{"_id":"5748a2b14f1c1b544b690753","slug":"au-entrance-examination-question-movement","type":"story","status":"publish","title_hn":"इविवि की प्रवेश परीक्षा पर सवाल, आंदोलन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इविवि की प्रवेश परीक्षा पर सवाल, आंदोलन
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 28 May 2016 01:26 AM IST
विज्ञापन
इलाहाबाद विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इलाहाबाद विश्वविद्यालय की स्नातक प्रवेश परीक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इसी के साथ परिसर में एक और आंदोलन की तैयारी भी शुरू हो गई है। छात्रसंघ पदाधिकारियों ने कार्यवाहक कुलपति प्रोफेसर ए.सत्यनारायण को शुक्रवार को ज्ञापन सौंपकर परीक्षा की शुचिता पर सवाल उठाया। छात्राें ने दोबारा परीक्षा कराने की मांग की है।
उन्होंने 2011 से 2016 तक की प्रवेश परीक्षाओं की सीबीआई जांच की भी मांग की। उनका कहना था कि केंद्र निर्धारण में गड़बड़ी के साथ भुगतान नहीं होने की वजह से कई केंद्रों पर उत्तर पुस्तिका रोक ली गई थी। इससे आशंकाओं को और बल मिलता है। इसके अलावा सर्वर डाउन रहने की भी शिकायत रही। इसलिए सीबीआई जांच के अलावा दोबारा परीक्षा कराई जाए। उन्होंने केंद्रवार परीक्षा में शामिल छात्र-छात्राओं का विवरण तथा केंद्र की हुई वीडियो रिकार्र्डिंग की प्रति भी मांगी है। प्रोफेसर सत्यनारायण ने अभ्यर्थियों को डिटेल उपलब्ध कराने के लिए प्रवेश प्रकोष्ठ को निर्देश दे दिया है। इन्हीं मांगाें को लेकर विद्यार्थियों ने सोमवार को कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू के घेराव की घोषणा की है। एक अन्य गुट की बैठक में छात्रों ने जिनकी परीक्षा छूट गई है, उन्हें दोबारा मौका दिए जाने की मांग की।
विश्वविद्यालय की प्रवेश की प्रक्रिया शुरू से ही विवादों में रही है। पहले ऑनलाइन और ऑफलाइन को लेकर विवाद हुआ। फिर परीक्षा केंद्र को लेकर परीक्षा के दौरान अफरा-तफरी का माहौल रहा। सैकड़ों अभ्यर्थियों को तीन-तीन बार परीक्षा केंद्र बदले जाने का एसएमएस पहुंचा, वह भी आखिरी घंटों में। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन को आनन-फानन में आदेश देना पड़ा कि जो अभ्यर्थी जिस केंद्र पर पहुंच जाए उसे वहीं पर परीक्षा में शामिल कर लिया जाए। इस तरह से परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों की बड़ी संख्या है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह सब एजेंसी की गड़बड़ी की वजह से हुआ है।
विज्ञापन
छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह, महामंत्री सिद्धार्थ सिंह गोलू, संयुक्त मंत्री श्रवण जायसवाल के नेतृत्व में विद्यार्थियों ने प्रोफेसर ए.सत्यनारायण को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की। उनका कहना था कि कुलपति स्वयं कह चुके हैं कि पूर्व में भी पैसा लेकर प्रवेश होते रहे हैं। इसलिए 2011 से 2016 तक की प्रवेश प्रकिया की जांच की जानी चाहिए। विद्यार्थियाें ने परीक्षा के दौरान कुलपति, चीफ प्रॉक्टर, आईसीटी के चेयरमैन और प्रवेश समिति के चेयरमैन के शहर बाहर चले जाने पर भी सवाल उठाया। कार्यवाहक कुलपति प्रोफेसर सत्यनारायण ने विद्यार्थियों को केंद्रवार कक्ष निरीक्षकाें, विद्यार्थियों का विवरण उपलब्ध कराने की अनुमति दे दी।
अन्य मांगों के संबंध में कहना था कि यह उनके अधिकार में नहीं है। छात्र-छात्राओं ने मांग न माने जाने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी। ज्ञापन सौंपने वालाें में आनंद सिंह निक्कू, चंदन सिंह, मानस शर्मा आदि शामिल रहे। एसएफआई की बैठक में भी छूटे छात्र-छात्राओं को दोबारा मौके दिए जाने की मांग की गई। उन्होंने परीक्षा के दौरान सर्वर डाउन रहने पर कुलपति के निर्णय पर भी सवाल उठाया। बैठक में फिरोज वारसी, रत्नेश यादव, सूर्य प्रकाश, विकास, सत्यदेव आदि मौजूद रहे।
- स्नातक प्रवेश परीक्षा में केंद्र निर्धारण को लेकर हुई गड़बड़ी तथा एक ही विद्यार्थी को कई एसएमएस पहुंचने की बाबत इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने एग्जाम कराने वाली एजेंसी से रिपोर्ट तलब की है। प्रवेश समिति कोर कमेटी की शुक्रवार को हुई बैठक में हुए निर्णय के अंतर्गत एजेंसी से जवाब मांगा गया है कि आखिरी समय में विद्यार्थियों को केंद्र बदले जाने की सूचना कैसे और क्यों भेजी गई। यह सब किसके आदेश पर हुआ।
