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अतीक अहमद : 40 साल से बेखौफ अपराध की दुनिया चला रहे अतीक को पहली बार सजा; दर्ज हैं 101 मुकदमे

Tue, 28 Mar 2023 03:28 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 28 Mar 2023 03:28 PM IST
सार

उमेश पाल के अपहरण के 17 साल पुराने मामले में इलाहाबाद की एमपीएमएलए कोर्ट ने माफिया अतीक अहमद समेत तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। चार दशक से अपराध की दुनिया चला रहे अतीक अहमद को पहली बार साजा हुई है। सोमवार को ही अतीक अहमद को गुजरात की साबरमती जेल से लाया गया था। 

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Atiq Ahmed, who has been an undisputed king in the world of crime for 40 years, sentenced for the first time,
Prayagraj News : अतीक अहमद, पूर्व सांसद। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

चालीस साल से अपराध की दुनिया के बेताज बादशाह रहे माफिया अतीक अहमद को पहली बार किसी मुकदमे में सजा सुनाई गई है। वह भी आजीवन कारावास की। इसके पहले कोई भी मुकदमा अंजाम तक पहुंचने से पहले ही अतीक अपनी साजिश से उसे निपटा देता था और बच निकलता था। उमेश पाल के अपहरण के केस में उसे आखिरकार सजा मिल ही गई। 

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जिले के शातिर अपराधी अतीक अहमद के खिलाफ यूं तो 101 मामले दर्ज हैं लेकिन पहली बार ऐसा कि किसी मामले में फैसला आया है। उमेश पाल अपहरणकांड में कोर्ट ने मंगलवार को सजा सुनाई। उसके खिलाफ जितने मामले में चल रहे हैं, अधिकांश में गवाह बाद में मुकर गए। उमेश पाल ने अपने अपहरण के मामले को लगभग अंजाम तक पहुंचा दिया, लेकिन फैसले से एक महीना पहले उनकी हत्या कर दी गई।

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1979 में दर्ज हुआ था पहला मुकदमा 
अतीक के खिलाफ पहला मामला 1979 में दर्ज हुआ था। इसके बाद जुर्म की दुनिया में अतीक ने पीछे मुड़कर नहीं देखा हत्या, लूट, रंगदारी अपहरण के न जाने कितने मुकदमे उसके खिलाफ दर्ज होते रहे। मुकदमों के साथ ही राजनीतिक रूप से उसका रुतबा भी बढ़ता गया। 1989 में वह पहली बार विधायक हुआ तो जुर्म की दुनिया में उसका दखल कई जिलों तक हो गया।

पुलिस ने 1992 में अतीक को घोषित किया था गिरोह का सरगना
1992 में पहली बार उसके गैंग को आईएस 227 के रूप में सूचिबद्ध करते हुए पुलिस ने उसे गिरोह का सरगना घोषित कर दिया। 1993 में लखनऊ में गेस्ट हाउस कांड ने अतीक को काफी कुख्यात किया। गैंगस्टर एक्ट के साथ ही उसके खिलाफ कई बार गुंडा एक्ट की कार्रवाई भी की गई। एक बार तो उसपर एनएसए भी लगाया जा चुका है। जुर्म और राजनीति के साथ साथ अतीक अब ठेकेदारी और जमीन के धंधे में भी कूद पड़ा।









जमीन की खरीद फरोख्त और रंगदारी से अतीक ने ही नहीं उसके गुर्गों ने अकूत संपत्ति बना ली। अतीक का खौफ इतना था कि उसके खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज करने की हिम्मत नहीं करता था। अगर कर भी दिया तो बाद में गवाह मुकर जाते, कई बार वादी ने ही लिखकर दे दिया कि उसने अतीक के खिलाफ गलत मुकदमा दर्ज कराया था।

विधायक राजू पाल की हत्या के बाद दरकने लगा साम्राज्य

समय बीतने के साथ जुर्म की दुनिया में अतीक नए तरीके से काम करने लगा था। अपने दुश्मनों और विरोधियों से वह सीधा नहीं लड़ता था। उसके किसी दुश्मन को तैयार कर उसे पैसे और हथियार देकर वह मरवा देता। इस तरह सैकड़ों केस हुए जिसमें अतीक का कहीं नाम ही नहीं आया। वर्षों बाद राजू पाल हत्याकांड में अतीक का सीधा नाम आया तो उसके दुर्दिनों की शुरुआत हो गई। अगले ही साल ने उमेश पाल का अपहरण कर अतीक ने अपने पैरों पर जैसे कुल्हाड़ी ही मार ली।

यह अपहरणकांड एकमात्र ऐसा केस है जो फैसले तक पहुंच गया। हालांकि अतीक ने उमेश की हत्या करवा ही दी। कोर्ट ने मंगलवार को अतीक के खिलाफ उम्रकैद की सजा सुनाई। उत्तर प्रदेश सरकार ने अतीक के खिलाफ कई गंभीर मुकदमों को सन 2001, 2003 और 2004 में वापस ले लिया था। कई मामलों में तो पुलिस ने अतीक की नामजदगी को गलत बता एफआर लगा दी थी।

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