महंगाई की मार : नवरात्रि और रमजान से पहले महंगाई ने बिगाड़ा मसाले और मेवे का जायका
पिछले माह जीरा का मूल्य 220 रुपये किलो था। अब यह 250-300 रुपये किलो बेचा जा रहा है। इसी प्रकार काली मिर्च 550 रुपये किलो से 600-650 रुपये किलो तक पहुंच गई है। लौंग भी 900 रुपये किलो से बढ़कर 1000 रुपये किलो पहुंच गई है।
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खाद्य तेल, देशी घी आदि की लगातार बढ़ रही कीमतों के बीच अब हर घर की रसोई में प्रयोग होने वाले मसालों के दाम में भी आग लग गई है। बीते एक पखवाड़े के दौरान मसालों के दाम 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। यही हाल सूखे मेवों का भी है। चंद दिनों बाद नवरात्र व रमजान का माह शुरू होने वाला है, लेकिन इससे पहले ही बादाम, काजू, अखरोट आदि के दाम में भी वृद्धि होनी शुरू हो गयी है।
मसालों के दाम में बीते एक से दो सप्ताह के दौरान 20 फीसदी तक की तेजी आ चुकी है। वहीं यूक्रेन व रूस से आने वाले पाम ऑयल के रेट भी एक महीने में 25 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। इसके अलावा पिछले एक वर्ष में रिफाइंड व वनस्पति घी के रेट जहां दोगुने के करीब पहुंच गए हैं, तो वहीं खुला देशी घी जो दिवाली के आसपास 500 रुपये किलो बिक रहा था, उसका दाम बढ़कर 560-580 रुपये हो गया है। बीते कुछ दिनों से मेवों के दाम भी बढ़ने शुरू हो गए हैं। नवरात्र और रमजान की वजह से सूखे मेवे की डिमांड भी बाजार में बढ़ गई है।
मसालों के दाम में भी लगी आग
शहर में मसालों का कारोबार करने वाले व्यापारियों के अनुसार पिछले एक पखवाड़े में मसालों के रेट में काफी बढ़ोतरी हुई है। फुटकर व्यापारी दीपक केसरवानी ने बताया कि जो लाल मिर्च दो सप्ताह पहले तक 180-200 रुपये किलो बेची जा रही थी, वहीं मिर्च 250-280 रुपये किलो तक बेची जा रही है। सबसे ज्यादा जीरा महंगा हुआ है।
पिछले माह जीरा का मूल्य 220 रुपये किलो था। अब यह 250-300 रुपये किलो बेचा जा रहा है। इसी प्रकार काली मिर्च 550 रुपये किलो से 600-650 रुपये किलो तक पहुंच गई है। लौंग भी 900 रुपये किलो से बढ़कर 1000 रुपये किलो पहुंच गई है। हल्दी के रेट भी 10 रुपये बढ़े हैं। जो हल्दी पहले 90 रुपये किलो थी, आज वही हल्दी 100 रुपये किलो बिक रही है।
बिन मौसम बरसात ने किसानों की मेहनत पर फेर दिया पानी
मेवा और मसाले के थोक कारोबारी गिरधारी अग्रवाल बताते हैं कि पिछले साल नवंबर और दिसंबर में महाराष्ट्र में कई जगहों पर हुई बेमौसम बारिश ने किसानों की मेहनत पर पूरी तरह से पानी फेर दिया। किसान मसालों की फसल काटने की तैयारी कर ही रहे थे कि तभी बेमौसम बारिश ने कटी हुई मिर्च को बर्बाद कर दिया। किसानों के पास खराब फसल को फेंकने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं था। ऐसा ही अन्य मसालों के साथ भी हुआ। नतीजतन, मसालों की आपूर्ति कम हो गई है और बाजार में अन्य मसालों की कमी के कारण मसालों की कीमत बढ़ गई है।
दो रुपये बढ़ गया मैगी का दाम
महंगाई की मार अब मैगी पर भी पड़ी। 12 रुपये में मिलने वाली मैगी का दाम 14 रुपये हो गया है। होली से ही बाजार में मैगी बढ़े हुए दाम पर मिलने लगी है। इस बीच बाजार में मिलने वाली चॉकलेट का दाम तो संबंधित कंपनियों ने नहीं बढ़ाया है, लेकिन उनका वजन जरूर कम कर दिया है। एक नामी कंपनी की दस रुपये की चॉकलेट जिसका वजन 15 ग्राम था, अब उसका वजन 13.2 ग्राम हो गया है। यही प्रक्रिया कई बिस्कुट निर्माता कंपनियों ने भी अपनाई है। दाम बढ़ाने के बजाय तमाम कंपनियों ने अपने उत्पादों का वजन कम कर दिया है।
मेवा/ मसाला थोक रेट फुटकर रेट
बादाम 600-650 700-800
किशमिश 230-260 270-320
अखरोट 1100-1150 1250-1300
काजू 650-750 700-800
चिरौंजी 1100-1150 1250-1300
लाल मिर्च 200-210 250-280
जीरा 225-240 250-300
काली मिर्च 550-580 600-650
धनिया 125-135 150-180