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Mahakumbh : नागाओं के सामरिक ढांचे के रूप में अस्तित्व में आया आवाहन, इस उद्देश्य से हुई अखाड़े की स्थापना

Thu, 05 Dec 2024 06:19 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 05 Dec 2024 06:19 AM IST
सार

सनातन धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र धारण करने का निर्णय लिए जाने के बाद दसों पदों के संन्यासियों की मढि़यों के सभी मठों के संचालकों की मौजूदगी में इस अखाड़े की स्थापना हुई। 

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Avahan akhada came into existence as a strategic structure of Nagas
महाकुंभ 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दशनाम नागा संन्यासियों के संगठन की सामरिक रचना के तहत श्रीपंच दशनाम आवाहन अखाड़ा अस्तित्व में आया। सनातन धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र धारण करने का निर्णय लिए जाने के बाद दसों पदों के संन्यासियों की मढि़यों के सभी मठों के संचालकों की मौजूदगी में इस अखाड़े की स्थापना हुई। 

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इतिहासकार जदुनाथ सरकार ने 1547 में आवाहन अखाड़े की स्थापना का उल्लेख किया है। परमात्मा के भैरव स्वरूप की शक्ति भैरवी मां दुर्गा का आह्वान कर उनके प्रतीक शस्त्र भाला के रूप में इस अखाड़े को स्थापित किया गया। दिगंबर वेश में वस्त्र का परित्याग कर शस्त्रों से लैस होकर वितरण करने और धूनी रमाने वाले परमहंस संन्यासी के स्थान पर नागा संन्यासी कहे जाने लगे। इन शस्त्रधारी नागा संन्यासियों के केंद्र को धूनी नाम दिया गया। 
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श्री महंत लालपुरी रचित दशनाम नागा संन्यासी नामक पुस्तक में इस अखाड़े की स्थापना और सामरिक गठन का विस्तार से जिक्र किया गया है। महंत लाल पुरी लिखते हैं कि 51 शक्तिपीठों के आधार पर 51 मढि़यों की भी स्थापना की गई। मढि़यों के समूहों को मिलाकर नागाओं का बेड़ा बनता था। वह बताते हैं कि इसका सबसे पहले नामकरण अखंड आवाहन रखा गया था। श्रीमहंत मरिचि गिरि, हंत दीनानाथ गिरि, रत्न गिरि, दलपत गिरि, भवहरण पुरी, उदय पुरी, गणेश पुरी, चंदन वन, ओंकार वन, रत्न वन, हीरा भारती, गणपति भारती, हरिद्वार भारती ने मिलकर इस अखाड़े की नींव रखी। ब्यूरो
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अष्टकौशल महंतों के साथ ही पांच सरदारों की भी नियुक्ति
आवाहन अखाड़े में सबसे पहले श्रीमहंत होते हैं। इनके बाद अष्ट कौशल महंत होते हैं। थानापति के अलावा विवादों के निपटारा के लिए दो पंच भी चुने जाते हैं। इसके अलावा पांच सरदारों की भी नियुक्ति की जाती है, जो अखाड़े के कार्यों को देखते हैं। इनमें भंडारी, कोतवाल, कोठारी, कारोबारी और पुजारी शामिल होते हैं। 
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