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Atiq Ashraf Murder: अतीक खत्म हुआ पर गुर्गों के आतंक पर नहीं लग रही लगाम, जबरन कहते हैं आधी जमीन हमारी है
Sat, 03 Jun 2023 01:16 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 03 Jun 2023 01:16 PM IST
सार
माफिया अतीक और अशरफ की हत्या के बाद अब गुर्गों का लोगों में खौफ है। गुर्गे कहीं जमीन पर कर रहे कब्जा कर रहे हैं, कहीं रंगदारी मांग रहे हैं। पीड़ित लोग परेशान हैं।
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अतीक-अशरफ की हत्या
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अतीक अहमद की मौत के साथ उसके आतंक का तो खात्मा हो गया, लेकिन उसके गुर्गों का आतंक अब भी कम नहीं हुआ है। कहीं वह रंगदारी मांग रहे हैं तो कहीं जबरन जमीन कब्जा रहे हैं। कई मामलों में तो पीड़ितों की सुनवाई ही नहीं हुई। जिन मामलों में एफआईआर दर्ज हुई, उनमें भी कार्रवाई नहीं हो रही है।
केस एक
जबरन कहते हैं, आधी जमीन हमारी है
ऐनुद्दीनपुर करेली में रहने वाले मो. उमर ने करेलाबाग में आठ साल पहले जीवन भर की जमापूंजी खर्च करके एक प्लॉट खरीदा था। वह बताते हैं कि 2019 में जब वह अपने प्लॉट पर निर्माण कराने गए तो अतीक अहमद के गुर्गों नूर हमजा, बेलाल समेत अन्य ने उन्हें यह कहते हुए रोक दिया कि इसमें आधी जमीन उनकी है। तब से अब तक वह निर्माण नहीं करा पाए हैं।
उमर का दावा है कि उनके पास रजिस्टर्ड बैनामा व अन्य कागजात हैं, जिसे लेकर वह चार साल से थानों-अफसरों के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन एफआईआर दर्ज होने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही है।
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वह बताते हैं कि नूर हमजा व अन्य आरोपी अतीक गैंग के सदस्य रहे और मुकदमों में उसके साथ सहअभियुक्त भी रहे हैं। यहां तक कि सरकारी जमीन कब्जाने पर पीडीए ने भी उनके खिलाफ कार्रवाई की। इसके बावजूद उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हो रही है।
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केस एक
जबरन कहते हैं, आधी जमीन हमारी है
ऐनुद्दीनपुर करेली में रहने वाले मो. उमर ने करेलाबाग में आठ साल पहले जीवन भर की जमापूंजी खर्च करके एक प्लॉट खरीदा था। वह बताते हैं कि 2019 में जब वह अपने प्लॉट पर निर्माण कराने गए तो अतीक अहमद के गुर्गों नूर हमजा, बेलाल समेत अन्य ने उन्हें यह कहते हुए रोक दिया कि इसमें आधी जमीन उनकी है। तब से अब तक वह निर्माण नहीं करा पाए हैं।
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उमर का दावा है कि उनके पास रजिस्टर्ड बैनामा व अन्य कागजात हैं, जिसे लेकर वह चार साल से थानों-अफसरों के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन एफआईआर दर्ज होने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही है।
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वह बताते हैं कि नूर हमजा व अन्य आरोपी अतीक गैंग के सदस्य रहे और मुकदमों में उसके साथ सहअभियुक्त भी रहे हैं। यहां तक कि सरकारी जमीन कब्जाने पर पीडीए ने भी उनके खिलाफ कार्रवाई की। इसके बावजूद उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हो रही है।
धमकाया, 50 लाख दो वरना एक-एक कर मारे जाओगे
करेली के बख्शीमोढ़ा निवासी नूर अख्तर भी उन लोगों में शामिल हैं जो अतीक के गुर्गों से आतंकित हैं। राजू पाल हत्याकांड की गवाह रुखसाना के सगे भाई नूर का कहना है कि पूर्व में उसकी बहन पर बख्शीमोढ़ा के ग्राम प्रधान और अतीक के करीबी मुबारक ने जानलेवा हमला किया था, जिसका वह चश्मदीद है। बताया 21 फरवरी को रास्ते में मुबारक ने अपने भाई सराफत, बेटे अरबाज व इसरत उर्फ गुड्डू के साथ मिलकर उसे घेर लिया और लात-घूंसों से जमकर पीटा।
करेली के बख्शीमोढ़ा निवासी नूर अख्तर भी उन लोगों में शामिल हैं जो अतीक के गुर्गों से आतंकित हैं। राजू पाल हत्याकांड की गवाह रुखसाना के सगे भाई नूर का कहना है कि पूर्व में उसकी बहन पर बख्शीमोढ़ा के ग्राम प्रधान और अतीक के करीबी मुबारक ने जानलेवा हमला किया था, जिसका वह चश्मदीद है। बताया 21 फरवरी को रास्ते में मुबारक ने अपने भाई सराफत, बेटे अरबाज व इसरत उर्फ गुड्डू के साथ मिलकर उसे घेर लिया और लात-घूंसों से जमकर पीटा।
कहा कि हमारे खिलाफ गवाही देने चले हो, अब तुम मारे जाओगे। यह भी कहा कि तुम्हारी बहन की वजह से मेरा घर गिरा है। अब सभी मिलकर 50 लाख रंगदारी दो वरना एक-एक कर मारे जाओगे। एक दर्जन मुकदमों में आरोपी मुबारक करेली थाने का हिस्ट्रीशीटर है। 2020 में उसके दो घरों को बुलडोजर से ध्वस्त करा दिया गया था। रिपोर्ट दर्ज हुए पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक आरोपी गिरफ्तार नहीं किए गए हैं। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ पीड़ित का बयान दर्ज हुआ है।
केस तीन
पांच लाख लौटाए नहीं, 10 लाख की मांगी रंगदारीराजापुर गंगानगर निवासी विक्रांत यादव ने चार साल पहले बेली में दो सगे भाइयों शीबू व असहल से जमीन का सौदा किया। पांच लाख रुपये एडवांस भी दे दिए। बाद में पता चला कि जमीन विवादित है तो सौदे से इन्कार करते हुए अपने रुपये वापस मांगे।
पांच लाख लौटाए नहीं, 10 लाख की मांगी रंगदारीराजापुर गंगानगर निवासी विक्रांत यादव ने चार साल पहले बेली में दो सगे भाइयों शीबू व असहल से जमीन का सौदा किया। पांच लाख रुपये एडवांस भी दे दिए। बाद में पता चला कि जमीन विवादित है तो सौदे से इन्कार करते हुए अपने रुपये वापस मांगे।
आरोप है कि अतीक अहमद गैंग के सदस्य दोनों आरोपियों ने उसके रुपये तो वापस किए नहीं, उल्टा 10 लाख की रंगदारी मांगी। यही नहीं अक्तूबर 2022 में धोबीघाट के पास स्थित अपने हुक्काबार पर बुलाया। वहां लाइसेंसी राइफल सटाकर मारपीट की और गाड़ी में खींचने की भी कोशिश की। रिपोर्ट दर्ज हुए 17 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई।
जिन भी मामलों में आरोपियों के खिलाफ सबूत हैं, उनमें कार्रवाई की जाएगी। विवेचना के दौरान साक्ष्य संकलन जरूरी होता है और इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।- दीपक भूकर, डीसीपी नगर