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यूपी : बेटे असद को बचाने के लिए अतीक की कोई तरकीब नहीं आई काम, कानून के पंजे से बचने के लिए भी किया था इंतजाम

Fri, 14 Apr 2023 12:03 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 14 Apr 2023 12:03 PM IST
सार

बेटे असद को कानून के पंजे से बचाने के लिए माफिया अतीक अहमद ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी। उमेश पाल की हत्या को अंजाम देने के बाद असद को कहां भागना है और कहां छिपना है और किससे मदद लेनी है पूरा रोड मैप तैयार किया था, बावजूद इसके वह एसटीएफ की गोली से बच नहीं सका।

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Atiq plan to save his son Asad did not work, arrangements were also made to escape from the clutches of the
Prayagraj News : अतीक अहमद और असद अहमद। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बेटे असद को कानून के पंजे से बचाने के लिए माफिया अतीक अहमद ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी। उमेश पाल की हत्या को अंजाम देने के बाद असद को कहां भागना है और कहां छिपना है और किससे मदद लेनी है पूरा रोड मैप तैयार किया था, बावजूद इसके वह एसटीएफ की गोली से बच नहीं सका। अतीक के आपराधिक जीवन में पहला मौका है जब उसके परिवार के किसी सदस्य को मुठभेड़ में मारा गया है। यह अतीक के आंतक के सफाए की शुरुआत मानी जा रही है। 

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लखनऊ में रखवाया था मोबाइल फोन और एटीएम
असद अहमद 24 फरवरी को जिस समय उमेश पाल पर गोलियों की बरसात कर रहा था उस समय उसके एटीएम और मोबाइल का उपयोग लखनऊ में कोई दूसरा कर रहा था। उसके मोबाइल से यूपीआई पेमेंट किए जा रहे थे और शॉपिंग की जा रही थी। साथ ही लखनऊ में उसके एटीएम से पैसे निकाले जा रहे थे। ताकि असद के पकड़े जाने के बाद कोर्ट में यह तर्क दिया जा सके कि असद अहमद घटना के दिन प्रयागराज में नहीं बल्कि लखनऊ में मौजूद था। अतीक की यह चालबाजी काम न आ सकी। पुलिस ने कुछ दिन पहले ही अतीक के एटीएम और मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने वाले उसके दोस्तों को हैदराबाद से गिरफ्तार कर लिया था। 

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असद की मदद के लिए करीबियों को सौंपे थे काम

फरारी के दौरान अतीक को वित्तीय मदद करने के लिए उसने अपने पुराने संबंधों का इस्तेमाल किया। कोलकाता, दिल्ली से लेकर बिहार और कानपुर तक उसने लोगों को उसकी मदद के लिए लगाया था। असद की शहरों में छुप रहा था और कुछ दिन रुकने के बाद ठिकाना बदल देता था। दिल्ली में भी वह करीब 15 दिन रुका था। इसके बाद एसटीएफ के आने की भनक लगने पर वह भाग निकला था। दिल्ली और मेरठ में उसकी मदद करने वालों को एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया था।

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गुलाम के साथ ही असद बदल रहा था ठिकाने

उमेश पाल की हत्या के बाद असद गुलाम हसन के साथ ही निकला था और अंत समय तक दोनों एक साथ ही रहे। वह जहां भी जा रहा था गुलाम को अपने साथ लिए हुए थे। गुड्डू मुस्लिम व अन्य शूटर कानपुर जाने के बाद दूसरे शहरों की ओर निकल गए लेकिन असद और गुलाम एक साथ ही रहे। झांसी में एक साथ दोनों को एनकाउंटर में ढेर कर दिया गया।

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