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अतीक-अशरफ हत्याकांड: अतीक की मौत से किसको था फायदा, दुश्मन ही नहीं दोस्त भी शक के दायरे में

Sat, 22 Apr 2023 04:36 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 22 Apr 2023 04:36 PM IST
सार

अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या को छह दिन बीत चुके हैं। शूटर भी पकड़े गए हैं, लेकिन सबसे बड़े सवाल का जवाब मिलना अभी बाकी है। सवाल यह है कि इतने हाईप्रोफाइल हत्याकांड के पीछे आखिर वजह क्या थी।

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Ateeq-Ashraf murder case: Who benefited from Ateeq's death, not only enemies but also friends under suspicion
अतीक अहमद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या को छह दिन बीत चुके हैं। शूटर भी पकड़े गए हैं, लेकिन सबसे बड़े सवाल का जवाब मिलना अभी बाकी है। सवाल यह है कि इतने हाईप्रोफाइल हत्याकांड के पीछे आखिर वजह क्या थी। हालांकि गिरफ्तार शूटर नाम कमाने के लिए वारदात करने का बयान दे रहे हैं लेकिन पुलिस को इस पर भरोसा नहीं है। ऐसे में इस सवाल का भी जवाब ढूंढ़ा जा रहा है कि माफिया भाइयों की मौत से आखिर फायदा किसको था।

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जिस तरह से इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया, उससे यह भी आशंका जाहिर की जा रही है कि यह किडी बड़ी साजिश का हिस्सा हो। हत्या में सात लाख की प्रतिबंधित पिस्टलाें के इस्तेमाल से शक की सुई कॉन्ट्रैक्ट किलिंग की ओर भी घूम गई है। ऐसे में अब इस सवाल का जवाब बेहद अहम हो गया है कि आखिर वह कौन लोग थे जिनको अतीक या अशरफ के जिंदा रहने से नुकसान था।
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सूत्रों का कहना है कि नजर दौड़ाएं तो पाएंगे कि ऐसे लोगों में बिल्डर से लेकर वह कथित अधिकारी तक शामिल है, जिसके बारे में अशरफ ने कुछ दिनों पहले ही बयान दिया था कि उसने दो हफ्ते में हत्या कराने की धमकी दी है।

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कुछ बिल्डरों से अतीक की थी बेहद करीबी
अतीक की कुछ ऐसे बिल्डरों से बेहद करीबी थी जो उसकी ब्लैक मनी को अपने प्रोजेक्ट में लगाकर वैध करते थे। इसके एवज में अतीक उन्हें संरक्षण देता था और महंगी जमीनों को कम दाम में दिलाने का भी काम करता था। इनमें प्रयागराज से लेकर लखनऊ तक के बिल्डर शामिल हैं। अतीक की एक-दो नहीं बल्कि 50 से 100 करोड़ से ज्यादा की रकम बिल्डरों के प्रोजेक्ट में लगी हुई हैं। ऐसे में यह भी हो सकता है कि करोड़ों की रकम को हड़प कर जाने की नीयत से ही इस हत्याकांड को अंजाम दिलवाया गया।

कई सालों में उसके कई दोस्त बन गए थे जानी दुश्मन
पिछले कुछ सालों में अतीक के दुश्मनों की फेहरिश्त में तेजी से इजाफा हुआ। इनमें से कई ऐसे रहे जो कभी अतीक के बेहद करीबी रहे। उसके लिए प्रॉपर्टी डीलिंग समेत तमाम धंधों को संचालित करते रहे। लेकिन जेल जाने के बाद उनकी कमाई के हिस्से को लेकर माफिया से अनबन हो गई। ऐसे में उन्होंने माहौल का फायदा उठाया और अतीक पर मुकदमा दर्ज कराया। जानकारों का कहना है कि भले ही अतीक-अशरफ जेल में हों लेकिन उन्हें मालूम था कि जब तक दोनों जिंदा हैं, उन्हें खतरा बना रहेगा। ऐसे में उन्होंने दोनों भाइयों को निपटाने की साजिश रच डाली।

कई सफेदपोश रहते थे हमेशा संपर्क में
अतीक के कई सफेदपोशों से संबंध थे और यह किसी से छिपा नहीं है। प्रयागराज से लेकर कई अन्य शहरों के सफेदपोशों से उसकी करीबी रही है। 2017 में योगी सरकार के बनने से पहले इन सफेदपोशों का अपने हर छोटे-बड़े कामों के लिए अतीक की शरण में जाने की चर्चाएं आम थीं। अतीक के जेल जाने के बाद भी तालमेल बना रहा। लेकिन उमेश पाल हत्याकांड के बाद कुनबे समेत अतीक के फंसने के बाद से उन्होंने पल्ला झाड़ना शुरू कर दिया। इनमें से ही एक सफेदपोश उमेश पाल की हत्या के बाद चर्चा में रहा।

चर्चा यह रही कि हत्याकांड के बाद अतीक ने उसके पास फोन लगवाया। कई बार फोन आने के बाद भी उसने कॉल रिसीव नहीं की। जिस पर अतीक ने नॉर्मल कॉल कर फोन न रिसीव करने की वजह पूछी। जिस पर उसने फौरन कॉल डिसकनेक्ट कर दी। जानकारों का कहना है अतीक ऐसे कई सफेदपोशों का राजदार था। ऐसे में इस आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता कि राज को राज रखने के लिए अतीक का मुंह हमेशा के लिए बंद करा दिया गया।

कई अधिकारियों पर परिजन लगा चुके हैं आरोप
इस हत्याकांड के बाद शक की सुई उस कथित अधिकारी की ओर भी घूम रही है, जिसने अशरफ को धमकी दी थी। गौरतलब है कि अशरफ ने 28 मार्च को बरेली जेल जाते वक्त यह खुलासा किया था कि एक बड़े अफसर ने उसे दो हफ्ते में जान से मरवाने की धमकी दी है। यह बात सही भी साबित हुई और ठीक 17 दिन बाद उसे और उसके भाई को मौत के घाट उतार दिया गया। अतीक-अशरफ के परिजन भी लगातार इस बात की आशंका जताते रहे थे कि उनकी हत्या की साजिश रची जा रही है। ऐसे में अगर यह आरोप सही है तो कथित अधिकारी की भूमिका भी संदेह से परे नहीं मानी जा सकती।

करीबियों के ठिकानों पर रेड में तो नहीं छिपा राज?
अतीक-अशरफ की हत्या का राज पिछले दिनों उनके करीबियों के 15 ठिकानों पर हुई ईडी की रेड में तो नहीं छिपा, यह भी सवाल शहर की फिजाओं में चर्चा में है। दरअसल 13 अप्रैल को हुई इस कार्रवाई में 100 करोड़ की बेनामी संपत्ति का खुलासा हुआ था। 50 करोड़ से ज्यादा के लेनदेन की बात भी सामने आई थी। बेनामी संपत्तियों से संबंधित सैकड़ों दस्तावेज भी बरामद हुए थे जिनकी पड़ताल ईडी की टीम कर रही है। इस कार्रवाई के बाद कई बड़े नाम जांच एजेंसियों के रडार पर आ गए थे। इस मामले यह भी संभावना जताई जा रही थी कि मनी लांड्रिंग मामले की जांच में जुटी ईडी अतीक को कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ कर सकती है। इसमें कई बड़े चेहरे बेनकाब होने की भी संभावना थी। ऐसे में इस बात का भी शक जताया जा रहा है कि कहीं इस रेड में ही तो अतीक की हत्या का राज नहीं छिपा।

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