जुनून : पहले पोलियो को दी मात, सात साल रहे बिस्तर पर, अब देश का कर रहे प्रतिनिधित्व
पवन जब एक साल के थे, तब उन्हें पोलियो हो गया था। दाहिने पैर ने काम करना बंद कर दिया।जब बड़े हुए तो अपने दोस्तों को टेबल टेनिस खेलते देख उनके मन भी इस खेल के प्रति रुचि बढ़ी। वह घर पर बिना बताए ही मेयोहाल कांप्लेक्स पहुंच गए और प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया।
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मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है... पंख से कुछ नहीं होता, उड़ान हौसलों से होती है। ऐसा लगता है यह बातें संगमनगरी के पवन कुमार शर्मा के लिए ही लिखी गईं हों। अपनी मेहनत और जुनून से शारीरिक कमियों पर विजय पाते हुए सफलता की नई इबारत लिख डाली। वह अंतरराष्ट्रीय टेबल टेनिस प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व करने जा रहे हैं।
पवन जब एक साल के थे, तब उन्हें पोलियो हो गया था। दाहिने पैर ने काम करना बंद कर दिया।जब बड़े हुए तो अपने दोस्तों को टेबल टेनिस खेलते देख उनके मन भी इस खेल के प्रति रुचि बढ़ी। वह घर पर बिना बताए ही मेयोहाल कांप्लेक्स पहुंच गए और प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया। कुछ दिनों बाद पिता शशिकुमार शर्मा और मां उर्मिला को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने भी पवन का हौसला बढ़ाया और खेल की पूरी किट दिला दी। 1996 पहला राष्ट्रीय मैच खेलने वाले पवन वर्तमान में विश्व की 57वीं और भारत की तीसरी रैंक पर काबिज हैं। वह आठ बार के राष्ट्रीय टेबल टेनिस के विजेता भी रह चुके हैं।
फाफामऊ मलाक हरहर के रहने वाले 48 वर्षीय पवन इलाहाबाद हाईकोर्ट में समीक्षा अधिकारी के पद पर तैनात हैं। वह अमिताभ बच्चन स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में कोच एबादुर्रहमान से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। बाएं हाथ के अटैकिंग खिलाड़ी पवन इलाहाबाद विश्वविद्यालय की टेबल टेनिस टीम का हिस्सा रह चुके हैं।
वर्ष 2005 में एक हादसे में पवन का पैर टूट गया था। सात साल तक बिस्तर पर पड़े रहे, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। खेल से जुड़े रहे। इस साल वह इजिप्ट में हुई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया। 23-26 अगस्त तक थाइलैंड में अंतरराष्ट्रीय टेबल टेनिस फेडरेशन की ओर से आयोजित होने वाली पैरा ओपन रैंकिंग प्रतियोगिता को लेकर वह बेहद उत्साहित हैं। पवन का कहना है कि तैयारी पूरी है। इस बार पदक जीतकर ही लौटूंगा।