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कटान से पांटून पुल को खतरा
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 16 Dec 2016 01:41 AM IST
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- फोटो : फाइल फोटो
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गंगा में लगातार तेजी से हो रहे कटान के कारण माघ मेले के आयोजन पर संकट मंडराने लगा है। कटान के कारण महावीर मार्ग के पांटून पुल के लिए खतरा बढ़ गया है। सिंचाई विभाग कटान को रोक पाने में अब तक नाकामयाब है। अगर यही हालत रही तो अन्य पांटून पुलों के निर्माण में भी देरी होगी और इससे मेले से जुड़े काम भी प्रभावित होते रहेंगे।
सबसे खराब स्थिति महावीर मार्ग और जगदीश रैम्प के आसपास है। वहां प्रतिदिन दस फीट जमीन कटान की भेंट चढ़ जा रही है। यह स्थिति तीन दिनों से बनी हुई है। सिंचाई विभाग तमाम प्रयासों के बावजूद इस पर काबू नहीं पा सका है। अगर कटान ऐसे ही जारी रहा और वक्त रहते इस पर नियंत्रण नहीं हुआ तो मेला शुरू होने तक महावीर से संगम तक जमीन का बड़ा हिस्सा गंगा में डूब जाएगा और जिन संस्थाओं को इस हिस्से में जमीन आवंटित हो चुकी हैं, उन्हें शिविर लगाने के लिए मेले में इधर-उधर भटकना पड़ेगा। कटान के कारण मेला प्रशासन को जमीन आवंटन में भी दिक्कत झेलनी पड़ रही है।
खाक चौक को हर साल 135 बीघा जमीन आवंटित की जाती है।
उसके हिस्से की अब तक 35 बीघा जमीन कटान की भेंट चढ़ चुकी है। मेला प्रशासन के अफसर अब इस चिंता में हैं कि खाक चौक के लिए 35 बीघा जमीन का इंतजाम कहां से किया जाए। इस पर निर्णय लेने के लिए 16 दिसंबर को मेला प्रशासन में बैठक बुलाई गई है। इस बीच महावीर मार्ग पर कटान तेजी से बढ़ने के कारण वहां बने पांटून पुल पर खतरा बढ़ गया है। पुल को बचाने के लिए एक किनारे पर बालू से भरी बोरियां रख दी गई हैं लेकिन स्थिति पर पूरी तरह से काबू नहीं पाया जा सका है। अगर कटान लगातार जारी रहा तो किनारे पर लगे पीपे अपनी जगह से खिसक सकते हैं और पुल को नुकसान पहुंच सकता है।
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मेला प्रशासन की ओर से बृहस्पतिवार को भी मेला क्षेत्र में संस्थाओं को जमीन का आवंटन किया गया। महावीर मार्ग पर 98, सरस्वती मार्ग पर 14 और संगम अपर मार्ग पर 19 संस्थाओं को जमीन आवंटित की गई। 16 दिसंबर को रामानुज मार्ग पर संस्थाओं को जमीन का आवंटन किया जाएगा।
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सबसे खराब स्थिति महावीर मार्ग और जगदीश रैम्प के आसपास है। वहां प्रतिदिन दस फीट जमीन कटान की भेंट चढ़ जा रही है। यह स्थिति तीन दिनों से बनी हुई है। सिंचाई विभाग तमाम प्रयासों के बावजूद इस पर काबू नहीं पा सका है। अगर कटान ऐसे ही जारी रहा और वक्त रहते इस पर नियंत्रण नहीं हुआ तो मेला शुरू होने तक महावीर से संगम तक जमीन का बड़ा हिस्सा गंगा में डूब जाएगा और जिन संस्थाओं को इस हिस्से में जमीन आवंटित हो चुकी हैं, उन्हें शिविर लगाने के लिए मेले में इधर-उधर भटकना पड़ेगा। कटान के कारण मेला प्रशासन को जमीन आवंटन में भी दिक्कत झेलनी पड़ रही है।
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खाक चौक को हर साल 135 बीघा जमीन आवंटित की जाती है।
उसके हिस्से की अब तक 35 बीघा जमीन कटान की भेंट चढ़ चुकी है। मेला प्रशासन के अफसर अब इस चिंता में हैं कि खाक चौक के लिए 35 बीघा जमीन का इंतजाम कहां से किया जाए। इस पर निर्णय लेने के लिए 16 दिसंबर को मेला प्रशासन में बैठक बुलाई गई है। इस बीच महावीर मार्ग पर कटान तेजी से बढ़ने के कारण वहां बने पांटून पुल पर खतरा बढ़ गया है। पुल को बचाने के लिए एक किनारे पर बालू से भरी बोरियां रख दी गई हैं लेकिन स्थिति पर पूरी तरह से काबू नहीं पाया जा सका है। अगर कटान लगातार जारी रहा तो किनारे पर लगे पीपे अपनी जगह से खिसक सकते हैं और पुल को नुकसान पहुंच सकता है।
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मेला प्रशासन की ओर से बृहस्पतिवार को भी मेला क्षेत्र में संस्थाओं को जमीन का आवंटन किया गया। महावीर मार्ग पर 98, सरस्वती मार्ग पर 14 और संगम अपर मार्ग पर 19 संस्थाओं को जमीन आवंटित की गई। 16 दिसंबर को रामानुज मार्ग पर संस्थाओं को जमीन का आवंटन किया जाएगा।