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High Court : बुंदेलखंड के डीएम 20 साल का सर्वे कर बताएं, कितने तालाब गायब व कितने मौजूद
Sat, 23 Aug 2025 03:34 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 23 Aug 2025 03:34 PM IST
सार
Bundelkhand News : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुंदेलखंड के सात जिलों झांसी, ललितपुर, बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर और जालौन के जिलाधिकारियों को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है।
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अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुंदेलखंड के सात जिलों झांसी, ललितपुर, बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर और जालौन के जिलाधिकारियों को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। कोर्ट ने कहा है कि 1359 फसली से 20 साल तक का जिलाधिकारी सर्वे कर बताएं कि कितने तालाब मौजूद हैं और कितने गायब हो गए। यह भी बताएं कि तालाबों के गायब होने का कारण क्या है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की एकलपीठ ने शुक्रवार को जनहित याचिका पर दिया।
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याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एक रिपोर्ट में पाया कि बुंदेलखंड में लगभग 4250 तालाब गायब हैं। कोर्ट ने रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका पंजीकृत करने का आदेश दिया। साथ ही अधिवक्ता प्रदीप कुमार सिंह और एससी वर्मा को न्यायमित्र नियुक्त किया।
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शुक्रवार को न्यायमित्र अधिवक्ता ने दलील दी कि चित्रकूट जिले के मऊ तहसील, गांव रामाकोल में तालाब और भीटा की जमीन चकबंदी में लोगों को आवंटित कर दी गई। इससे बड़ी संख्या में गांवों में तालाब गायब हैं। उन्होंने कोर्ट से जल जीवन मिशन व मनरेगा के तहत बनाए गए तालाबों की अलग से जानकारी मांगने की प्रार्थना की। इस पर कोर्ट ने सात जिलों के डीएम को नोटिस जारी कर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों का सर्वे करने और गायब व मौजूद तालाबों के संबंध में विस्तृत जानकारी व्यक्तिगत हलफनामा के साथ प्रस्तुत करने का आदेश दिया। कोर्ट ने अगली तिथि 17 सितंबर नियत की है।
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