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High Court : सुनवाई का अवसर दिए बिना बुलडोजर कार्रवाई प्राकृतिक न्याय का घोर उल्लंघन, ध्वस्तीकरण पर लगाई रोक

Fri, 21 Mar 2025 11:54 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 21 Mar 2025 11:54 AM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, बिना नोटिस व सुनवाई का अवसर दिए बुलडोजर कार्रवाई प्राकृतिक न्याय का घोर उल्लंघन है। यह टिप्पणी कर कोर्ट ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की ओर से जारी ध्वस्तीकरण आदेश को रद्द कर दिया।

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Bulldozer action without giving an opportunity to be heard is a gross violation of natural justice, stay on de
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, बिना नोटिस व सुनवाई का अवसर दिए बुलडोजर कार्रवाई प्राकृतिक न्याय का घोर उल्लंघन है। यह टिप्पणी कर कोर्ट ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की ओर से जारी ध्वस्तीकरण आदेश को रद्द कर दिया।

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यह आदेश न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता, न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने कृष्णवीर और एक अन्य की याचिका स्वीकार करते हुए दिया। गाजियाबाद निवासी याची का बसंतपुर सैंथली में मकान है। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने यूपी शहरी नियोजन और विकास अधिनियम के तहत याची को 13 अक्तूबर 2023 को नोटिस जारी किया कि उनका निर्माण अवैध है। उसे 25 दिनों के अंदर हटा लिया जाए। पूर्व में उन्हें सुनवाई का अवसर दिया गया। लेकिन, उन्होंने इस अवसर का लाभ नहीं लिया। याची ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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याची के आधिवक्ता कृष्णकांत दुबे, संतोष कुमार दुबे ने दलील दी कि याची का मकान ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता है। उन्हें बिना नोटिस व सुनवाई का अवसर दिए प्राधिकरण ने बेदखली आदेश पारित कर दिया। सात मार्च 2025 को बुलडोजर लेकर मौके पर प्राधिकरण के कर्मचारी पहुंचे तो उन्हें इसकी जानकारी हुई।
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कोर्ट ने कहा, विवादित ध्वस्तीकरण ओदश में कारण बताओ नोटिस जारी करने की तिथि का उल्लेख नहीं है। यह भी नहीं बताया गया है कि याची का पक्ष कब सुना गया। कब उसे नोटिस जारी किया गया। साथ ही इस पर भी कोई विचार नहीं किया गया कि याची के मकान का निर्माण उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन और विकास अधिनियम के प्रावधान के तहत विकास प्राधिकरण के क्षेत्र में आने से पहले किया गया था। कोर्ट ने 13 अक्तूबर 2023 के विवादित आदेश को रद्द कर दिया।

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