अतीक-अशरफ हत्याकांड :शूटरों ने एक महीने पहले बांदा में बनवाया था फर्जी आधार कार्ड, विवेचना में एसआईटी को मिली
विवेचना में यह भी पता चला है कि हत्याकांड से पहले शूटर सनी व लवलेश दिल्ली गए थे। वहां उनकी मुलाकात तीसरे शूटर अरुण मौर्य से हुई। फिर तीनों ने वहीं एक लोकल मार्केट से माइक आईडी व कैमरे का इंतजाम किया। इसी माइक आईडी व कैमरे का इस्तेमाल तीनों ने हत्याकांड को अंजाम देने के लिए किया।
विस्तार
अतीक-अशरफ हत्याकांड की चार्जशीट तैयार हो गई है। इससे पहले विवेचना में विशेष जांच दल (एसआईटी) को अहम जानकारी मिली है। पता चला है कि सनी व लवलेश ने उमेश पाल हत्याकांड के बाद वारदात की प्लानिंग शुरू कर दी थी। यही नहीं एक महीने पहले बांदा में ही दो फर्जी आधार कार्ड बनवाए थे। एसआईटी ने इन दोनों आधार कार्ड को भी अपनी केस डायरी का हिस्सा बनाया है।
यह दोनों आधार कार्ड एसआईटी ने तीनों शूटरों को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लिए जाने के दौरान बरामद किए थे। यह वही आधार कार्ड हैं, जिनका इस्तेमाल शूटरों ने जंक्शन के पास स्थित होटल में रुकने के लिए किया था। इन फर्जी आधार का इस्तेमाल वह अन्य जगहों पर भी कर चुके थे। फिलहाल उस व्यक्ति का नाम नहीं सामने आया है, जिससे यह फर्जी आधार कार्ड बनवाए गए थे। उधर, मामले की चार्जशीट तैयार हो गई है। सूत्रों का कहना है कि बुधवार को इसे दाखिल किया जा सकता है। हालांकि, इस मामले में अफसर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।
हत्याकांड से पहले दिल्ली गए थे सनी और लवलेश
सूत्रों का कहना है कि विवेचना में यह भी पता चला है कि हत्याकांड से पहले शूटर सनी व लवलेश दिल्ली गए थे। वहां उनकी मुलाकात तीसरे शूटर अरुण मौर्य से हुई। फिर तीनों ने वहीं एक लोकल मार्केट से माइक आईडी व कैमरे का इंतजाम किया। इसी माइक आईडी व कैमरे का इस्तेमाल तीनों ने हत्याकांड को अंजाम देने के लिए किया।
कब क्या हुआ
15 अप्रैल- अतीक अशरफ की हत्या। मौके से ही तीनों शूटर गिरफ्तार।
16 अप्रैल- तीनों शूटरों को जेल भेजा गया।
17 अप्रैल- शूटरों को प्रतापगढ़ जेल शिफ्ट किया गया। उधर, एसआईटी ने विवेचना ग्रहण की।
18 अप्रैल- आरोपियों की चार दिन की कस्टडी रिमांड मंजूर हुई।
19 अप्रैल- शूटरों को एसआईटी ने कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू की।
20 अप्रैल- एसआईटी ने कॉल्विन अस्पताल में क्राइम सीन रिक्रिएशन कराया।
23 अप्रैल- कस्टडी रिमांड खत्म, शूटर प्रतापगढ़ जेल में दोबारा दाखिल किए गए।
विवेचना के दौरान एसआईटी की कार्रवाई
अतीक व अशरफ की हत्या के अगले ही दिन एसआईटी का गठन हुआ था। इसका अध्यक्ष एडीसीपी क्राइम सतीश चंद्र को बनाया गया व एसीपी सत्येंद्र प्रसाद तिवारी और इंस्पेक्टर ओमप्रकाश सदस्य बने। गठन के अगले ही दिन विवेचना शाहगंज थाने से ट्रांसफर होकर एसआईटी अफसरों के पास आ गई थी। विवेचना ग्रहण करने के बाद से एसआईटी लगातार साक्ष्यों के संकलन में जुटी रही। मीडियाकर्मियाें व मेडिकल स्टाफ के साथ ही पुलिसकर्मियों के बयान भी दर्ज किए गए। वैज्ञानिक साक्ष्यों व चश्मदीदों के बयान का भौतिक सत्यापन भी कराया गया।