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अतीक पर हाईकोर्ट और सख्त, क्रिमिनल हिस्ट्री तलब
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 11 Feb 2017 01:31 AM IST
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अतीक अहमद (फाइल फोटो)
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शियाट्स परिसर में तोड़फोड़ के मामले में पूर्व सांसद अतीक अहमद पर हाईकोर्ट का रुख और सख्त हो गया है। पुलिस की लचर विवेचना और अभियुक्तों की गिरफ्तारी नहीं होने से नाराज कोर्ट ने एसपी यमुनापार अशोक कुमार से कहा कि यदि वह अभियुक्तों को गिरफ्तार कर पाने में असमर्थ हैं तो क्यों न जांच किसी दूसरी एजेंसी को सौंप दी जाए। कोर्ट के आदेश पर एसपी यमुनापार मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद थे।
मामले की सुनवाई कर रही चीफ जस्टिस डीबी भोसले और जस्टिस यशवंत वर्मा की पीठ ने 13 फरवरी तक अतीक अहमद की क्रिमिनल हिस्ट्री कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा है। इसी दिन आगे की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी है। याचिका दाखिल करने वाले शियाट्स के प्राक्टर रामकिशन सिंह ने सुनवाई के दौरान याचिका वापस लेनी चाही मगर अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया। पीठ ने कहा कि वह इस मामले को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए स्वत: कार्रवाई करेंगे।
अतीक अहमद द्वारा सरेंडर करने के लिए स्पेशल सीजेएम की कोर्ट में दी गई अर्जी के बाबत भी पीठ ने साफ कर दिया कि मामले की सुनवाई अभी चल रही है इसलिए अतीक को यदि समर्पण करना है तो उनके समक्ष (पीठ ) करें। अधीनस्थ न्यायालय को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक वह सरेंडर अर्जी पर सुनवाई न करे। कोर्ट ने डीम्ड विश्वविद्यालय शियाट्स के परिसर में अतीक अहमद और उनके समर्थकों द्वारा घुसकर अराजकता का माहौल पैदा करने की घटना को काफी गंभीर माना है। पुलिस कमजोर धाराओं में मुकदमा होने के कारण गिरफ्तारी से बच रही है। इस पर नाराजगी जताते हुए पीठ ने कहा कि शैक्षणिक संस्था के परिसर में घुसकर अराजकता पैदा करना अपने आप में बेहद गंभीर मामला है और इस मामले में गिरफ्तारी होनी चाहिए। याचिका पर 13 फरवरी को सुनवाई होगी।
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मामले की सुनवाई कर रही चीफ जस्टिस डीबी भोसले और जस्टिस यशवंत वर्मा की पीठ ने 13 फरवरी तक अतीक अहमद की क्रिमिनल हिस्ट्री कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा है। इसी दिन आगे की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी है। याचिका दाखिल करने वाले शियाट्स के प्राक्टर रामकिशन सिंह ने सुनवाई के दौरान याचिका वापस लेनी चाही मगर अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया। पीठ ने कहा कि वह इस मामले को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए स्वत: कार्रवाई करेंगे।
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अतीक अहमद द्वारा सरेंडर करने के लिए स्पेशल सीजेएम की कोर्ट में दी गई अर्जी के बाबत भी पीठ ने साफ कर दिया कि मामले की सुनवाई अभी चल रही है इसलिए अतीक को यदि समर्पण करना है तो उनके समक्ष (पीठ ) करें। अधीनस्थ न्यायालय को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक वह सरेंडर अर्जी पर सुनवाई न करे। कोर्ट ने डीम्ड विश्वविद्यालय शियाट्स के परिसर में अतीक अहमद और उनके समर्थकों द्वारा घुसकर अराजकता का माहौल पैदा करने की घटना को काफी गंभीर माना है। पुलिस कमजोर धाराओं में मुकदमा होने के कारण गिरफ्तारी से बच रही है। इस पर नाराजगी जताते हुए पीठ ने कहा कि शैक्षणिक संस्था के परिसर में घुसकर अराजकता पैदा करना अपने आप में बेहद गंभीर मामला है और इस मामले में गिरफ्तारी होनी चाहिए। याचिका पर 13 फरवरी को सुनवाई होगी।
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