प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक प्रोफेसर बीएन सिंह ने बताया कि एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रोफेसर सिंह का कहना है कि परीक्षा में 86 प्रतिशत तक उपस्थिति रही। पूर्व में भी तकरीबन इतनी ही उपस्थिति रही है। इसलिए परीक्षा छूटने की बात गलत है। एजेंसी ने आखिरी समय में एसएमएस भी भेजा था कि अभ्यर्थी एडमिट कार्ड में दर्ज केंद्र पर ही परीक्षा देने पहुंचें। इसके अलावा हर केंद्र पर यह भी निर्देश दे दिया गया था कि जो भी अभ्यर्थी पहुंचे और उसके पास एडमिट कार्ड है तो परीक्षा में शामिल कर लिया जाए।
विज्ञापन
उन्होंने 2011 से 2016 तक की प्रवेश परीक्षाओं की सीबीआई जांच की भी मांग की। उनका कहना था कि केंद्र निर्धारण में गड़बड़ी के साथ भुगतान नहीं होने की वजह से कई केंद्रों पर उत्तर पुस्तिका रोक ली गई थी। इससे आशंकाओं को और बल मिलता है। इसके अलावा सर्वर डाउन रहने की भी शिकायत रही। इसलिए सीबीआई जांच के अलावा दोबारा परीक्षा कराई जाए। उन्होंने केंद्रवार परीक्षा में शामिल छात्र-छात्राओं का विवरण तथा केंद्र की हुई वीडियो रिकार्र्डिंग की प्रति भी मांगी है। प्रोफेसर सत्यनारायण ने अभ्यर्थियों को डिटेल उपलब्ध कराने के लिए प्रवेश प्रकोष्ठ को निर्देश दे दिया है। इन्हीं मांगाें को लेकर विद्यार्थियों ने सोमवार को कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू के घेराव की घोषणा की है। एक अन्य गुट की बैठक में छात्रों ने जिनकी परीक्षा छूट गई है, उन्हें दोबारा मौका दिए जाने की मांग की।
विज्ञापन
विश्वविद्यालय की प्रवेश की प्रक्रिया शुरू से ही विवादों में रही है। पहले ऑनलाइन और ऑफलाइन को लेकर विवाद हुआ। फिर परीक्षा केंद्र को लेकर परीक्षा के दौरान अफरा-तफरी का माहौल रहा। सैकड़ों अभ्यर्थियों को तीन-तीन बार परीक्षा केंद्र बदले जाने का एसएमएस पहुंचा, वह भी आखिरी घंटों में। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन को आनन-फानन में आदेश देना पड़ा कि जो अभ्यर्थी जिस केंद्र पर पहुंच जाए उसे वहीं पर परीक्षा में शामिल कर लिया जाए। इस तरह से परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों की बड़ी संख्या है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह सब एजेंसी की गड़बड़ी की वजह से हुआ है।
विज्ञापन
छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह, महामंत्री सिद्धार्थ सिंह गोलू, संयुक्त मंत्री श्रवण जायसवाल के नेतृत्व में विद्यार्थियों ने प्रोफेसर ए.सत्यनारायण को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की। उनका कहना था कि कुलपति स्वयं कह चुके हैं कि पूर्व में भी पैसा लेकर प्रवेश होते रहे हैं। इसलिए 2011 से 2016 तक की प्रवेश प्रकिया की जांच की जानी चाहिए। विद्यार्थियाें ने परीक्षा के दौरान कुलपति, चीफ प्रॉक्टर, आईसीटी के चेयरमैन और प्रवेश समिति के चेयरमैन के शहर बाहर चले जाने पर भी सवाल उठाया। कार्यवाहक कुलपति प्रोफेसर सत्यनारायण ने विद्यार्थियों को केंद्रवार कक्ष निरीक्षकाें, विद्यार्थियों का विवरण उपलब्ध कराने की अनुमति दे दी।
अन्य मांगों के संबंध में कहना था कि यह उनके अधिकार में नहीं है। छात्र-छात्राओं ने मांग न माने जाने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी। ज्ञापन सौंपने वालाें में आनंद सिंह निक्कू, चंदन सिंह, मानस शर्मा आदि शामिल रहे। एसएफआई की बैठक में भी छूटे छात्र-छात्राओं को दोबारा मौके दिए जाने की मांग की गई। उन्होंने परीक्षा के दौरान सर्वर डाउन रहने पर कुलपति के निर्णय पर भी सवाल उठाया। बैठक में फिरोज वारसी, रत्नेश यादव, सूर्य प्रकाश, विकास, सत्यदेव आदि मौजूद रहे।
- स्नातक प्रवेश परीक्षा में केंद्र निर्धारण को लेकर हुई गड़बड़ी तथा एक ही विद्यार्थी को कई एसएमएस पहुंचने की बाबत इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने एग्जाम कराने वाली एजेंसी से रिपोर्ट तलब की है। प्रवेश समिति कोर कमेटी की शुक्रवार को हुई बैठक में हुए निर्णय के अंतर्गत एजेंसी से जवाब मांगा गया है कि आखिरी समय में विद्यार्थियों को केंद्र बदले जाने की सूचना कैसे और क्यों भेजी गई। यह सब किसके आदेश पर हुआ।
प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक प्रोफेसर बीएन सिंह ने बताया कि एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रोफेसर सिंह का कहना है कि परीक्षा में 86 प्रतिशत तक उपस्थिति रही। पूर्व में भी तकरीबन इतनी ही उपस्थिति रही है। इसलिए परीक्षा छूटने की बात गलत है। एजेंसी ने आखिरी समय में एसएमएस भी भेजा था कि अभ्यर्थी एडमिट कार्ड में दर्ज केंद्र पर ही परीक्षा देने पहुंचें। इसके अलावा हर केंद्र पर यह भी निर्देश दे दिया गया था कि जो भी अभ्यर्थी पहुंचे और उसके पास एडमिट कार्ड है तो परीक्षा में शामिल कर लिया जाए।