फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   BNS-BNSS: Challenged the legality of Indian Judicial Code and Indian Civil Defence Code

BNS-BNSS : भारतीय न्याय संहिता और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता को वैधानिकता को दी चुनौती

Sat, 26 Apr 2025 11:25 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 26 Apr 2025 11:25 AM IST
सार

भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की सांविधानिकता को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता और न्यायमूर्ति हरवीर सिंह की खंडपीठ कर रही है।

विज्ञापन
BNS-BNSS: Challenged the legality of Indian Judicial Code and Indian Civil Defence Code
अदालत (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की सांविधानिकता को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता और न्यायमूर्ति हरवीर सिंह की खंडपीठ कर रही है।

विज्ञापन

आगरा निवासी सूरजपाल सिंह ने याचिका दाखिल की है। इसमें उन्होंने कहा कि नई संहिताएं जीवन संरक्षण के मौलिक अधिकारों का हनन करती हैं। दंड की अवधारणा संविधान के अनुच्छेद-21 में प्रयुक्त शब्द विधि के अंतर्गत नहीं आती, इसलिए यह असांविधानिक हैं और यह संहिताएं कानून का रूप नहीं ले सकतीं। बीएनएस और बीएनएसएस सभी व्यक्तियों के जीवन संरक्षण में विफल हैं।

विज्ञापन


दंड की अवधारणा अवैज्ञानिक, असुधारवादी और अन्यायपूर्ण हैं। यह तानाशाही और गुलामी को बढ़ावा देती हैं। ताकतवर से कमजोर की रक्षा नहीं करती है। याचिका में यह भी कहा गया है कि अपराध करने वाले व्यक्तियों को दंड स्वरूप जेल भेजने के बजाय सुधार गृहों में भेजा जाना चाहिए। अपराधी को सुधारने के लिए सरकार को अपनी सोच व अपनी व्यवस्था को भी सुधारना होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

आईपीसी व सीआरपीसी को दे भी चुके हैं चुनौती

याचिकाकर्ता सूरजपाल सिंह ने बताया कि आईपीसी और सीआरपीसी को भी सुप्रीम कोर्ट में सन 2024 में चुनौती दी थी, जहां सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट में पक्ष रखने की सलाह दी। इसके बाद हाईकोर्ट में मई 2024 में याचिका दाखिल की। याचिका जुलाई में लिस्ट हुई। इस दौरान भारत सरकार ने आईपीसी की जगह बीएनएस और सीआरपीसी की जगह बीएनएसएस को लागू कर दिया। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि नए कानून अब लागू हो गए हैं। इनसे कोई शिकायत है तो दोबारा कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं। इसके बाद अब नई याचिका दाखिल कर बीएनएस और बीएनएसएस को चुनौती दी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed