फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   birds

संगम पर पक्षियों की मौतों का सिलसिला जारी

Sun, 07 Dec 2014 12:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 07 Dec 2014 12:14 AM IST
विज्ञापन
birds
इलाहाबाद। संगम पर पक्षियों की मौत का सिलसिला रुक नहीं रहा है। मछली और साइबेरियन पक्षियों की मौत के बाद शनिवार को संगम पर कबूतर मरा मिला। आश्चर्य यह कि मछली और साइबेरियन पक्षियों की मौत के जितने भी मामले सामने आए हैं, सभी सुबह पता चले हैं। ऐसे में रात में संगम क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों की आशंका जताई जा रही है। कबूतर का शव पोस्टमार्टम के लिए वन विभाग को सौंपा गया। उधर, संगम किनारे लाल जल भी लगातार बना हुआ है।
विज्ञापन


शनिवार को संगम नोज पर गंगा किनारे कबूतर मरा मिला। सूचना पर पहुंचे समाजसेवी कमलेश सिंह ने इसकी जानकारी जिला प्रशासन को दी। कुछ देर में वन दरोगा पहुंचे तो कमलेश सिंह ने कबूतर को पोस्टमार्टम के लिए उन्हें सौंप दिया। वहीं आज ही संगम किनारे करीब 50 मीटर तक जल और बालू लाल नजर आई, जबकि संगम नोज पर तकरीबन दस मीटर दूर तक जल काफी साफ रहा। कमलेश सिंह ने संभावना जताई कि इस हिस्से में एन्यूमीनियम क्लोराइड डाला गया है, जिससे जल साफ दिखने लगा। उन्होंने रात में संगम क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों की भी आशंका जताई, जिसकी वजह से मछली और पक्षियों की मौत हो रही है। कमलेश सिंह ने इविवि के प्रो. दीनानाथ को संगम के पानी का जो नमूना दिया है, उसमें आर्सेनिक की मात्रा अधिक होने की आशंका जताई जा रही है। उनका कहना है कि नालों के अलावा कानपुर की टेनरियों से आ रहे पानी में आर्सेनिक काफी अधिक है। कमलेश सिंह का कहना है कि प्रो. दीनानाथ ने आर्सेनिक सहित पानी में अन्य रसायनों की जांच के लिए कहा है। वह अपनी रिपोर्ट 10 दिसंबर को देंगे, जिसे हाईकोर्ट में पेश किया जाएगा।
विज्ञापन


 संगम क्षेत्र में पक्षियों को दाना खिलाने पर प्रतिबंध लगाने के आदेश पर समाजसेवी कमलेश सिंह ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि पक्षियों को जो दाना खिलाया जा रहा है, उसकी जांच कराने के बाद प्रतिबंध लगाना चाहिए, क्योंकि पूर्व में मरे साइबेरियन पक्षी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण लीवर में खून जमना बताया गया है। ऐसा जल में प्रदूषण के कारण भी हो सकता है। उनका कहना कि नदी में प्रतिमा विसर्जन और पक्षियों को दाना देने पर तो रोक लगा दी गई, लेकिन नालों, टेनरियों से जहरीले रासायनों वाला पानी, पॉलीथिन आदि लगातार नदी में गिर रहा है, जिस पर रोक अब तक नहीं लगी है। इससे शासन और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े होते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed