{"_id":"5aa97cc44f1c1ba6758b56b7","slug":"bjp-fails-in-the-rehearsal-of-mission-2013-ignoring-the-neglect-of-people","type":"story","status":"publish","title_hn":"अपनों की उपेक्षा से मिशन-2019 के पूर्वाभ्यास में भाजपा हुई फेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अपनों की उपेक्षा से मिशन-2019 के पूर्वाभ्यास में भाजपा हुई फेल
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 15 Mar 2018 01:29 AM IST
विज्ञापन
इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
फूलपुर लोक सभा सीट पर उप चुनाव के जरिए मिशन-2019 के पूर्वाभ्यास में फेल हुई भाजपा अब हार के कारणों की तलाश में जुट गई है। इसके लिए जल्द ही संगठन की बैठक बुलाई जाएगी। फिलहाल इस पराजय के पीछे कार्यकर्ताओं की उपेक्षा को बड़ा कारण माना जा रहा है। इसके अलावा टिकट बंटवारे में सामंजस्य का अभाव, प्रचार में स्थानीय नेताओं को दर किनार किया जाना और सीएम योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय की चुनावी जन सभाओं का संचालन बाहर से आए नेताओं को सौंपा जाना भी भाजपा की नाव डुबोने में मददगार बनी।
उप चुनाव को लेकर अंत तक जीत के प्रति आश्वस्त रही भाजपा अब इसके पीछे की खामियों को जानने की कोशिश करेगी। संसदीय चुनाव प्रभारी और प्रदेश महामंत्री गोविंद शुक्ला कहते हैं कि हार के कारणों की समीक्षा के लिए जल्द ही संगठन की बैठक बुलाई जाएगी। इसकी गहराई से पड़ताल होगी । वह कहते हैं कि कार्यकर्ताओं को तो लगाया गया था, लेकिन सपा-बसपा गठबंधन फैक्टर ने ज्यादा प्रभावित किया। इलाहाबाद के संगठन प्रभारी विद्यासागर राय स्वीकार करते हैं कि सिर्फ बड़ी सभाएं और बैठकें होती रहीं। स्थानीय स्तर पर छोटी, छोटी नुक्कड़ सभाएं होनी चाहिए थीं। उप चुनाव होने की वजह से प्रचार-प्रसार भी जिस तरह होना चाहिए था नहीं हो सका। बाहरी नेताओं को ज्यादा तरजीह देने के सवाल पर वह कहते हैं कि पूर्वांचल में सिर्फ इसी सीट पर चुनाव हो रहा था, इसलिए आसपास के जनपदों के नेता यहां आ गए थे।
भाजपा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष दिवाकर नाथ त्रिपाठी इस हार को सीधे तौर पर कार्यकर्ताओं की अनदेखी मान रहे हैं। उनका कहना है कि टिकट बंटवारे में स्थानीय नेताओं से सलाह तक नहीं ली गई। बाहरी प्रत्याशी लाए जाने से कार्यकर्ता नाराज थे। इसके अलावा स्थानीय नेताओं को प्रचार में लगाया ही नहीं गया। सीएम की जन सभाओं का संचालन सोनभद्र(राबर्ट्सगंज) के विधायक भूपेश चौबे को सौंपा गया था। इसी तरह प्रदेश अध्यक्ष की हुई पांच सभाओं में से चार का संचालन कोरांव के बब्बू राम द्विवेदी को दिया गया, जो शहर दक्षिणी में रहते हैं। इसी तरह प्रदेश अध्यक्ष की सुलेम सराय में हुई सभा का संचालन सुल्तानपुर के निवासी क्षेत्रीय महामंत्री राम चंद्र मिश्र से कराया गया। इस तरह लगातार की गई उपेक्षा से स्थानीय कार्यकर्ता नाराज थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
उप चुनाव को लेकर अंत तक जीत के प्रति आश्वस्त रही भाजपा अब इसके पीछे की खामियों को जानने की कोशिश करेगी। संसदीय चुनाव प्रभारी और प्रदेश महामंत्री गोविंद शुक्ला कहते हैं कि हार के कारणों की समीक्षा के लिए जल्द ही संगठन की बैठक बुलाई जाएगी। इसकी गहराई से पड़ताल होगी । वह कहते हैं कि कार्यकर्ताओं को तो लगाया गया था, लेकिन सपा-बसपा गठबंधन फैक्टर ने ज्यादा प्रभावित किया। इलाहाबाद के संगठन प्रभारी विद्यासागर राय स्वीकार करते हैं कि सिर्फ बड़ी सभाएं और बैठकें होती रहीं। स्थानीय स्तर पर छोटी, छोटी नुक्कड़ सभाएं होनी चाहिए थीं। उप चुनाव होने की वजह से प्रचार-प्रसार भी जिस तरह होना चाहिए था नहीं हो सका। बाहरी नेताओं को ज्यादा तरजीह देने के सवाल पर वह कहते हैं कि पूर्वांचल में सिर्फ इसी सीट पर चुनाव हो रहा था, इसलिए आसपास के जनपदों के नेता यहां आ गए थे।
विज्ञापन
भाजपा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष दिवाकर नाथ त्रिपाठी इस हार को सीधे तौर पर कार्यकर्ताओं की अनदेखी मान रहे हैं। उनका कहना है कि टिकट बंटवारे में स्थानीय नेताओं से सलाह तक नहीं ली गई। बाहरी प्रत्याशी लाए जाने से कार्यकर्ता नाराज थे। इसके अलावा स्थानीय नेताओं को प्रचार में लगाया ही नहीं गया। सीएम की जन सभाओं का संचालन सोनभद्र(राबर्ट्सगंज) के विधायक भूपेश चौबे को सौंपा गया था। इसी तरह प्रदेश अध्यक्ष की हुई पांच सभाओं में से चार का संचालन कोरांव के बब्बू राम द्विवेदी को दिया गया, जो शहर दक्षिणी में रहते हैं। इसी तरह प्रदेश अध्यक्ष की सुलेम सराय में हुई सभा का संचालन सुल्तानपुर के निवासी क्षेत्रीय महामंत्री राम चंद्र मिश्र से कराया गया। इस तरह लगातार की गई उपेक्षा से स्थानीय कार्यकर्ता नाराज थे।
विज्ञापन