर्सरी में पढ़ने वाले दीपक (5) की घर से कुछ दूर पर ही गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस अब तक खुलासा नहीं कर सकी है। मासूम की हत्या जैसे गंभीर मामले को लेकर पुलिस कितनी गंभीर है, इसका पता इसी से चलता है कि कई बार थाने का चक्कर काटने के बावजूद परिजनों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कॉपी तक नहीं दी गई। जार्जटाउन पुलिस के रवैये से परेशान परिजनों ने आपबीती बयां की तो अमर उजाला ने इस संबंध में प्रमुखता से खबर भी प्रकाशित की। खबर छपने के बाद पुलिस की नींद तो टूटी लेकिन, उसकी कार्रवाई महज खानापूर्ति तक ही सीमित रही। मंगलवार को एक बार फिर पीड़ित परिवार को थाने बुलाया गया। हालांकि, दो घंटे तक बैठाए रखने के बावजूद उनसे कोई बातचीत नहीं की गई और उन्हें वापस भेज दिया गया।
सूत्रों की मानें तो जार्जटाउन थाने के एक दरोगा ने मृतक बच्चे के चाचा एमएनएनआईटी में संविदा कर्मचारी दिनेश को फोन कर थाने बुलाया। उससे यह भी कहा गया कि वह अपने बेटे सूरज को भी थाने लेकर आए, केस के सिलसिले में बातचीत की जानी है। जिस पर शाम चार बजे के करीब दीपक, सूरज व मृत बच्चे की दादी सुमन थाने पहुंची। जहां उनसे कहा गया कि इंस्पेक्टर साहब के आने के बाद बातचीत की जाएगी। लेकिन दो घंटे तक बैठे रहने के बाद भी न ही इंस्पेक्टर थाने आए और न ही परिजनों से कोई बातचीत हुई। जिसके बाद वह वापस लौट गए। परिजनों का कहना है कि पुलिस का यही रवैया उनका दर्द और बढ़ा रहा है।
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खानापूर्ति था मकसद
पुलिस ने जिस तरह पहले परिजनों को बुलाया और फिर दो घंटे बाद उन्हें बिना बातचीत किए छोड़ दिया, उससे यह भी चर्चा है कि जार्जटाउन पुलिस का मकसद महज खानापूर्ति करना था। ऐसा न होता तो पुलिस थाने में बैठकर तफ्तीश करने की बजाय मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल करती। हालांकि इंस्पेक्टर सुनील कुमार सिंह का दावा है कि मंगलवार को न सिर्फ बच्चे के परिजनों से बातचीत की गई। बल्कि परिजनों के बताने के अनुसार पड़ोस में रहने वाले दंपति से भी पूछताछ की गई। लेकिन उनका कहना है कि फिलहाल कोई ऐसा क्लू नहीं मिला है,जिससे हत्यारे का पता चल सके। जांच की जा रही है।
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अल्लापुर के संजय नगर में सात नवंबर की शाम नर्सरी में पढ़ने वाले दीपक (5) की घर से कुछ दूर पर ही गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस अब तक खुलासा नहीं कर सकी है। मासूम की हत्या जैसे गंभीर मामले को लेकर पुलिस कितनी गंभीर है, इसका पता इसी से चलता है कि कई बार थाने का चक्कर काटने के बावजूद परिजनों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कॉपी तक नहीं दी गई। जार्जटाउन पुलिस के रवैये से परेशान परिजनों ने आपबीती बयां की तो अमर उजाला ने इस संबंध में प्रमुखता से खबर भी प्रकाशित की। खबर छपने के बाद पुलिस की नींद तो टूटी लेकिन, उसकी कार्रवाई महज खानापूर्ति तक ही सीमित रही। मंगलवार को एक बार फिर पीड़ित परिवार को थाने बुलाया गया। हालांकि, दो घंटे तक बैठाए रखने के बावजूद उनसे कोई बातचीत नहीं की गई और उन्हें वापस भेज दिया गया।
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सूत्रों की मानें तो जार्जटाउन थाने के एक दरोगा ने मृतक बच्चे के चाचा एमएनएनआईटी में संविदा कर्मचारी दिनेश को फोन कर थाने बुलाया। उससे यह भी कहा गया कि वह अपने बेटे सूरज को भी थाने लेकर आए, केस के सिलसिले में बातचीत की जानी है। जिस पर शाम चार बजे के करीब दीपक, सूरज व मृत बच्चे की दादी सुमन थाने पहुंची। जहां उनसे कहा गया कि इंस्पेक्टर साहब के आने के बाद बातचीत की जाएगी। लेकिन दो घंटे तक बैठे रहने के बाद भी न ही इंस्पेक्टर थाने आए और न ही परिजनों से कोई बातचीत हुई। जिसके बाद वह वापस लौट गए। परिजनों का कहना है कि पुलिस का यही रवैया उनका दर्द और बढ़ा रहा है।
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खानापूर्ति था मकसद
पुलिस ने जिस तरह पहले परिजनों को बुलाया और फिर दो घंटे बाद उन्हें बिना बातचीत किए छोड़ दिया, उससे यह भी चर्चा है कि जार्जटाउन पुलिस का मकसद महज खानापूर्ति करना था। ऐसा न होता तो पुलिस थाने में बैठकर तफ्तीश करने की बजाय मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल करती। हालांकि इंस्पेक्टर सुनील कुमार सिंह का दावा है कि मंगलवार को न सिर्फ बच्चे के परिजनों से बातचीत की गई। बल्कि परिजनों के बताने के अनुसार पड़ोस में रहने वाले दंपति से भी पूछताछ की गई। लेकिन उनका कहना है कि फिलहाल कोई ऐसा क्लू नहीं मिला है,जिससे हत्यारे का पता चल सके। जांच की जा रही है।